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पिता ने दृष्टिहीन बेटे के लिए सबकुछ बेच दिया, आखिर गिरीश बना यूनिवर्सिटी टॉपर

बेटे ने 1600 में से रिकॉर्ड 1151 अंक लाकर हिंदी में पीजी की परीक्षा में विनोबा भावे यूनिवर्सिटी हजारीबाग में टॉप किया है।

एहसान फैज| कतरास | Last Modified - Feb 26, 2016, 10:40 AM IST

  • धनबाद/ कतरास.धनबाद ने लखन ने अपने दृष्टिहीन बेटे गिरीश को पढ़ाने के लिए अपनी दुकान तक बेच दी, लेकिन उनके इस त्याग का नतीजा सामने आ गया है। बेटे ने 1600 में से रिकॉर्ड 1151 अंक लाकर हिंदी में पीजी की परीक्षा में विनोबा भावे यूनिवर्सिटी हजारीबाग में टॉप किया है।
    ब्लाइंड स्टूडेंट ने ऐसे किया यूनिवर्सिटी टॉप...
    पिता ने दुकान तो मां ने बेचे गहने
    - धनबाद के बाघमारा प्रखंड का गिरीश शांडिल्य बचपन से ब्लाइंड था।
    - उसके पिता की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। लेकिन जब गिरीश ने पढ़ने की इच्छा जताई तो उन्होंने अपनी साइकिल की दुकान बेच दी।
    - स्कूल से कॉलेज तक की पढ़ाई का खर्चा तो उसके पिता ने उठा लिया।
    - लेकिन जब गिरीश ने यूनिवर्सिटी में एडमिशन की बात कही तो उसके पिता ने हाथ खड़े कर दिए।
    खर्च पूरा नहीं हुआ तो मां ने बेची ज्वेलरी
    - गिरीश ने यहां के पीके रॉय मेमोरियल कॉलेज में एडमिशन लिया तो उसकी पढ़ाई का खर्च भी बढ़ गया।
    - हालांकि यहां तो किसी तरह काम चल गया लेकिन जब उसने यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया तो उसके पिता के पास पैसे नहीं थे।
    - इस बार उसकी मां ने अपनी ज्वेलरी बेच दी।
    ...और ऐसे गिरीश बना यूनिवर्सिटी टॉपर
    - इसी महीने तीन फरवरी को जब गिरीश का रिजल्ट आया तो फैमिली ही नहीं बल्कि उसके टीचर्स और साथी स्टूडेंट्स भी चौंक गए।
    - गिरीश ने हिंदी में पूरे यूनिवर्सिटी में टाॅप किया।
    क्या कहते हैं प्रोफेसर
    - यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. मुकुंद रविदास ने कहा कि गिरीश ब्लाइंड जरुर है, लेकिन पढ़ाई को लेकर उसकी दीवानगी गजब की है।
    - मुझे गर्व है कि मैं उसका टीचर हूं। हिंदी में उसकी कमांड गजब की है।
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  • कलाम ने एक बार कहा था-अगर आप सपने देखते हैं और उन्हें साकार करने का संकल्प लेकर काम करते हैं तो पूरा ब्रह्माण्ड आपके सपने पूरे करने में जुट जाता है। धनबाद के गिरीश और उसके पिता लखन की कहानी कलाम के इन्हीं शब्दों के इर्द-गिर्द है।
    गिरीश खूब पढ़ना चाहता था। अपने लिए, परिवार के लिए। पिता का नाम ऊंचा करना चाहता था। पढ़कर परिवार की गरीबी दूर करना चाहता था। लेकिन वो विवश था। एक तो वो देख नहीं सकता था। दूसरा-परिवार की हालत ऐसी नहीं थी कि वो उसे पढ़ा-लिखा सके। लेकिन न तो बेटे गिरीश ने हार मानी और न पिता लखन ने। दोनों की अपनी जिद थी। बेटा हर हाल में पढ़ना चाहता था और पिता हर हाल में पढ़ाना।
    गांव के कई लोगों ने लखन को टोका। कहा- बेटा देख तो सकता नहीं है। पढ़कर क्या कर लेगा? इससे अच्छा है उसे किसी काम धंधे पर लगा दो। लेकिन पिता ने सभी को एक ही बात कही-वो पढ़ना चाहता है और मैं उसे पढ़ाना। फिर चाहे मैं बर्बाद ही क्यों न हो जाऊं। बेटे के सपने पूरे करने को ही पिता ने जिंदगी का लक्ष्य बना लिया। पैसे थे नहीं, इसलिए सबसे पहले साइकिल की दुकान बेच दी। यही साइकिल की दुकान से उनका पूरा परिवार पलता था।
  • पेट पालने के लिए पिता ठेकेदारी का काम करने लगे। जो भी कमाते, उसका आधे से ज्यादा हिस्सा बेटे की पढ़ाई के लिए रखते। बेटा कक्षा दर कक्षा आगे बढ़ता जा रहा था। गिरीश जब कॉलेज पहुंचा तो आने-जाने पर हर दिन 100 रुपए खर्च होने लगे।
    पिता ने कहा-तू चिंता मत कर। मैं सब व्यवस्था कर दूंगा। लखन ने जितना भी पैसा जुटाया था, सब बेटे की कॉलेज की पढ़ाई पर खर्च कर दिया। नौबत घर के सामान बिकने तक की आ गई। लखन का पूरा दिन बेटे के सपने पूरे करने में बीतने लगा। लखन सुबह से शाम तक गिरीश के सपने पूरे करने में ही व्यस्त रहता था।
    सुबह बेटे को लेकर कॉलेज जाता फिर शाम को कॉलेज से घर लेकर आता। इसी वजह से उसने कोई नौकरी नहीं की। गिरीश ने कॉलेज का इम्तिहान पास कर लिया। उसे यूनिवर्सिटी ज्वाइन करनी थी।
    फीस ज्यादा थी तो लखन ने पत्नी के गहने गिरवी रख दिए। अब पूरा परिवार गिरीश के दादाजी की पेंशन पर निर्भर है। दादा शिक्षक से रिटायर हैं और उनकी पेंशन से ही घर चल रहा है। लखन का एक बेटा और है। वह पूरी तरह सामान्य है और 12वीं में पढ़ रहा है।
  • आंसुओं से भरी रहती थीं। लेकिन 22 दिन पहले इसी 3 फरवरी को खुशी के आंसू से भर गईं। इस दिन गिरीश का रिजल्ट आया था और वो पूरी यूनिवर्सिटी में टॉपर था।
    राइटर की मदद से पीजी (हिंदी)की परीक्षा देकर गिरीश 1600 में से रिकॉर्ड 1151 अंक लेकर आया।
    यूनिवर्सिटी के शिक्षक डॉ. मुकुंद रविदास ने कहा कि गिरीश दृष्टिहीन है, लेकिन पढ़ाई को लेकर उसकी दीवानगी गजब की है। मुझे गर्व है कि मैं उसका शिक्षक हूं। हिंदी में उसकी पकड़ अद्वितीय है।
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Web Title: Father Sold Everything For Blind Son, Gireesh Becomes Topper Of The UNIVESITY
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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