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स्ट्रेस एक मानसिक समस्या है, इससे घबराएं नहीं, इसे मैनेज करें: दीपिका

कम ही बॉलीवुड सेलिब्रिटिज ऐसे होते हैं, तो अपने निजी जीवन के अनुभवों को खुलकर सबके सामने रखते हैं। वह भी ऐसे, जो आम लोग आम तौर पर दुनिया के सामने नहीं लाते। एक वक्त था जब दीपिका पादुकोण बढ़े हुए स्ट्रेस के कारण डिप्रेशन में आ गईं थीं। यह इतना बढ़ गया था कि इससे उबरने के लिए उन्हें काउंसलर और साइकैट्रिस्ट की मदद भी लेनी पड़ी।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Oct 24, 2016, 12:03 AM IST

  • सेल्फ हेल्प डेस्क।एक वक्त था जब दीपिका पादुकोण बढ़े हुए स्ट्रेस के कारण डिप्रेशन में आ गई थीं। यह इतना बढ़ गया था कि इससे उनकी जिंदगी नर्क जैसी हो गई थी। इससे उबरने के लिए उन्हें काउंसलर और साइकैट्रिस्ट की मदद भी लेनी पड़ी। कहीं कुछ करने का मन नहीं करता
    था...
    अपने स्ट्रेस और डिप्रेशन के दौर के बारे में दीपिका कहती हैं कि इस कारण वे न ठीक से खा पाती थीं, न कहीं जाने का मन करता था। दोस्तों के साथ बाहर जाना, फिल्में देखना भी पसंद नहीं आता था। दिमाग ब्लैंक हो जाता था, कुछ समझ नहीं आता था। शूटिंग के दौरान खुद को अपनी वेनिटी वैन में बद कर रोती थी। घर पर खुद को बाथरूम में बंद कर रोती थी। काउंसलर और डॉक्टर की मदद से फिर नॉर्मल हुई।
    फिर बनाया लाइव लव लॉफ फाउंडेशन..
    दीपिका कहती हैं कि उन्होंने सबसे पहले फरवरी 2014 में स्ट्रेस फील किया। उनका कहना है कि वैसे तो लगभग हर व्यक्ति किसी न किसी स्ट्रेस में रहता है। पर जब यह बढ़ जाता है तो डिप्रेशन में बदल जाता है और जीवन नर्क बना देता है। दीपिका का कहना है कि अपनी इस परेशानी से उबरने के बाद ही उन्होंने Live Love Laugh फाउंडेशन शुरू किया ताकि वे दूसरे लोगों की स्ट्रेस और डिप्रेशन से उबरने में मदद कर सकें।
    आगे की स्लाइड्स में जाने क्या स्थिति थी दीपिका की और वे कैसे उबरीं अपने स्ट्रेस और डिप्रेशन से...
  • हम कई बार यह ही नहीं समझ पाते कि हमें समस्या क्या है। बस परेशान रहते हैं। स्ट्रेस नॉर्मल भी होता है और लंबा भी। अगर इसे मैनेज न किया जाए तो यह डिप्रेशन में बदल जाता है, जो घातक है। यह समझना भी जरूरी है कि उदासी और स्ट्रेस में अंतर है। अगर कोई बात आपको लगातार परेशान कर रही है, तो आप स्ट्रेस्ड हैं। इसलिए पहले यह तलाशें कि किन बातों के कारण आप परेशान हैं। मैं भी खुद को बाथरूम में बंद कर बिना बात के रोती थी।
  • कई बार यह भी होता है कि आप बस परेशान रहते हैं और आपको यह भी पता नहीं चलता कि आप क्यों परेशान हैं। ऐसे में जरूरी है कि खुद को समय दें और उन चीजों की लिस्ट बनाएं कि आपके दिमाग में क्या-क्या चल रहा है। कई बार ऐसा भी होता है जैसे भूखे हैं, पर खाना नहीं खा पा रहे। कहीं जाना है पर ब्लैंक बैठे हैं, उठ ही नहीं रहे। बहुत ज्यादा सो रहे हैं या फिर सो ही नहीं पा रहे हैं। मेरे साथ यह सब हुआ। खुद को ऑब्जर्व करने के बाद ही मैं समझ पाई कि समस्या क्या है।
  • सभी के जीवन में काम होते हैं, जिम्मेदारियां होती हैं, टारगेट्स होते हैं। उसका टेंशन भी रहता है। टेंशन ही आगे चलकर स्ट्रेस का कारण बनता है। ऐसे में कई बार मन करता है कि मैं आज कुछ नहीं कर रहा। बस अकेला रहना चाहता हूं। ऐसे में आपके सिर पर यह बोझ भी होता है कि आपको अपने काम भी समय पर निपटाने हैं, पर वो हो नहीं पाते। ऐसे में आप और स्ट्रेस्ड हो जाते हैं, जो आगे चलकर डिप्रेशन में बदल जाता है। ऐसे में आपको खुद को मजबूत बनाना होगा। ऐसे में लगातार खुद से यह कहते रहना चाहिए कि मैं कर सकता हूं, मैं इतना मजबूत हूं। मैं इन समस्याओं से हारूंगा नहीं, लडूंगा और जीतूंगा। मैंने शूटिंग के दौरान यह समस्या सबसे ज्यादा महसूस की है। अपने आप को हर बार समझाया और फिल्में पूरी कीं।
  • जब आप खुद की मदद न कर पाएं या यह महसूस करें कि आपका दिमाग आपके काबू में ही नहीं है, वह आपकी समस्याएं नहीं सुलझा पा रहा है। आप खुद से बात कर रहे हैं, लेकिन आपका दिमाग आपको जवाब नहीं दे पा रहा है। तब अपनी समस्या अपने करीबी को बताएं, इसे बिल्कुल न छुपाएं। मैंने भी अपनी मॉम को सब बताया और आखिरकार इससे निजात पाई। करीबियों का सपोर्ट बहुत जरूरी है।
  • अपने स्ट्रेस और समस्याओं के बारे में आपके करीबी व्यक्ति को बताएं। उससे चर्चा करें। इससे आपका आत्मबल बना रहेगा। अगर आप दोनों यह महसूस करने लगें कि समस्या आसानी से नहीं सुलझ रही है, तो किसी काउंसलर या डॉक्टर के पास जाने में हिचकिचाएं नहीं। ध्यान रखें कि स्ट्रेस कई बार आत्महत्या के लिए भी प्रेरित करता है। ऐसे मामलों में मदद करने वाले हर जगह मौजूद हैं।
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