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पिता थे बंधुआ मजदूर, किसी ने नहीं दी नौकरी, अब हैं 20 कंपनी के मालिक

कामयाबी की ऐसी कई कहानियां हैं जिन्हें जानकर कई इंसान मोटिवेट हो जाते हैं। इन्हीं में एक कहानी है आंध्र प्रदेश के मधुसूदन राव की।

Dainik Bhaskar

Jul 28, 2016, 12:05 AM IST
Madhusudan Rao Success Storie from Village Hut to Jubilee Hills
एजुकेशन डेस्क। कामयाबी की ऐसी कई कहानियां हैं, जिन्हें जानकर कई इंसान मोटिवेट हो जाते हैं। इन्हीं में एक कहानी है आंध्र प्रदेश के मधुसूदन राव की। मधुसूदन राव MMR ग्रुप के फाउंडर हैं। इस ग्रुप में 20 कंपनियां शामिल हैं, जिनसे हजारों लोगों को रोजगार मिल रहा है। हालांकि, आपको ये जानकर हैरत होगी कि कभी मधुसूदन के माता-पिता 18 घंटे की मजदूरी के बाद भी बेटे को भर पेट खाना नहीं दे पाते थे।फटे-पुराने और गंदे कपड़ों में घूमते थे मधुसूदन...
पिता थे बंधुआ मजदूर :
वे जब बड़े हुए और चीजों को समझने लगे तब उन्हें पता चला कि गरीबी और परिवार की ऐसी हालत होने का एक कारण उनका पिछड़ी जाति का होना भी है। वे ये भी जान गए कि पिता एक जमींदार के पास बंधुआ मजदूर हैं और मां तम्बाकू की फैक्ट्री में काम करती हैं। घर चलाने के लिए बड़ी बहन भी मां के साथ काम पर जाने को मजबूर थी।
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Madhusudan Rao Success Storie from Village Hut to Jubilee Hills
आसान नहीं थी मधुसूदन की पढ़ाई :
 
गांववालों के तय नियमों के मुताबिक इस उनके परिवार में कोई भी घुटनों के नीचे तक धोती नहीं पहन सकता था। ऐसे माहौल में बड़ी मुश्किल से माता-पिता ने अपने दो बच्चों को स्कूल भेजना शुरू किया था। परिवार की हालात सुधारने का ख्याल मन में लेकर मधुसूदन ने पढ़ाई पर पूरा ध्यान लगाया। टीचर्स ने जैसा कहा वैसा ही किया। वे हमेशा एग्जाम में अच्छे नंबर लाते। पहले 10वीं और फिर 12वीं का एग्जाम पास किया। जिसके चलते धीरे-धीरे बदलाव का दौर शुरू हो गया।

 
Madhusudan Rao Success Storie from Village Hut to Jubilee Hills
डिप्लोमा के बाद भी नहीं मिली नौकरी :
 
बारहवीं के बाद एंट्रेंस एग्जाम पास कर पॉलिटेक्निक कॉलेज में दाखिला लिया। उनके पॉलिटेक्निक डिप्लोमा करने के पीछे मंशा थी कि उन्हें जल्द से जल्द नौकरी मिल जाए, लेकिन अफसोस कि उनसे हर जगह रिफरेंस मांगा जाता था। उनके घर के सदस्यों की शिक्षा का हवाला देकर उन्हें नौकरी से दूर रखा जाता। आखिर में वे हताश-निराश हो कर भाई के साथ मजदूरी करने लगे। इसके साथ ही वे चौकीदारी का भी काम किया करते थे, ताकि ओवरटाइम काम करके वे घर वालों का खर्चा चला सकें।

 
Madhusudan Rao Success Storie from Village Hut to Jubilee Hills
कंपनी बनाने का लिया फैसला :
 
मधुसूदन अब इस बात का मन बना चुके थे कि वो नौकरी नहीं करेंगे। ऐसे में उन्होंने अपना ध्यान बिजनेस पर लगाया। एक बार तो जिन लोगों के साथ उन्होंने कंपनी शुरू की वो सारा फायदा लेकर चले गए। हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और दूसरे लोगों के साथ काम किया। अलग-अलग लोगों के साथ काम करने की वजह से वे इस बात को समझ चुके थे कि चुनिंदा लोगों पर ही विश्वास किया जाना चाहिए। कामयाबी की एक-एक सीढ़ी चढ़ते हुए उन्होंने MMR ग्रुप बना लिया। इस ग्रुप में आज टेलिकॉम, आईटी, इलेक्ट्रिकल, मेकैनिकल, फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में 20 कंपनियां हैं। वे आज भी दिन भर में 18 घंटे तक काम करते है। 
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Madhusudan Rao Success Storie from Village Hut to Jubilee Hills
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