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कलाम ने अन्ना के आंदोलन से लिया था ये आइडिया, जानिए कैसे बन गया मिशन

हर बात में से अपने लिए कुछ पॉजिटिव ढूंढ निकालने वाले डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने अन्ना हजारे के मूवमेंट से भी आइडिया निकाल लिया था। यह आइडिया आज देशभर में एक मिशन बन गया है। यह मिशन है बच्चों को फ्री किताबें प्रोवाइड करवाने का।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Dec 03, 2016, 12:03 AM IST

  • सेल्फ हेल्प डेस्क। हर बात में से अपने लिए कुछ पॉजिटिव ढूंढ निकालने वाले डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने अन्ना हजारे के मूवमेंट से भी आइडिया निकाल लिया था। यह आइडिया आज देशभर में एक मिशन बन गया है। यह मिशन है बच्चों को फ्री किताबें प्रोवाइड करवाने का। कैसे मिला आइडिया…?
    शुरू किया ‘वॉट केन आई गिव मिशन’…
    कलाम के साथ कई किताबों के को-राइटर और OSD रहे सृजन पाल सिंह ने dainikbhaskar.com के साथ बातचीत में इस आइडिया का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि कलाम अन्ना हजारे के इस मूवमेंट को एक पोटेंशियल आइडिया की तरह देख रहे थे। दरअसल, कलाम इस बात पर विचार कर रहे थे कि कैसे लोगों की ‘सिर्फ अपना’ सोचने की टेंडेंसी को बदला जाए। बड़े स्तर पर अन्ना के साथ यूथ को जुड़ता देख कलाम ने एक नया विजन तैयार किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को देश, समाज और दुनिया के हित में काम करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। इस आइडिया के साथ कलाम ने सृजन पाल सिंह के साथ मिलकर ‘वॉट केन आई गिव मिशन’ (What Can I Give Mission) की शुरुआत की। इसके तहत ‘कलाम सेंटर’ के नाम से निशुल्क लाइब्रेरी की चेन बनाई जा रही है।
    > अधूरे सपनों को पूरा करने की जिम्मेदारी…
    सृजन पाल सिंह ने कहा कि चाहे डॉ. कलाम शारीरिक रूप से हमारे बीच मौजूद न हों, पर उनकी प्रेरणा और सपने हमेशा हमारे साथ रहेंगे। उनके अधूरे सपनों को साकार करने का बीड़ा उठा चुके सृजन इसी सिलसिले में शुक्रवार को भोपाल आए थे। वे कई शहरों के साथ भोपाल में भी कलाम सेंटर के नाम से एक फ्री लाइब्रेरी स्थापित कर रहे हैं। चर्चा में उन्होंने कलाम और उनके सपनों से जुड़े कई पहलुओं पर बात की। डॉ. कलाम के सपने और उनकी सोच से जुड़ी कुछ चुनिंदा बातें हम यहां आपको बता रहे हैं।
  • > What Can I Give Mission मूल रूप से देने की भावना पर आधारित है। इसमें युवाओं को समाज, देश, पर्यावरण आदि से जोड़ा जा रहा है। उन्हें प्रेरित किया जा रहा है कि वे अपना नॉलेज अपनी शक्ति एक-दूसरे के साथ बाटें, ताकि यूथ की ताकत और हौंसले के साथ देश-दुनिया तरक्की कर सके और खुशहाल बने।
  • > डॉ. कलाम कहते थे कि लोगों की सोच केवल लेने या हासिल करने की बन गई है। यही सारी समस्याओं की जड़ है। अगल खुशहाल देश बनाना है तो इस सोच को बदलना होगा। हासिल करने के बजाय लोगों में देने, बांटने और शेयर करने की सोच डेवलप करनी होगी। इससे हम एक बेहतर देश और बेहतर विश्व का निर्माण कर सकेंगे। डॉ. कलाम की यह सोच ही बनी What Can I Give Mission का आधार।
  • > सृजन पाल सिंह ने बताया डॉ. कलाम को किताबों से बहुत प्यार था। वे किताबें पढ़ने के लिए अपने बीजी रुटीन में से भी समय निकालते थे। लोगों को किताबें गिफ्ट करते थे। डॉ कलाम चाहते थे कि एक दिन ऐसा आए कि हर घर में एक लाइब्रेरी हो। हर बच्चे के पास पढ़ने के लिए पुस्तकें हों। सिंह बताते हैं कि उनके इसी सपने को साकार करने के लिए उन्होंने एक मिशन की शुरुआत की है।
  • > सृजन पाल सिंह स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ मिलकर पूरे देश में ‘कलाम सेंटर’ के नाम से निशुल्क लाइब्रेरी की चेन बना रहे हैं। पहली लाइब्रेरी नवंबर, 2015 में अहमदाबाद में शुरू हो चुकी है। फिलहाल पूरे देश में 93 ऐसी लाइब्रेरी बन चुकी हैं, जिनमें से 43 ने काम करना भी शुरू कर दिया है।
  • > सृजन पाल सिंह ने बताया कि कलाम लाइब्रेरी में हर किस्म की ज्ञानवर्धक किताबें होंगी। कोर्स बुक के साथ अन्य किताबें और कहानियां भी होंगी। बच्चे या बड़े यहां आकर किताबें पढ़ सकेंगे, पढ़ने के लिए घर भी ले जा सकेंगे। इसके लिए उन्हें किसी किस्म की फीस नहीं देनी होगी।
  • > सृजन और उनके साथियों ने शुरुआती दौर में 3 लाख जरूरतमंद बच्चों तक किताबें पहुंचाने का टारगेट रखा है। कलाम के इस सपने को पूरा करने के लिए सृजन के साथ अब तक 40 लाख से ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं।
  • > सृजन का कहना है कि देश में कई ऐसे बच्चे हैं, जो ठीक से पढ़ भी नहीं पाते हैं। ऐसे बच्चों की शिक्षा और उनके नॉलेज में बढ़ोतरी के लिए उनसे जुड़े लोग रोज 2 घंटे इन बच्चों को पढ़ाएंगे, ताकि कलाम का सपना पूरा हो सके। इस ह्यूमन लाइब्रेरी में बड़े-बुजुर्गों को भी जोड़ा जाएगा, ताकि नाना-नानी, दादा-दादी की कहानियों के जरिए बच्चों को What Can I Give की शिक्षा दी जा सके। उन्हें एक अच्छे राष्ट्र के निर्माण के लिए प्रेरित किया जा सके।
  • > डॉ. कलाम हमेशा कहते थे कि वे एक टीचर के रूप में पहचाने जाना चाहते हैं। उनके इस सपने को पूरा करने के लिए सृजन और उनके साथी मिलकर एक बस पूरे देशभर में चलाएंगे। इस बस का नाम होगा ‘Missile Of Dream’। यह बस देश के अलग-अलग भागों में जाकर ऐसे टीचर्स का सम्मान करेगी, जो अपना जीवन बच्चों को शिक्षित करने में लगा रहे हैं।
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