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हरियाणा चुनाव: मोदी मैजिक से कमल खिलाएंगे हारे हुए सूरमा, 56 सीटों पर बड़ा दांव

7 वर्ष पहले
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फोटो फाइल- हरियाणा के रेवाडी में एक रैली के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी
नई दिल्ली. हरियाणा में 15 अक्तूबर को मतदान होना है। यहां राज्य विधानसभा चुनावों के सियासी समर में बीजेपी एक बार फिर मोदी मैजिक के भरोसे है। कांग्रेस विकास के नारे साथ तीसरी बार सत्ता हासिल करना चाहती है तो वहीं दस साल से सत्ता पाने के लिए छटपटा रही इनेलों इस लड़ाई में काफी आगे निकल चुकी है। इनेलो ने 73 उम्मीदवारों के नाम का एलान भी कर दिया है। बीजेपी से अलग हुई हजकां भी गैर जाट वोटों को अपने पाले में करने के लिए नए बने दलों से गठबंधन की कोशिश में है। हाल ही में आए ओपिनियन पोल ने राज्य में बीजेपी की उम्मीदें भी बढ़ा दी हैं। पार्टी नेता भी राज्य में लोकसभा का प्रदर्शन दोहराने के दावे कर रहे हैं जिसमें बीजेपी को 8 लोकसभा सीटों में 56 विधानसभाओँ में बढ़त मिली थी, लेकिन उसकी मुश्किल यह है कि पार्टी यहां अपने पुराने चेहरों पर ही जीत का दांव लगा रही है।
56 सीटों से है जीत की उम्मीद
हरियाणा में बीजेपी बिना मुख्यमंत्री के नाम के चुनावी मैदान में है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि पार्टी एक बार फिर नरेंद्र मोदी के नाम पर ही जनता के बीच जाएगी और लोकसभा का प्रदर्शन विधानसभा चुनावों में भी दोहराएगी।
-भाजपा ने लोकसभा चुनाव में राज्य की 10 में 7 सीटें- सोनीपत, करनाल, अंबाला, गुड़गांव, फरीदाबाद, भिवानी, कुरुक्षेत्र जीतीं थी। इन सात लोकसभा क्षेत्रों में करीब 56 विधानसभा सीटों पर पार्टी को बढ़त हासिल हुई थी। इसी आधार पर बीजेपी के वरिष्ठ नेता यहां पूर्ण बहुमत से अपनी सरकार बनने के दावे कर रहे हैं।
-जिन 56 सीटों पर पार्टी की जीत की उम्मीद टिकी हुई है वे सीटें हैं- कालका, पंचकूला, अंबाला कैंट, अंबाला सिटी, मुलाना, नारायणगढ़, साढौरा, जगाधरी, यमुनानगर, रादौर, लाडवा, शाहबाद, थानेसर, गुहला, कैथल, पुंडरी, करनाल, नीलोखेड़ी, इंद्री, घरौंदा, असंध, पानीपत ग्रामीण, इसराना, पानीपत सिटी, समालखा, गन्नौर, राई, सोनीपत, सफीदों, जींद, बहादुरगढ़, कोसली, लोहारू, महेंद्रगढ़, नारनौल, दादरी, भिवानी, अटेली, तोशाम, नांगल चौधरी, बावल, रेवाड़ी,
पटौदी, बादशाहपुर, गुड़गांव, सोहना, हथीन, होडल, पलवल, पृथला, फरीदाबाद, बढखल, बल्लभगढ़, फरीदाबाद, और तिगांव।
बड़ा सवाल, मोदी लहर में मुख्यमंत्री कौन ?
सियासत के जानकार मानते हैं कि पार्टी की तरफ से मुख्यमंत्री पद के लिए कोई चेहरा घोषित ना करना उसके लिए नुकसानदायक भी हो सकता है। बीजेपी के नेता जिस मोदी लहर के भरोसे हैं उन मोदी को लोगों ने प्रधानमंत्री के चेहरे के तौर पर देखकर वोट किया था, लेकिन हरियाणआ में मुख्यमंत्री कौन होगा इसे लेकर असमंजस आखिर तक बना रह सकता है।
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