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इन्होंने मोदी को ऐसे बनाया था हीरो, इनकी प्लानिंग से आप भी लीजिए सीख

गुजरात में गुड गवर्नेंस की बात हो, या फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सफल इलेक्शन कैंपेन। बिहार के चुनाव हो या यूपी से बुलावा, प्रशांत किशोर अब देश के पॉलिटिकल किंग मेकर के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। मंगलवार को ही प्रशांत ने मुलायम सिंह यादव से मुलाकात कर यूपी के राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा की। चर्चा यह भी है कि प्रशांत यूपी में भी मुलायम की मदद करेंगे। तो आखिर क्या खास है उनकी स्ट्रेटजिक प्लानिंग में, कि उनसे जुड़ने वाला हर व्यक्ति सफल होता है? यहां हम दे रहे हैं उनकी स्ट्रेटजी और प्लानिंग की एक झलक, जिनसे आप भी ले सकते हैं सीख।

Danik Bhaskar | Nov 03, 2016, 12:41 PM IST
सेल्फ हेल्प डेस्क। गुजरात में गुड गवर्नेंस की बात हो या फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सफल इलेक्शन कैंपेन, या फिर बिहार के चुनाव हो, प्रशांत किशोर अब देश के पॉलिटिकल किंग मेकर के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। मंगलवार को ही प्रशांत ने मुलायम सिंह यादव से मुलाकात कर यूपी के राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा की। चर्चा यह भी है कि प्रशांत यूपी में मुलायम की मदद करेंगे। तो आखिर क्या खास है उनकी स्ट्रेटजिक प्लानिंग में कि उनसे जुड़ने वाला हर व्यक्ति सफल होता है? यहां हम दे रहे हैं उनकी स्ट्रेटजी और प्लानिंग की एक झलक, जिनसे आप भी ले सकते हैं सीख।
आगे की स्लाइड्स में जानिए उनकी खासियतों के बारे में ..
> UN में हेल्थ एक्टिविस्ट के तौर पर उन्होंने गुजरात में बुरी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर डाटा एनालिसिस दिया। यह नरेंद्र मोदी को इतना पसंद आया कि उन्होंने प्रशांत से मिलकर अपना इलेक्शन कैंपेन उन्हें सौंप दिया। मोदी के इलेक्शन कैंपेन में भी प्रशांत ने ग्राउंड सर्वे पर ज्यादा ध्यान दिया। प्रशांत का मानना है कि कोई भी काम हाथ में लेने से पहले मार्केट एनालिसिस बहुत जरूरी है।
> बिहार इलेक्शन्स में इसका उदाहरण देखने को मिलता है। यादव, दलित, सवर्ण वोट बैंक को कैसे मैनेज करना है। नीतीश कुमार को कहां खुद जाकर जनसंपर्क करना है। किस लेवल के नेता या कार्यकर्ता को क्या काम सौंपना है, आदि इस स्ट्रेटेजिक प्लानिंग के एक्जांपल हैं, जो सफल हुई। प्रशांत अपनी प्लानिंग को तीन भागों में बांटते हैं- शुरूआती, फीडबैक के साथ कैंपेन के दौरान की प्लानिंग और फाइनल कैंपेन। इससे जरूरत पड़ने पर आप अपने प्लान में बदलाव कर सकते हैं और हर स्टेज पर इसका फीडबैक लेकर आगे की स्ट्रेटजी बना सकते हैं।
> मोदी के इलेक्शन कैंपेन में उन्होंने यही किया। मोदी का 3D भाषण इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। प्रशांत का मानना है कि एक-जैसी चीजों से लोग बोर हो जाते हैं और उससे दूरी बनाते हैं। इसका लॉजिक है कि भाषण सुनना शायद ही किसी को पसंद हो, पर 3D भाषण देखना सभी को पसंद आएगा। ऐसा करने से न सिर्फ मीडिया का कवरेज मिला, बल्कि मोदी को करोड़ों लोगों ने एक साथ देखा और सुना। इससे उनकी भी अलग इमेज बनी। 
> लोकसभा और बिहार चुनाव में उन्होंने मोदी और नीतीश का सोशल मीडिया पूरी तरह से मैनेज किया। बिहार चुनाव में उन्होंने नीतीश कनेक्ट नाम से फेसबुक पेज बनाया और उसपर लोगों को खुलकर सुझाव और शिकायतें देने के लिए प्रेरित किया। इस पेज पर सीधे नीतीश को जवाब देने के लिए कहा। इससे लोगों का भरोसा और जुड़ाव नीतीश की ओर बढ़ा। बिहार के राजनैतिक समीकरणों का फायदा उठाते हुए उन्होंने लालू प्रसाद यादव को भी नीतीश से हाथ मिलाने के लिए ‘उकसाया’। जन-जुड़ाव देखते हुए आखिर नीतीश को सभी ओर से समर्थन मिला और वे जीते। 
> मोदी की चाय पर चर्चा, राहुल की खाट पर चर्चा, नीतीश का घर-घर दस्तक अभियान इसके सजीव उदाहरण हैं। उन्होंने नीतीश को आम लोगों से मिलने के लिए कहा। उनके कार्यकर्ताओं को 30 दिन में एक करोड़ लोगों के घरों में मिलने के लिए कहा। इससे जमीनी स्तर पर नीतीश की इमेज बनी और उनपर भरोसा बढ़ा। इस ग्राउंड कनेक्शन स्ट्रेटजी ने नीतीश को एक भरोसेमंद लीडर के तौर पर प्रोजेक्ट किया। प्रशांत का मानना है कि जब आप ज्यादा लोगों से डील करते हैं तो उनके स्तर पर उनसे जुड़ाव काफी जरूरी होता है। 
> बिहार में नीतीश का इलेक्शन कैंपेन इसका उदाहरण है। इलेक्शन के 8 माह पहले प्रशांत यहां पर केवल 3 मेंबर की टीम के साथ पहुंचे थे। जैसे-जैसे काम बढ़ता गया उन्होंने IIT और IIM जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से प्रोफेशनल्स को अपनी टीम में शामिल किया। डिजीटल कैंपेन टीम, सोशल कैंपेन टीम और ग्राउंड कैंपेन टीम बनाई और सबको अपनी-अपनी जिम्मेदारियां समझाईं। काम के बंटवारे ने सभी का लोड कम किया और एक्सपर्टाइज के आधार पर काम बांटने से यह ज्यादा आसान हुआ। 
> प्रशांत का मानना है कि चैलेंजेस से घबराना नहीं चाहिए। चैलेंज आपकी क्षमताओं को निखारते हैं और खुद को साबित करने का मौका देते हैं। मोदी की सफल कैंपेन के बाद प्रशांत BJP से अलग हुए और नीतीश से जुड़े, यहां भी सफल हुए। अब खबरें हैं कि वे कॉन्ग्रेस के साथ रहते हुए यूपी इलेक्शंस के लिए भी काम कर सकते हैं। 
 
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