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कबीर से इंस्पायर है यूएस का यह अरबपति, ऐसे पहुंचे शुन्य से शिखर तक

यूएस की करीब 50 बिलियन डॉलर की वैल्यू वाली कंपनी उबर के फाउंडर ट्रेविस कालानिक भारत के संत कबीर से प्रभावित हैं। उनका मानना है कि किसी भी स्टार्टअप के सफल होने के लिए कबीर का दोहा “ काल करे सो आज कर, आज करे सो अब , पल में प्रलय होएगी, बहुरी करेगा कब” (कल के सारे काम आज कर लो, आज के अभी क्योंकि समय का कोई भरोसा नहीं, पता नहीं कब प्रलय हो जाए। इसलिए शुभ काम को कल पर मत टालो। फौरन कर डालो) जैसा रवैया होना चाहिए।

Danik Bhaskar | Dec 23, 2016, 12:05 AM IST
सेल्फ हेल्प डेस्क। यूएस की करीब 50 बिलियन डॉलर की वैल्यू वाली कंपनी उबर के फाउंडर ट्रेविस कालानिक भारत के संत कबीर से प्रभावित हैं। उनका मानना है कि किसी भी स्टार्टअप के सफल होने के लिए कबीर का दोहा “ काल करे सो आज कर, आज करे सो अब , पल में प्रलय होएगी, बहुरी करेगा कब” (कल के सारे काम आज कर लो, आज के अभी क्योंकि समय का कोई भरोसा नहीं, पता नहीं कब प्रलय हो जाए। इसलिए शुभ काम को कल पर मत टालो) जैसा रवैया होना चाहिए।

हाईस्कूल से शुरू कर दिया था अपना पहला बिजनेस

> ट्रेविस कालानिक जब हाईस्कूल में थे तभी उन्होंने अपना पहला बिजनेस “1500 एंड अप” (SAT ट्रेनिंग कोर्स) शुरू कर दिया था। वे इससे होने वाली कमाई से अपने खर्चों को पूरा किया करते थे।

> कालानिक बचपन में जासूस बनना चाहते थे लेकिन कुछ ही सालों बाद उन्हें आंत्रप्रेन्योर बनने का चस्का लग गया। इसकी वजह उनकी मां थी। उनके पिता सिविल इंजीनियर थे। मां रिटेल एडवरटाइजर थीं। मां की मदद करने के लिए ट्रैविस डोर-टू-डोर जाकर नाइफ (चाकू) बेचा करते थे।

आगे की स्लाइड्स में जानिए कालानिक की सफलता की पूरी कहानी…
इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी...
 
> कालानिक स्टार्टअप शुरू करने के लिए इतने उत्साहित थे कि उन्होंने 1998 में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया (UCLA) में कम्प्यूटर इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। 
 
> अपने कॉलेज के दोस्त विंस बुसम और माइकल टॉड के साथ मिलकर “स्कोर” (सर्च इंजन, वेंचर) शुरू किया। यह वेंचर एंटरटेनमेंट प्रोडक्ट अवेलेबल करवाता था। शुरुआत में लॉस एंजिलिस के एक छोटे से अपार्टमेंट में वे इस वेंचर को दोस्तों के साथ रन कर रहे थे। 

> वेंचर ने यूजर्स को कंटेंट डाउनलोड करने की पूरी फेसिलिटी दे रखी थी। दो साल बाद ही साल 2000 में कंपनी के खिलाफ यूएस की एंटरटेनमेंट कंपनियों ने मुकदमा दायर कर दिया। आरोप लगाया कि स्कोर कॉपीराइट का उल्लंघन कर रही है। कॉपी करके कंटेंट बेच रही है। 
 
> हालात इतने खराब हो गए कि कालानिक ने कंपनी को दिवालिया घोषित करते हुए कंपनी छोड़ दी। 
 
 दोस्तों ने भी छोड़ दिया था साथ...
 
> बेहद खराब स्थिति में भी कालानिक ने हार नहीं मानी। उन्होंने एक साल के अंदर ही 2001 में नेटवर्किंग-सॉफ्टवेयर कंपनी रेडस्वुश को शुरू किया। पुरानी कंपनी के एक्सपीरियंस, लर्निंग और कॉन्टेक्ट्स का यहां इस्तेमाल किया।

> इस कंपनी में भी उनकी मुसीबतें कम नहीं हुईं। टैक्स के संबंध में गड़बड़ी होने पर एक बार कंपनी पर जुर्माना ठोंक दिया गया। ऐसी सिचुएशन भी आई कि दोस्त दूर हो गए। पार्टनर के साथ विवाद भी हुआ। दोनों ही कंपनियों में उन्होंने शुरुआती पैसा मार्केट फंडिंग से लगाया। 

> अप्रैल 2007 में उन्होंने रेडस्वुश को बेच दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 2.3 करोड़ डॉलर में कंपनी का सौदा हुआ। मिलेनियर बनने के बाद कालानिक ने पहले साल स्पेन, जापान, ग्रीनलैंड, हवाई, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, पुर्तगाल का टूर किया।
 
दूसरों से सीखने में नहीं रहे पीछे...
 
> 30 साल की उम्र में लगातार दो फेल्योर मिलने के बाद कालानिक बड़ी क्राइसिस में थे। पुराने फेल्योर उन्हें कुछ नया करने से रोक रहे थे। मन में डर था।
 
> इस दौरान वे 70 साल के डायरेक्टर विक्की क्रिस्टीना बार्सिलोना से प्रभावित हुए। उन्हें लगा जब ये 70 साल का व्यक्ति इतना नया करने की कोशिश कर रहा है तो फिर मेरे पास तो पूरी लाइफ पड़ी है। 
कम कीमत में लग्जरी सफर का था आइडिया...
 
> 2008 में कालानिक फ्रांस में अपने दोस्त गेरेट केम्प के साथ कड़कड़ाती ठंड में कैब का इंतजार कर रहे थे। तभी उनके मन में कैब सर्विस शुरू करने का ख्याल आया। हालांकि शुरुआत में वे अपने पुराने फेल्योर से डर गए।

> उन्हें उनके पार्टनर केम्प ने मोटिवेट किया। इसके बाद 2009 में उन्होंने उबर एप डेवलप किया। कम कीमत में लग्जरी सफर उनका आइडिया था। 

> उबर को जून 2010 में सेन फ्रांसिस्को में लांच किया गया। यहां सक्सेस मिलने के बाद कंपनी को कई इन्वेस्टर्स भी मिले। 2011 में सर्विस न्यूयॉर्क में लांच कर दी गई। दिसंबर 2011 में उबर इंटरनेशनल लेवल पर पेरिस में लांच की गई और आज कालानिक 50 बिलियन डॉलर की कंपनी के मालिक हैं। 

 

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