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मिसाल हैं पद्मश्री सनी वर्के, ऐसे बना दी वर्ल्ड क्लास स्कूलों की सीरीज

6 वर्ष पहले
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केरल के एक मध्यमवर्गीय क्रिश्चियन दंपती के पुत्र हैं सनी वर्के। 1959 में वे जब दो वर्ष के थे ताे उनके पिता ने ब्रिटिश बैंक ऑफ मिडिल ट्रस्ट ज्वााइन किया और परिवार दुबई शिफ्ट हो गया। दुबई तब आज जैसा विकसित नहीं था। सनी के मां-पिता यहां अरबी लोगों को इंग्लिश पढ़ाने लगे। वे शाही परिवार के भी अंग्रेजी ट्यूटर थे। (एजुकेशन और जॉब से जुड़ी खबरों को पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें)
अप्रवासियों के बच्चों के लिए पहल
1966 में आॅयल डिस्कवरी के साथ दुबई दौड़ने लगा। भारत सहित कई देशों के श्रमिक वहां पहुंचने लगे। सनी के मां-पिता ने 1968 में दुबई में अप्रवासी नागरिकों के बच्चों के लिए अावर ऑन इंग्लिश हाईस्कूल स्थापित किया। 1977 में सनी वर्के दुबई लौटे तो कई बिजनेस करने के बाद 1980 में उन्होंने परिवार के स्कूल के सूत्र संभाले, तब वहां 400 छात्र पढ़ रहे थे। सनी वर्के ने भारतीय, पाकिस्तानी व ब्रिटिश स्कूल खोले और 2000 में स्थापित की- ग्लोबल एजुकेशन मैनेजमेंट सिस्टम्स (जीईएमएस)। इस कंपनी ने 2003 में इंग्लैंड में और एक साल बाद दुनिया के कई देशों में स्थानीय भागीदारों के साथ वर्ल्ड क्लास स्कूलों की सीरीज बना दी।
निर्धन छात्रों के लिए बजट स्कूल
जीईएमएस आज हर आय वर्ग के बच्चों के लिए स्कूलों का संचालन करता है। इसके महंगे स्कूलों में क्लास रूम छोटे हैं, पर विशाल ग्राउंड्स हैं, जहां बच्चे गोल्फ व टेनिस खेलते हैं। सनी वर्के कहते हैं- जीईएमएस अपने स्कूलों के एक छात्र के बदले सौ निर्धन छात्रों को बजट स्कूलों में वही शिक्षा उपलब्ध करवा रहा है, जो महंगे स्कूलों के छात्र प्राप्त करते हैं। सनी कहते हैं- सामाजिक उद्यमी वह है, जो मुनाफे से परहेज ना करे, पर जिसका लक्ष्य केवल मुनाफा अर्जन ना हो।
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