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जब IAS अफसर ने पूछा था ईमानदारी पर सवाल तो कलाम ने दिया था ये जवाब

पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम एक बार IAS अफसरों की ट्रेनिंग प्रोग्राम देखने मसूरी पहुंचे थे। यहां पर बतौर तैयारियां सभी ट्रेनी IAS अफसरों को पहले से ही डॉ. कलाम से सवाल-जवाब करने के लिए सवालों की पर्चियां दे दी गईं थीं। जब यह बात डॉ. कलाम को पता लगी, तो उन्होंने उन ट्रेनी अफसरों से बात करने से इंकार कर दिया जिनके पास पहले से ही तैयार सवाल थे।

Danik Bhaskar

Dec 09, 2016, 12:03 AM IST
सेल्फ हेल्प डेस्क। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम एक बार IAS अफसरों की ट्रेनिंग प्रोग्राम देखने मसूरी पहुंचे थे। यहां पर बतौर तैयारियां सभी ट्रेनी IAS अफसरों को पहले से ही डॉ. कलाम से सवाल-जवाब करने के लिए सवालों की पर्चियां दे दी गईं थीं। जब यह बात डॉ. कलाम को पता लगी, तो उन्होंने उन ट्रेनी अफसरों से बात करने से इंकार कर दिया जिनके पास पहले से ही तैयार सवाल थे।
उन्होंने लास्ट बेंच पर बैठी एक महिला ट्रेनी अफसर को सवाल पूछने के लिए कहा। उनका कहना था कि जो सवाल मन से निकलें, वही बेहतर होते हैं, तैयारी तो एग्जाम्स की भी की जाती है। तब उस ट्रेनी IAS ने पूछा, “आपने कहा कि लाइफ में इंटिग्रिटी मेंटेन करना जरूरी है, पर मेरे प्रोफेशन में कभी मेरे बॉस ने मुझसे ऐसा कुछ करने को कहा, जो सही नहीं है तो मैं कैसे इंकार करूं?”
दरअसल, IAS ट्रेनी अफसरों से बात करने से पहले कलाम ने अपने संबोधन में सभी को शपथ दिलाई कि वे अपनी लाइफ में इंटिग्रिटी (ईमानदारी) मैंटेन रखेंगे। जब कलाम ने अचानक से इस महिला IAS ट्रेनी को अचानक सवाल करने के लिए बोला तो उन्होंने यह सवाल किया।
> आगे की स्लाइड में जाने कलाम ने क्या दिया जवाब...
> कलाम ने जवाब दिया- मैंने बड़े सरकारी विभागों में 50 साल तक काम किया, पर किसी ने मुझसे कुछ भी गलत करने की सिफारिश तक नहीं की। क्यों...? क्योंकि वे सब जानते थे कि मैं अपने ईमानदारी के उसूल से कभी नहीं भटकूंगा और न ही किसी को गलत काम करने दूंगा। ईमानदारी मेरा ब्रांड बन गया। 
> डॉ. कलाम के करीबी और OSD रहे सृजन पाल सिंह ने बताया कि डॉ. कलाम खुद बहुत ही पोलाइट (मृदु भाषी) थे और लोगों को भी पोलाइट रहने की सीख देते थे। चाहे उनका ड्राइवर हो या माली, वे सभी से बहुत नम्रता से बात करते थे। 
> इस मिशन में यूथ को जोड़ा जा रहा है, ताकि वे अपनी शक्ति, विजन और अपने नॉलेज से देश को खुशहाल बनाएं। डॉ. कलाम भी खुद युवाओं से मिलते थे और उन्हें अपने अंदर देने का भाव जागृत करने के लिए प्रेरित करते थे। 
> आप जरूर सफल हों, पर अपना ग्राउंड कनेक्ट बनाए रखें। इससे आपसे जुड़े लोगों के बाच आपका सम्मान बढ़ेगा और आपका साथ देने वाले अच्छे लोग ज्यादा मिलेंगे। डॉ. कलाम खुद अपने पुराने दिनों में अपने जूते रिपेयर करने वाले और कैंटीन वाले लोगों से मिलते रहते थे। 
> डॉ. कलाम कहते थे कि अच्छा दिमाग स्कूल की लास्ट बैंच पर भी मिल सकता है। केवल लीक से हटकर सोचने की जरूरत है। 
> अगर आपके काम के प्रति आपके विचार पॉवरफुल होंगे, तो किसी भी हाल में आप अपने काम से भटकेंगे नहीं। अच्छी और सकारात्मक सोच बनाए रखेंगे तो अपने आप सफल बनेंगे। 

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