Hindi News »Self-Help »Offbeat» Principal O.P. Mishra Failed In B.Sc. Two Times But Topped In PSC

बीएससी में दो बार फेल हुए, फिर बने पीएससी के टॉपर

निराश होने की बजाय इसे चुनौती माना और फिर लोक सेवा आयोग की परीक्षा में टॉपर बने।

bhaskar news | Last Modified - Mar 18, 2016, 10:57 AM IST

रतलाम/इंदौर.पेशे से शिक्षक ओपी मिश्रा बीएससी में लगातार दो साल फेल हुए, लेकिन निराश होने की बजाय इसे चुनौती माना और फिर लोक सेवा आयोग की परीक्षा में टॉपर बने। सरकारी स्कूल के रिटायर्ड प्रिंसिपल हैं ओपी मिश्रा।
35 साल से बच्चों को पढ़ाने वाले मिश्रा को यह बताने में कतई संकाेच नहीं होता कि वे ग्रेजुएशन के दौरान दो बार फेल हुए। बचपन में चंचल स्वभाव के थे और पढ़ाई में ज्यादा ध्यान नहीं देते थे। अधिकांश समय दोस्तों के साथ घूमने-फिरने में बीत जाता था। रतलाम में स्कूली शिक्षा के दौरान औसत अंकों से पास होते रहे, लेकिन कॉलेज का पहला साल उनके लिए बेहद खराब रहा। उन्हाेंने 1962 में बीएससी में एडमिशन लिया था। पहले साल पास नहीं हो पाए तो अगले साल फिर प्रयास किया, फिर फेल हो गए। हताश हुए। कुछ दिन गुमसुम रहे। घर से बाहर निकलना तक छोड़ दिया। मन में आया कि पढ़ाई छोड़ कर कोई दूसरा काम करें, लेकिन परिवार की आर्थिक हालत बहुत अच्छी नहीं थी।
1971 में सरकारी नौकरी में आए
पिताजी पंडित थे और इससे होने वाली आमदनी इतनी ही थी कि परिवार का गुजारा हो सके। फिर परिवार के लोगों ने समझाया कि पढ़ाई कर ही जीवन में आगे बढ़ा जा सकता है। आत्मविश्वास बढ़ा तो उन्होंने फिर से तैयारी करने का फैसला किया। इस असफलता को ही जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा बनाने का निश्चय किया। संकल्प लिया- साल हारा हूं, जीवन नहीं। इसके बाद बीएससी पास की। अब उनकी इच्छा उच्च शिक्षा हासिल करने की थी। ड्राइंग और पेंटिंग में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली। 1968 में रतलाम के स्कूल में शिक्षक बने। 1971 में सरकारी नौकरी में आए।
फेल होने वाला छात्र भी भविष्य में टॉपर बन सकता है
उनका कॅरिअर सही रास्ते पर आ चुका था, लेकिन वे रुके नहीं। वे यह साबित करना चाहते थे कि फेल होने वाला छात्र भी भविष्य में टॉपर बन सकता है। मप्र लोक सेवा आयोग की विभागीय पदोन्नति परीक्षा में शामिल हुए और सामान्य वर्ग में शीर्ष स्थान हासिल किया। वर्ष 1994 में पिपलौदा हायर सेकंडरी स्कूल के प्रिंसिपल बने। फिर 1999 में शहर के सबसे बड़े सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल बनकर आए। रिटायरमेंट के बाद वे रंगकर्म के क्षेत्र में सक्रिय हो गए। वे आज भी बच्चों को नाटकों के जरिए शिक्षा दे रहे हैं।
मनपसंद क्षेत्र में करिअर बनाने की छूट दें
उनका कहना है बच्चे फेल हो जाएं तो यह नहीं सोचना चाहिए कि मैं फेल हो गया, लोग क्या सोचेंगे। बल्कि खुद को विश्वास दिलाएं कि यह असफलता ही जीवन में उन्हें बड़ी कामयाबियां दिलाएगी। फेल होने वाले छात्रों की निराशा के लिए वे पैरेंट्स को भी जिम्मेदार मानते हैं। उनका कहना है कि बच्चे की इच्छा जाने बिना उस पर अच्छे रिजल्ट का दबाव बनाने से बेहतर है कि उसे मनपसंद क्षेत्र में कॅरिअर बनाने की छूट दें।
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