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जो कभी स्कूल में टॉपर नहीं रहीं, जानिए कैसे बनीं पहली महिला अंतरिक्ष यात्री

1 फरवरी 2003 को कोलंबिया अंतरिक्षयान पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश करते ही टूटकर बिखर गया था। देखते ही देखते अंतरिक्ष यान और उसमें सवार सातों यात्रियों के अवशेष टेक्सास नामक शहर पर बरसने लगे थे और सबसे सफल कहा जाने वाला यह अभियान खत्म हो गया। इसी हादसे में अंतरिक्ष पर पहुंचने वाली भारतीय मूल की पहली महिला व नासा वैज्ञानिक कल्पना चावला की भी मौत हो गई थी।

Dainik Bhaskar

Jan 31, 2017, 12:05 AM IST
Kalpana Chawla Death Anniversary : Success Story Of Kalpana Chawla
सेल्फ हेल्प डेस्क। 1 फरवरी 2003 को कोलंबिया अंतरिक्षयान पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश करते ही टूटकर बिखर गया था। देखते ही देखते अंतरिक्ष यान और उसमें सवार सातों यात्रियों के अवशेष टेक्सास नामक शहर पर बरसने लगे थे और सबसे सफल कहा जाने वाला यह अभियान खत्म हो गया। इसी हादसे में अंतरिक्ष पर पहुंचने वाली भारतीय मूल की पहली महिला व नासा वैज्ञानिक कल्पना चावला की भी मौत हो गई थी।
हम बता रहे हैं कि वे करनाल जैसे छोटे से शहर से निकलकर कैसे अंतरिक्ष तक पहुंची। जानें पूरी कहानी….।

आगे की स्लाइड्स में जानिए कैसे आगे बढ़ी कल्पना…
Kalpana Chawla Death Anniversary : Success Story Of Kalpana Chawla
हमेशा टॉप- 5 में आईं कल्पना

> हरियाणा के करनाल में 17 मार्च 1962 को जन्म लेने वाली कल्पना अपने सभी भाई-बहनों में सबसे छोटी थीं। उन्होंने  टैगोर बाल निकेतन सीनियर सेकंडरी स्कूल, करनाल (हरियाणा) से स्कूलिंग की।

> स्कूल में इंग्लिश, हिंदी व ज्योग्राफी में उनका इंटरेस्ट था लेकिन उनका फेवरेट सब्जेक्ट साइंस था। वे ड्रॉइंग में हमेशा स्काय, स्टार्स और प्लेन्स ड्रॉ किया करती थीं। 

> वे बचपन में सभी से बोला करती थीं कि उन्हें फ्लाइट इंजीनियर बनना है क्योंकि उन्हें लगता था कि इंजीनियर ही फ्लाइट डिजाइन करते हैं। वे भी फ्लाइट डिजाइन करने के बारे में सोचा करती थीं।
 
Kalpana Chawla Death Anniversary : Success Story Of Kalpana Chawla
सबसे लड़कर की हायर स्टडी 

> वे जिस सोसायटी से बिलाॅन्ग
करती थीं वहां लड़कियों को ज्यादा पढ़ाया-लिखाया नहीं जाता था लेकिन कल्पना पढ़ना चाहती थी। हायर स्टडी उनकी जिद थी।

> उन्होंने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (चंडीगढ़) के एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग  में एडमिशन लिया। कॉलेज की पढ़ाई के बाद उन्हें जॉब का ऑफर भी मिल गया लेकिन कल्पना का सपना अंतरिक्ष में जाने का था इसलिए उन्होंने जॉब ठुकरा दी। 

> इसके बाद वे यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास में मास्टर डिग्री के लिए चली गईं। कॉलेज से ही उनका एम किसी भी तरह नासा तक पहुंचना था। 
 
Kalpana Chawla Death Anniversary : Success Story Of Kalpana Chawla
खुद को पढ़ाई में पूरा झोंक दिया

> 1986 में उन्होंने सेकंड मास्टर्स डिग्री पूरी की। 1988 में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में पीएचडी की। उनके पास कमर्शियल पायलेट का लाइसेंस भी था। वे सर्टिफाइड फ्लाइट इंस्ट्रक्टर थीं।
 
