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16 साल में शुरुआत, आज 1400 कर्मचारी और 400 मिलियन डॉलर की कंपनी

पिता से 50 हजार रुपए उधार लेकर बनाई कंपनी में आज 14 सौ कर्मचारी हैं और कंपनी की नेटवर्थ 400 मिलियन डॉलर है।

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2016, 01:38 PM IST
दिव्यांक तुरखिया अपने बड़े भाई भाविन तुरखिया के साथ। दिव्यांक तुरखिया अपने बड़े भाई भाविन तुरखिया के साथ।
महज 9 वर्ष की उम्र में प्रोग्रामिंग शुरू करने से लेकर 14 वर्ष की उम्र में बड़ी कंपनियों को इंटरनेट पर बिजनेस करने के तरीके बताने और 16 साल में अपनी कंपनी शुरू करने और फिर कामयाब मुकाम हासिल करने तक दिव्यांक की कहानी छोटी उम्र में बड़ी उड़ान की एक बानगी है। पिता से 50 हजार रुपए उधार लेकर बनाई कंपनी में आज 14 सौ कर्मचारी हैं और कंपनी की नेटवर्थ 400 मिलियन डॉलर है।
कंपनी : डायरेक्टी
संस्थापक : दिव्यांक तुरखिया और भाविन तुरखिया
क्या खास : वेब प्रेजेंस प्रॉडक्ट्स और ऑनलाइन एडवरटाइजिंग कंपनी
तब कम्प्यूटर खरीदना आसान नहीं था, अमीर दोस्तों के सिस्टम पर सीखा...
दिव्यांक का जन्म मुंबई में हुआ। उनके पिता पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और मां समाजसेविका। दिव्यांक
सिर्फ आठ साल की उम्र से ही टेक्नोलॉजी और कम्प्यूटर्स में काफी दिलचस्पी लेने लगे थे। बचपन में पैदा हुए अपने इस शौक के बारे में बताते हुए दिव्यांक कहते हैं कि ‘उन दिनों एक कम्प्यूटर खरीदना आसान नहीं था। हमारी फैमिली इसका खर्च नहीं उठा सकती थी इसलिए मैं अपने अमीर दोस्तों के कम्प्यूटर से ही सीखा करता था।’ नौ साल पूरे करते-करते दिव्यांक ने बेसिक्स में प्रोग्रामिंग शुरू कर दी और कम्प्यूटर गेम प्रोग्रामिंग में खासी रुचि लेने लगे।
घर की लाइब्रेरी में पोषित की प्रतिभा
दिव्यांक ने बहुत ही छोटी उम्र में इतनी तकनीकी महारत हासिल कर ली थी जिसे सीखने में एक आम युवा को सालों लग जाते हैं। खास बात यह है कि इसे सीखने के लिए उन्होंने किताबों की मदद ली। किताबें पढ़ने के शौकीन दिव्यांक बताते हैं कि उनके पिता को बुक्स से बहुत लगाव था जिसके चलते उन्होंने घर पर ही लाइब्रेरी बना ली थी।
इसी वजह से उनके घर पर हर विषय की किताबें उपलब्ध थीं जिनमें से दिव्यांक को टेक्नोलॉजी, बिजनेस, मैनेजमेंट, टाइम मैनेजमेंट, बायोग्राफी जैसे विषयों की किताबें पढ़ने अच्छा लगता था। इन्हीं को पढ़ने के बाद वे अपनी जानकारी को प्रायोगिक तौर पर इस्तेमाल में लेते और सीखते।
इसी तरह सीखते हुए उन्होंने महज 13 वर्ष की उम्र में अपने भाई भाविन के साथ मिलकर स्टॉक मार्केट की कीमतों पर नजर रखने के लिए एक स्टॉक मार्केट सिमुलेशन गेम तैयार किया।
आगे की स्लाइड्स में 14 की उम्र में करियर ने भरी उड़ान, पहले मुनाफे से उतारा पेरेंट्स का कर्ज, चुनौतियों का सामना कर बनाई पहचान...
दिव्यांक तुरखिया और भाविन तुरखिया दिव्यांक तुरखिया और भाविन तुरखिया
14 की उम्र में करियर ने भरी उड़ान

बहुत ही कम उम्र में बिजनेस को केन्द्र में रखकर तैयार किए गए इस गेम को देखकर दिव्यांक के परिवार और दोस्तों को कोई अचंभा नहीं हुआ। दरअसल, बिजनेस की ओर उनका रुझान शुरू से ही रहा।
 
सिर्फ 13 साल की उम्र में वे उन बच्चों को स्कूल प्रोजेक्ट बनाकर बेचा करते थे जो खुद इन्हें नहीं बना पाते थे। इस तरह वे न सिर्फ अपने शौक को पोषित करते बल्कि उससे आय भी अर्जित करते। इसी बीच भारत में इंटरनेट की शुरुआत 
हुई। इंटरनेट सीखकर 14 वर्ष के दिव्यांक ने बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों को फ्रीलांस इंटरनेट कंसल्टेशन देना शुरू 
किया।
 
