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इन्होंने लड़ी राष्ट्रगान के लिए लड़ाई, सीखिए इनसे ये 5 बातें

77 साल के श्यामनारायण चौकसे की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट का आदेश आया है कि थियेटर में फिल्म से पहले राष्ट्रगान बजेगा, सब खड़े होंगे और दरवाजे बंद रहेंगे। इस फैसले के लिए चौकसे ने लंबी लड़ाई लड़ी है। हम बता रहे हैं ऐसी 5 बातें जो आप श्यामनारायण चौकसे से सीख सकते हैं।

Danik Bhaskar | Dec 01, 2016, 02:36 PM IST
करियर डेस्क। भोपाल के 77 साल के श्यामनारायण चौकसे की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट का आदेश आया है कि थियेटर में फिल्म से पहले राष्ट्रगान बजेगा, सब खड़े होंगे और दरवाजे बंद रहेंगे। इस फैसले के लिए चौकसे ने लंबी लड़ाई लड़ी है। हम बता रहे हैं ऐसी 5 बातें जो आप श्यामनारायण चौकसे से सीख सकते हैं।
जानिए क्या हैं वे 5 इंस्पीरेशनल बातें…
जो ठान लिया वह करके माने :
 
वे 2002 में भोपाल के एक थियेटर में कभी खुशी कभी गम फिल्म देखने गए थे। फिल्म के दौरान राष्ट्रगान शुरू हुआ तो वे खड़े हो गए। उन्हें खड़ा हुआ देखकर पीछे की कतार से लोगों ने हुटिंग शुरू कर दी। इसी के बाद उन्होंने राष्ट्रगान को अनिवार्य बनाने की ठानी। 14 साल की लड़ाई के बाद कामयाबी हासिल की। 
लगातार कोशिश करते रहे :
 
राष्ट्रगान को लेकर जब उन्होंने सिनेमाहाल के मैनेजर से शिकायत की तो मैनेजर ने कुछ ध्यान नहीं दिया। उन्होंने अवेयरनेस के लिए बैनर, पोस्टर चस्पां किए। इसके बाद कोई बड़ा अंतर नजर नहीं आया। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और वे कोर्ट गए।
केवल लड़े नहीं, स्टडी और रिसर्च भी की : 
 
कोर्ट में बिना तथ्यों के बात नहीं की बल्कि राष्ट्रगान से जुड़े हर फैसले को पढ़ा, दस्तावेज जुटाए, अखबारों से कंटेंट जुटाया। पूरी तैयारी के साथ कोर्ट में अपना पक्ष रखा। 
आत्मविश्वास बनाए रखा :
 
14 साल की लड़ाई में कई बार उतार-चढ़ाव आए। एक बार फिल्म निर्देशक करण जाैहर ने चौकसे की याचिका पर सुनाए गए एक फैसले पर स्टे भी ले लिया। इसके बावजूद उन्होंने आत्मविश्वास नहीं खोया। बल्कि और ज्यादा मजबूती से अपना काम शुरू कर दिया।
एक जीत के बाद दूसरे लक्ष्य पर काम शुरू :
 
एक जीत मिलने के बाद भी संतोषी होकर शांत नहीं बैठ गए हैं। उन्होंने अब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि राजघाट की दुर्दशा को लेकर जंग छेड़ दी है। 

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