> वे क्रिएटिव एस्ट्रोनॉट थी। उन्हें पोएट्री, डांसिंग, साइक्लिंग व रनिंग का बहुत शौक था। वे हमेशा स्पोर्ट्स इवेंट्स में पार्टिसिपेट करती थीं। कॉलेज के दिनों में उन्होंने कराते सीखे । 

> उनके पैरेंट्स उन्हें मोंटू नाम से बुलाते थे लेकिन 3 साल की उम्र में ही मोंटू ने खुद के लिए कल्पना नाम पसंद कर लिया था। मोंटू को उन्होंने अपना निकनेम बनाया।
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रिजेक्ट हुईं लेकिन हार नहीं मानी

> जेआरडी टाटा से इंस्पायर कल्पना ने सन् 1993 में नासा में पहली बार अप्लाई किया था। तब उन्हें रिजेक्ट कर दिया गया था। उन्होंने हार नहीं मानी। 1995 में नासा ने अंतरिक्ष यात्रा के लिए कल्पना का चयन किया।

> 19 नवंबर 1997 वह दिन था, जब उनका बचपन का सपना पूरा होने जा रहा था। इस दिन उनका पहला स्पेस मिशन शुरु हुआ। STS 87 कोलंबिया शटल में उनके साथ 6 एस्ट्रोनॉट्स और थे।

> उन्होंने पृथ्वी की 252 परिक्रमाएं पूरी की। 1 करोड़ 4 लाख हजार किमी की यात्रा की। स्पेस पर 373 से ज्यादा घंटे बिताए। उन्हें फर्स्ट ट्रेवल से लौटने के बाद नासा स्पेश मेडल, नासा डिस्टिंगविश्ड सर्विस मेडल जैसे अवॉर्ड से नवाजा गया था।
 
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दोबार हुईं थी मिशन के लिए सिलेक्ट

> सन् 2000 में कल्पना का सिलेक्शन दूसरी बार स्पेस यात्रा के लिए हुआ। यह मिशन तीन साल लेट होने के बाद 2003 में लांच हो सका। 16 जनवरी 2003 को कोलंबिया फ्लाइट STS 107 से दूसरे मिशन की शुरुआत हुई। 

> 1 फरवरी 2003 को स्पेस शटल अर्थ के एटमॉसफियर में एंटर करने के दौरान तकनीकी दिक्कत आने की वजह से नष्ट हो गया। इसमें कल्पना सहित सभी मेंम्बर्स मारे गए। यह टीम 16 दिनों में 80 एक्सपेरिमेंट पूरे कर चुकी थी।
 
Kalpana Chawla Death Anniversary : Success Story Of Kalpana Chawla
बचपन से ही कुछ अलग थीं

> वे बचपन में सभी से बोला करती थीं कि उन्हें फ्लाइट इंजीनियर बनना है क्योंकि उन्हें लगता था कि इंजीनियर ही फ्लाइट डिजाइन करते हैं। वे भी फ्लाइट डिजाइन करने की तमन्ना रखती थीं।

> वे अपने बाल खुद काटा करती थीं। कभी प्रेस किए हुए कपड़े नहीं पहनती थीं। उनका घर में हायर स्टडी करने को लेकर कई बार विवाद भी हुआ।

> वे क्रिएटिव एस्ट्रोनॉट थी। उन्हें पोएट्री, डांसिंग, साइक्लिंग व रनिंग का बहुत शौक था। वे हमेशा स्पोर्ट्स इवेंट्स में पार्टिसिपेट करती थी और दौड़ में फर्स्ट आया करती थी। वे बैडमिंटन खेलना भी बहुत पसंद करती थी।
 
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स्पेस में जाने वाली पहली भारती महिला बनीं

 > वे अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय महिला थी (बाद में उन्होंने अमेरिका की नागरिकता ले ली थी)। राकेश शर्मा के बाद वे दूसरी ऐसी भारतीय थीं, जो अंतरिक्ष तक पहुंची। 

> उन्होंने अपने दो मिशन में 30 दिन, 14 घंटे और 54 मिनट स्पेस पर बिताए।
 

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