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Success Story : इस ब्लाइंड ब्वॉय ने बना ली 80cr की कंपनी, जानें कैसे

कड़ी मेहनत और लगन से कई लोग सफल हुए हैं, लेकिन एक शख्स ऐसा भी है, जिसने ब्लाइंड होते हुए भी अपनी मंजिल तक पहुंचने में कामयाबी हासिल की।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Jun 15, 2016, 12:05 AM IST

  • एजुकेशन डेस्क। कड़ी मेहनत और लगन से कई लोग सफल हुए हैं, लेकिन एक शख्स ऐसा भी है, जिसने ब्लाइंड होते हुए भी अपनी मंजिल तक पहुंचने में कामयाबी हासिल की। हम बात कर रहे हैं श्रीकांत बोला की। जन्म के बाद कुछ रिश्तेदारों और पड़ोसियों ने श्रीकांत के माता-पिता को उसे पैदा होते ही मार देने को कहा था, लेकिन उनकी किस्मत में कुछ और ही लिखा था। वे आज 80 करोड़ रुपए की कंज्यूमर फूड पैकेजिंग कंपनी बौलेंट इंडस्ट्रीज के CEO हैं। माता-पिता महीने के कमाते थे 1600 रुपए...
    23 साल की उम्र में ही खड़ी कर दी बड़ी कंपनी :
    हैदराबाद के श्रीकांत बोला का बचपन कठिनाइयों में गुजरा। उनके माता-पिता पढ़े-लिखे नहीं थे। श्रीकांत के जन्म (1993) के समय माता-पिता की मासिक कमाई लगभग 1,600 रुपए थी। इस कारण श्रीकांत का बचपन कठिनाइयों में बीता। जब किसी के घर में बेटे का जन्म होता है, तो मां-बाप रिश्तेदार खुशी से झूम उठते हैं, लेकिन श्रीकांत के जन्म के वक्त ऐसा कुछ नहीं हुआ। जब श्रीकांत का जन्म हुआ था तो उनके पड़ोसियों और गांव वालों ने कहा कि यह ब्लाइंड है, इसे मार दो। हालांकि, किसे पता था कि 23 साल बाद यही लड़का 80 करोड़ रुपए की कंपनी खड़ी कर देगा।
    आगे की स्लाइड्स पर जानिए श्रीकांत बोला से जुड़ी अन्य बातें...
  • क्लास में आखिरी बेंच पर मिलती थी जगह :
    श्रीकांत बचपन से ही पढ़ने में तेज थे, लेकिन ब्लाइंड होने के कारण स्कूल में उन्हें खेलने नहीं दिया जाता था और क्लास की आखिरी बेंच पर बिठाया जाता था। श्रीकांत ने तमाम मुसीबतों के बाद अच्छे नंबरों से 10वीं पास की, लेकिन फिर उनके लिए मुसीबतों का एक दौर शुरू हुआ। पढ़ाई में अच्छे होने का कारण श्रीकांत को 10वीं के बाद साइंस पढ़ने का मन था, लेकिन ब्लाइंड होने के कारण इसकी इजाजत नहीं मिल रही थी। श्रीकांत ने भी हार नहीं मानी। कई महीनों तक लड़ाई लड़ने के बाद आखिरकार श्रीकांत देश के पहले ब्लाइंड बने, जिन्हें 10वीं के बाद साइंस पढ़ने की इजाजत मिली।
  • श्रीकांत पढ़ने पहुंच गए अमेरिका :
    श्रीकांत को जीवन में कुछ भी आसानी से नहीं मिला, लेकिन जब मिला तो सबसे अलग। श्रीकांत को स्कूली पढ़ाई के बाद अमेरिका के मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी MIT में दाखिला मिला। इस तरह श्रीकांत MIT में पढ़ने वाले देश के पहले ब्लाइंड स्टूडेंट बने। MIT दुनिया की टॉप 3 यूनिवर्सिटी में आती है।
  • एक कमरे से शुरू की थी कंपनी :
    अमेरिका में पढ़ाई के बाद श्रीकांत के मन में हमेशा रहा कि कुछ ऐसा किया जाए, जिससे लोगों को रोजगार मिल सके। इसलिए श्रीकांत ने हैदराबाद के नजदीक एक कमरे से 8 लोगों के साथ शुरुआत की। उन्होंने लोगों के खाने-पीने के सामान की पैकिंग के लिए कंज्यूमर फूड पैकेजिंग कंपनी बनाई। शुरुआत में श्रीकांत ने अपने आस-पास के बेरोजगारों को जोड़ा और कंपनी शुरू कर दी। जब काम चल पड़ा तो फंडिंग की दिक्कत आनी शुरू हुई। श्रीकांत ने यहां भी हार न मानने वाले जज्बे को कायम रखा और प्राइवेट बैंकों से और फंडिंग कंपनियों से फंड जुटाकर काम को आगे बढ़ाया।
  • श्रीकांत करते हैं 15-18 घंटे रोजाना काम :
    श्रीकांत की कंपनी कंज्यूमर फूड पैकेजिंग, प्रिंटिंग इंक और ग्लू का बिजनेस कर रही है। आज कंपनी के हैदराबाद और तेलंगाना के पांच प्लांट में सैकड़ों लोग काम कर रहे हैं। छठवां प्लांट आंध्र प्रदेश के नेल्लोर के पास श्रीसिटी में बन रहा है। उनकी कंपनी आने वाले दिनों में आठ हजार से अधिक लोगों को रोजगार देगी। अभी ये संख्या चार हजार से अधिक है। खास बात यह है कि कंपनी में उनके जैसे दृष्टिहीन और अशक्त लोगों की संख्या 60 से 70 फीसदी है। इन लोगों के साथ ही वे खुद भी रोज़ाना 15-18 घंटे काम करते हैं।
  • अपने संघर्ष के बारे में क्या कहते हैं श्रीकांत :
    अपनी काबिलियत और हार न मानने के जज्बे वाले श्रीकांत का कहना है कि जब दुनिया कहती थी, यह कुछ नहीं कर सकता तो मैं कहता था कि मैं सब कुछ कर सकता हूं। श्रीकांत हमेशा कहते हैं कि अगर आपको अपनी जिंदगी की जंग जीतनी है तो सबसे बुरे समय में धैर्य बनाकर रखने से सफलता जरूर मिलेगी।
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