यहां उन्होंने कंपनियों के लिए वेबसाइट बनाने, इंटरनेट गेटवेज तैयार करने, इंट्रानेट स्थापित करने, कॉर्पोरेट ईमेल अकाउंट बनाने, नेटवर्क सिक्योरिटी पॉलिसी तैयार करने जैसे काम किए। इस दौरान उन्होंने महसूस किया कि तकनीकी सहायता की मांग करने वाली कंपनियों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
 
इसी जरूरत को देखते हुए 
16 साल के दिव्यांक ने अपने भाई भाविन के साथ मिलकर कंपनी शुरू करने का मन बनाया और 1998 में 
अपने पेरेंट्स से 50,000 रुपए का कर्ज लेकर डायरेक्टी की स्थापना की। 
 
दिनोंदिन यह रुचि इतनी बढ़ने लगी कि जब उनकी उम्र के बच्चेफुटबॉल, बास्केटबॉल या क्रिकेट जैसे खेल
खेला करते वे अपने लंच ब्रेक्स के दौरान और स्कूल की छुट्‌टी के बाद कम्प्यूटर लैब में वक्त बिताते और
प्रोग्रामिंग में अपनी स्किल्स को पैना बनाते रहे। बारह वर्ष की उम्र में उन्होंने अपने स्कूल प्रोजेक्ट के लिए तीन कम्प्यूटर गेम्स बनाए।
 
ये तीनों गेम्स स्कूल के बच्चों के बीच काफी लोकप्रिय हुए और टीचर्स ने भी उन्हें खूब सराहा। उनकी इन्हीं स्किल्स को देखकर कम्प्यूटर सीखने के इच्छुक स्कूल स्टूडेंट्स और टीचर्स ने दिव्यांक को ट्रेनिंग देने के लिए कहा क्योंकि तब स्कूल में कम्प्यूटर सिखाने की कोई व्यवस्था नहीं हुआ करती थी। 
 
 
दिव्यांक ने इसके लिए आफ्टर स्कूल सेशन्स आयोजित कर उन्हें सिखाना शुरू किया। 
 
दिव्यांक तुरखिया विदेश में दिव्यांक तुरखिया विदेश में
पहले मुनाफे से उतारा पेरेंट्स का कर्ज

इसी के साथ दोनों ने अपनी पहली प्रॉडक्ट लाइन शुरू की और सीधे एंड-कस्टमर्स को होस्टिंग पैकेजेज बेचना शुरू किया।
 
कंपनी ने पहले ही महीने में 40 कस्टमर्स को साइन कर लिया। इससे हुए मुनाफे से दिव्यांक ने अपने पेरेंट्स का कर्ज उतारा और कुछ हिस्सा बिजनेस में निवेश किया।
 
शुरुआत के कुछ ही महीनों में कंपनी के क्लाइंट्स में नैसकॉम, सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी जैसे नाम शामिल हो चुके थे। इसके अलावा कुछ बैंक्स और लगभग सभी डॉटकॉम कंपनियां इनके कस्टमर्स बन चुके थे।
 
इसी के साथ कंपनी का पहले वर्ष का रेवेन्यू 7 लाख रुपए रहा। शुरुआत से तरक्की की राह पर आगे बढ़ रही कंपनी वर्तमान में 200 से ज्यादा देशों में अपनी सेवाएं दे रही है।
 
1400 से ज्यादा कर्मचारियों के साथ आज कंपनी की नेटवर्थ 400 मिलियन डॉलर के पार पहुंच चुकी है।
दिव्यांक तुरखिया दिव्यांक तुरखिया
चुनौतियों का सामना कर बनाई पहचान

बिजनेस के शुरुआती दो साल दिव्यांक और भाविन को काफी संघर्ष करना पड़ा। इस दौर के अपने अनुभव साझा करते हुए वे बताते हैं कि ‘उन दिनों लोगों से भुगतान प्राप्त करना एक बड़ी चुनौती थी।
 
 
इस काम में हमें अपना 30 से 40 प्रतिशत समय खर्च करना पड़ रहा था। भारतीय कंपनियों में संबंधित
प्रोफेशनल्स हमें कई घंटे इंतजार करवाया करते थे।’ लेकिन दिव्यांक और भाविन इन अनुभवों को एक सीख की तरह लेते हैं और कहते हैं कि इनसे उनकी पर्सनल ग्रोथ में काफी मदद मिली है और डायरेक्टी के 10 वर्षों में उन्होंने जो कुछ सीखा है वह किसी भी क्लासरूम से मिली सीख से कहीं ज्यादा है।
 
 
दोनों की इसी सकारात्मक सोच का नतीजा है कि आंत्रप्रेन्योर के रूप में उन्हें दुनिया भर में पहचान मिली
है। डायरेक्टी को न केवल तीन वर्षों तक लगातार डेलॉइट टेक्नोलॉजी फास्ट 50 में शामिल किया जा चुका है बल्कि रेड हैरिंग की टॉप 200 प्राइवेट कंपनियों की सूची में भी जगह दी गई।
 
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