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सक्सेस स्टोरी: कम उम्र में हो गई थी विधवा, आज हैं करोड़ों की मालकिन

5 वर्ष पहले
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उर्वि पिरामल - Dainik Bhaskar
उर्वि पिरामल
वुमन एम्पॉवरमेंट की बेहतरीन मिसाल हैं अशोक पिरामल एंटरप्राइजेस की चेयरपर्सन उर्वि पिरामल। पिरामल परिवार के अशोक पिरामल से शादी के बाद 1972 में उन्होंने ग्रेजुएशन डिग्री ली। इसके बाद संयुक्त पिरामल परिवार की फार्मास्युटिकल कंपनी को ट्रेनी की हैसियत से ज्वाइन किया। शॉप फ्लोर पर सवाल-जवाब करते हुए वे बिजनेस वुमन बनीं। 1984 में 36 वर्ष की उम्र में किडनी कैंसर से अशोक पिरामल की मौत हुई तब उर्वि दो पुत्र हर्ष (तब उम्र 11 वर्ष) व राजीव (9 वर्ष) की मां थीं और उनकी तीसरी संतान का जन्म होने वाला था।
बिजनेस को दिया यू-टर्न
तीसरे पुत्र नंदन के जन्म के बाद उर्वि पिरामल ने पिरामल समूह की गुजरात ग्लास फैक्टरी और मोरारजी टेक्सटाइल्स को संभाला। 1993 तक वे दक्ष बिजनेस वुमन बन चुकी थीं, पर मॉडर्न मैनजमेंट सीखने के लिए उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी का एडवांस मैनेजमेंट कोर्स अटेंड किया। उन्हीं दिनों मिरांडा टूल्स और परिवार के ऑटो कम्पोनेंट्स बिजनेस को उर्वि पिरामल ने यू-टर्न दिया, जिनसे पिरामल एंटरप्राइजेस के चेयरमेन अजय पिरामल छुटकारा चाहते थे। इस दौरान उर्वि पिरामल ने अपने पुत्रों को जॉइंट फैमली के बिजनेस में जवाबदारी संभालने के लिए भी तैयार किया। 2004 में पिरामल समूह का विभाजन हुआ और अशोक पिरामल समूह जन्मा और उर्वि पिरामल इसकी चेयरपर्सन बनी। कंपनी रिएल एस्टेट, टेक्सटाइल्स, इंजीनियरिंग व स्पोर्ट्स सेक्टर में सक्रिय है। हर्ष पिरामल टेक्सटाइल्स व ऑटोमोटिव, राजीव रियल एस्टेट और नंदन पिरामल रिटेल व्यवसाय संभाल रहे हैं।
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