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स्ट्रेस दूर करना है तो करें खुद से बातें, जानिए पीवी सिंधु के ऐसे ही 6 तरीके

भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी और ओलंपिक रजत पदक विजेता पीवी सिंधु ने हाल ही में चाइना ओपन सुपर सीरिज का खिताब भी अपने नाम कर लिया है। सिंधु ने फाइनल मुकाबले में चीन की सुन यू को मात दी। खेलों के दौरान उन्हें भी काफी स्ट्रेस का सामना करना पड़ता है। जानिए ऐसे 6 तरीके जिनसे पीवी सिंधु मैनेज करती हैं अपना स्ट्रेस।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Nov 21, 2016, 10:37 AM IST

  • करियर डेस्क।भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी और ओलंपिक रजत पदक विजेता पीवी सिंधु ने रविवार को चाइना ओपन सुपर सीरिज का खिताब भी अपने नाम कर लिया है। सिंधु ने फाइनल मुकाबले में चीन की सुन यू को मात दी। खेलों के दौरान उन्हें भी काफी स्ट्रेस का सामना करना पड़ता है। जानिए ऐसे 6 तरीके जिनसे पीवी सिंधु मैनेज करती हैं अपना स्ट्रेस।
    आगे की स्लाइड्स में जानिए क्या हैं स्ट्रेस दूर करने के तरीके...
  • > रियो ओलिंपिक से तीन महीने पहले कोच गोपीचंद ने सिंधू से उनके सभी गैजेट्स ले लिए थे, ताकि वे अपने गेम और ट्रेनिंग पर फोकस कर सकें। उनपर किसी किस्म का स्ट्रेस न रहे और इन चीजों से वे डिस्टर्ब न हों।
    > हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि उनकी ट्रेनिंग फिर स्टार्ट हो रही है। अब फिर वे अपने मोबाइल और अन्य गैजेट्स से दूर रहेंगी।
  • > रियो ओलिंपिक में विशेष रूप से सिंधू ने इस रूल को फॉलो किया। प्वाइंट जीतने या हारने के बाद वे मैच के दौरान खुद से सबसे ज्यादा बात करती (बुदबुदाती) नजर आईं।
  • > सिंधू के लिए गोपीचंद ने यह रूल बनाया है। मैच जीतने या हारने के बाद केवल एक घंटे तक ही उसके बारे में सिंधू को बात करने को कहा गया है। सिंधू इस रूल को फॉलो करती हैं। इससे बीती हुई बातों का दिमाग पर असर कम होता है और आगे बढ़ने की राह आसान होती है।
  • > रियो ओलिंपिक का फाइनल हारने के बाद सिंधू रो पड़ी थीं। उन्हें हार के स्ट्रेस और डिप्रेशन से उबारने के लिए गोपीचंद ने समझाया कि यह मत देखो कि मैं गोल्ड हार गई, यह देखो को कि मैंने सिल्वर जीता है।
    > अपनी पॉजिटिव एप्रोच बनाए रखो। इसके बाद सिंधू फाइनल की हार से भी उबर गईं। वे कहती हैं कि अगले 4 साल में वे वर्ल्ड नंबर 1 बनने की कोशिश करेंगी।
  • > शर्मिले स्वभाव की सिंधू अपने करियर के शुरुआती दौर में अक्सर चुप रहा करती थीं। खुद को ज्यादा एक्सप्रेस नहीं करती थीं। इससे उनका स्ट्रेस लेवल बढ़ जाता था। स्ट्रेस से बचाने के लिए कोच गोपीचंद ने उन्हें मैच में हर प्वाइंट मिलने या खोने पर चिल्लाने की ट्रेनिंग दी।
    > इसका पॉजिटिव असर हुआ। मैच के हर प्वाइंट के साथ वे चिल्ला कर अपनी भावनाएं एक्सप्रेस करने लगीं। इससे हर बार स्ट्रेस कम हुआ।
  • > 2010 में सिंधू को घर से दूर गोपीचंद के होस्टल में रहना पड़ा था। घर से दूर रहने के कारण उनका मनोबल टूट गया जिसका सीधा असर उनके खेल पर पड़ा।
    > आखिरकार गोपीचंद की सलाह पर सिंधू के पिता ने गोपीचंद एकेडमी के पास ही घर लिया और सिंधू को घर जैसा माहौल फिर मिल गया। इसके बाद वे तनाव से उबरीं और फिर से उनका गेम बेहतर होने लगा।
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Web Title: Stress Management : PV Sindhu Tips On Dealing With Stress
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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