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एक IDEA से बनाई खुद की कारपूल कंपनी, कभी ट्रैफिक में जाते थे फंस

आईटी और टेलिकॉम में मास्टर्स करने के बाद एरिक्सन के साथ काम कर रहे समीर खन्ना को काम के सिलसिले में अक्सर दिल्ली से गुड़गांव जाना पड़ता था।

Dainik Bhaskar

Mar 28, 2016, 12:10 PM IST
Sameer Khanna Founder & CEO Orahi Carpooling app
एजुकेशन डेस्क। आईटी और टेलिकॉम में मास्टर्स करने के बाद एरिक्सन के साथ काम कर रहे समीर खन्ना को काम के सिलसिले में अक्सर दिल्ली से गुड़गांव जाना पड़ता था। आते-जाते ट्रैफिक जाम, प्रदूषण और ईंधन की बढ़ती लागत जैसी परेशानियों से दो चार होना पड़ता था। इस समस्या पर काफी सोच विचार और रिसर्च के बाद समीर को महसूस हुआ कि कारपूल एक बेहतरीन विकल्प बन सकता है। अपनी कंपनी बनाने छोड़ दिया जॉब...
यह न सिर्फ कम खर्च और वक्त पर ऑफिस आने-जाने में मदद करेगा बल्कि शहर में कार्बन फुटप्रिंट घटाने में भी कारगर होगा। उन्होंने कारपूलिंग को बड़े स्तर पर प्रमोट करने का मन बनाया और इसके लिए अपना कॉर्पोरेट जॉब भी छोड़ दिया। चूंकि पारंपरिक कारपूलिंग कारगर साबित नहीं हुई थी, समीर ने कारपूलिंग को कम्यूनिटी स्तर पर चलाना तय किया ताकि हर राइड को चुनने के लिए कई विकल्प हों और भुगतान भी झंझट रहित हो। समीर को विश्वास था कि उनका यह आइडिया कारगर साबित होगा, इसी सोच के साथ उन्होंने 2012 में कारपूल सर्विस शुरू की और उसे नाम दिया फोक्सवैगन।
सफर की राह बनाई आसान इसे दूसरी कारपूलिंग सर्विसेज से अलग बनाने के लिए समीर ने खासी मेहनत की। न केवल लोगों की सुविधा, बल्कि एक सिस्टमैटिक व्यवस्था को स्थापित करने पर भी उनका ध्यान था। उन्होंने सुनिश्चित किया कि यह सर्विस पैसों के लेन-देन से मुक्त और अपने वाहन जैसी सहूलियत देने वाली हो। साथ ही इसका इस्तेमाल बतौर पैसेंजर या ड्राइवर किया जा सके। वॉलेट फीचर की खूबी भी इसमें जोड़ी गई। इस फीचर के अनुसार अगर आपके ऑनलाइन वॉलेट में पैसे नहीं हैं, तो यह साइट आपको राइड्स बुक नहीं करने देगी।
कीमत का समीर ने खास ख्याल रखा। महिला यात्रियों की सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा गया और करीब 20 ‘वुमन ओनली’ राइड शेयरिंग ग्रुप बनाए गए। शुरुआत में आईं मुश्किलें 33 वर्षीय समीर बताते हैं, कम्यूनिटी कारपूल के लिए लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ दिल्ली एनसीआर के अलावा दूसरे शहरों में सेवा देना और पैन इंडिया का स्टेटस हासिल करना आसान नहीं था। समीर को पहले 200 यूजर मिलने में छह महीने लगे। पिछले तीन वर्ष से कॉर्पोरेट कारपूलिंग पर फोकस कर रहे इस प्लेटफॉर्म का नाम बदलकर ओराही कर दिया गया है। आज यह प्लेटफॉर्म 45,000 से ज्यादा रजिस्टर्ड कस्टमर्स के साथ एक कामयाब मुकाम हासिल कर चुका है।
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Sameer Khanna Founder & CEO Orahi Carpooling app
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