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मेडिकल और सिविल एग्जाम में हुए थे फेल, आज हैं कामयाब प्रोफेशनल

श्रीनिवास डॉक्टर बनना चाहते थे, लेकिन प्रवेश परीक्षा क्लियर नहीं कर पाए। आईएएस की परीक्षा में भी असफल हुए, लेकिन हिम्मत नहीं हारी और कामयाब हुए।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Mar 26, 2016, 10:43 AM IST

  • एजुकेशन डेस्क। श्रीनिवास मर्मामुला हमेशा बड़े सपने देखते थे। बचपन से ही उनकी इच्छा विदेश जाकर पढ़ाई करने और डॉक्टर बनने की थी। पढ़ाई में भी अच्छे थे, लेकिन घर की आर्थिक हालत बेहद खराब थी। उनके पिता ने स्पष्ट कर दिया था कि वे उच्च शिक्षा का खर्च नहीं उठा सकते थे। मेडिकल या इंजीनियरिंग तो दूर, सामान्य ग्रेजुएशन कोर्स का खर्च भी उठाने में वे सक्षम नहीं थे। पिता उन्हें जल्दी नौकरी खोजने के लिए कहते थे...
    आईटीआई या अन्य कोई टेक्निकल कोर्स करने का सुझाव देते थे ताकि कुछ कमाई हो सके। एक दिन अखबार में डिप्लोमा इन ऑप्थैल्मिक टेक्निक्स का विज्ञापन देखकर श्रीनिवास के पिता ने उनसे आवेदन करने को कहा। थोड़ी बहुत आनाकानी के बाद श्रीनिवास ने उनकी बात मान ली। वे कहते हैं, मुझे लगा यह घर से बाहर जाने का अच्छा मौका है। इससे मुझे मेडिकल की तैयारी के लिए वक्त मिल सकता था। 300 रुपए का भत्ता भी मुझे इस कोर्स से मिलता जिसका मतलब था कि खर्च के लिए मुझे पिता पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। मैंने सोचा कि मैं मेडिकल एंट्रेंस पास कर लूंगा और उसके बाद यह पढ़ाई छोड़ दूंगा। लेकिन श्रीनिवास मेडिकल परीक्षा पास नहीं कर पाए।
    बचपन का सपना टूटने से वे काफी निराश हो गए। हालांकि, ऑप्टोमेट्री का कोर्स उन्होंने जारी रखा। अब उन्होंने प्रशासनिक सेवा में जाने का लक्ष्य निर्धारित किया। सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी शुरू की। दो साल तक लगातार प्रयास करने के बाद भी इसमें उनका चयन नहीं हुआ। कुछ दिनों तक बेहद मायूस रहे। फिर सोचा, किस्मत ने उनके लिए कुछ और ही सोच रखा है। उन्होंने ऑप्टोमेट्री को ही अब अपना करिअर बनाने का तय किया।
    आगे की स्लाइड में पढ़िए श्रीनिवास मर्मामुला की कामयाबी की पूरी कहानी...
  • संस्थान ने उनकी रुचि देखकर उन्हें पार्ट टाइम नौकरी दे दी। इसके बाद श्रीनिवास पब्लिक हेल्थकेयर इन आई केयर में मास्टर्स के लिए लंदन स्कूल ऑफ हाइजिन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन, यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन चले गए। अब उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। श्रीनिवास ने उस रास्ते पर चलना शुरू किया जिसका सपना वे बचपन से देख रहे थे। उन्हें लगा कि लोगों को दुनिया देखने में मदद कर वह अपना सपना पूरा कर सकते हैं। वे आज कामयाब प्रोफेशनल होने के साथ उन युवाओं के लिए प्रेरणा हैं जो पहले पड़ाव पर असफल होने के बाद खुद को नाकाम माने लेते हैं। वे कहते हैं, कोशिश करते रहने से मंजिल मिल ही जाती है, भले ही उसका रास्ता अलग हो। असफल होना बुरा नहीं है, उसे अपनी नियति मान लेना हमारी कमजोरी है।
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