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पीवी सिंधू कैसे करती हैं अपना स्ट्रेस दूर, जानिए उनके 6 तरीके

सेल्फ हेल्प डेस्क। देश की एकमात्र ओलिंपिक सिल्वर मेडलिस्ट पीवी सिंधू भी काफी स्ट्रेस का सामना करती हैं। उनके स्ट्रेस को दूर करने में उनके परिवार और कोच पुलैला गोपीचंद ने काफी मदद की है। स्ट्रेस रिलीविंग के लिए उन्होंने कुछ रूल्स बनाएं हैं। जानिए स्ट्रेस रिलीविंग के उनके 6 तरीके...

Dainik Bhaskar

Oct 20, 2016, 12:03 AM IST
Stress management tips of PV Sindhu
सेल्फ हेल्प डेस्क। देश की एकमात्र ओलिंपिक सिल्वर मेडलिस्ट पीवी सिंधु भी काफी स्ट्रेस का सामना करती हैं। उनके स्ट्रेस को दूर करने में उनके परिवार और कोच पुलेला गोपीचंद ने काफी मदद की है। स्ट्रेस रिलीविंग के लिए गोपीचंद ने कुछ रूल्स बनाए हैं। जानते हैं स्ट्रेस रिलीविंग के सिंधू के 6 तरीकों के बारे में।
आगे की स्लाइड्स में जानिए कैसे दूर करती है सिंधु अपना स्ट्रेस...
Stress management tips of PV Sindhu
रियो ओलिंपिक से तीन महीने पहले कोच गोपीचंद ने सिंधू से उनके सभी गैजेट्स ले लिए थे, ताकि वे अपने गेम और ट्रेनिंग पर फोकस कर सकें। उनपर किसी किस्म का स्ट्रेस न रहे और इन चीजों से वे डिस्टर्ब न हों। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि उनकी ट्रेनिंग फिर स्टार्ट हो रही है। अब फिर वे अपने मोबाइल और अन्य गैजेट्स से दूर रहेंगी। 
Stress management tips of PV Sindhu
रियो ओलिंपिक में विशेष रूप से सिंधू ने इस रूल को फॉलो किया। प्वॉइंट जीतने या हारने के बाद वे मैच के दौरान खुद से सबसे ज्यादा बात करती (बुदबुदाती) नजर आईं। 
Stress management tips of PV Sindhu
सिंधू के लिए गोपीचंद ने यह रूल बनाया है। मैच जीतने या हारने के बाद केवल एक घंटे तक ही उसके बारे में सिंधू को बात करने को कहा गया है। सिंधू इस रूल को फॉलो करती हैं। इससे बीती हुई बातों का दिमाग पर असर कम होता है और आगे बढ़ने की राह आसान होती है।
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रियो ओलिंपिक का फाइनल हारने के बाद सिंधू रो पड़ी थीं। उन्हें हार के स्ट्रेस और डिप्रेशन से उबारने के लिए गोपीचंद ने समझाया कि यह मत देखो कि मैं गोल्ड हार गई, यह देखो को कि मैंने सिल्वर जीता है। अपनी पॉजिटिव एप्रोच बनाए रखो। इसके बाद सिंधू फाइनल की हार से भी उबर गईं। वे कहती हैं कि अगले 4 साल में वे वर्ल्ड नंबर 1 बनने की कोशिश करेंगी। 
Stress management tips of PV Sindhu
शर्मिले स्वभाव की सिंधू अपने करियर के शुरुआती दौर में अक्सर चुप रहा करती थीं। खुद को ज्यादा एक्सप्रेस नहीं करती थीं। इससे उनका स्ट्रेस लेवल बढ़ जाता था। स्ट्रेस से बचाने के लिए कोच गोपीचंद ने उन्हें मैच में हर प्वाइंट मिलने या खोने पर चिल्लाने की ट्रेनिंग दी। इसका पॉजिटिव असर हुआ। मैच के हर प्वाइंट के साथ वे चिल्ला कर अपनी भावनाएं एक्सप्रेस करने लगीं। इससे हर बार स्ट्रेस कम हुआ। 
Stress management tips of PV Sindhu
2010 में सिंधू को घर से दूर गोपीचंद के होस्टल में रहना पड़ा था। घर से दूर रहने के कारण उनका मनोबल टूट गया जिसका सीधा असर उनके खेल पर पड़ा। आखिरकार गोपीचंद की सलाह पर सिंधू के पिता ने गोपीचंद एकेडमी के पास ही घर लिया और सिंधू को घर जैसा माहौल फिर मिल गया। इसके बाद वे तनाव से उबरीं और फिर से उनका गेम बेहतर होने लगा।
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