नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत पाकर केंद्र की कुर्सी पर काबिज होने वाली भाजपा के अच्छे दिनों का असर अब कम होता दिखाई दे रहा है। मोदी के सबसे भरोसेमंद सिपाही
अमित शाह को पार्टी अध्यक्ष बनाए जाने के बाद से ही भाजपा दो उपचुनावों में हार का सामना कर चुकी है। इस साल चार राज्यों ( हरियाणा,
जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र और झारखंड) में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में इस तरह के नकारात्मक नतीजे भाजपा के लिए किसी भी लिहाज से सकारात्मक नहीं कहे जा सकते हैं।
कहां कहां हुए चुनाव-
लोकसभा सीट- वडोदरा, मैनपुरी और मेडक।
विधानसभा सीटों पर उपचुनाव- उत्तर प्रदेश की 11, गुजरात की 9, राजस्थान की 4, पश्चिम बंगाल की 2, पूर्वोत्तर राज्यों की 5 और आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ की एक-एक सीट।
तीन उपचुनावों में फीका पड़ा भाजपा का प्रदर्शन
पहला उपचुनाव (उत्तराखंड में तीन सीटों के लिए)-
उत्तराखंड में तीन सीटों के लिए हुए उपचुनाव में मोदी लहर का भूत उतर गया और राज्य के मुख्यमंत्री हरीश रावत के राजनीतिक कद में इजाफा हुआ। इससे पहले उत्तराखंड की जनता ने आम चुनाव में राज्य की सभी लोकसभा सीटें भाजपा की झोली में डाल दी थीं। डोईवाला, धारचूला और सोमेश्वर सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस को बड़ी जीत हासिल हुई। इस जीत ने न सिर्फ कांग्रेस का मनोबल बढ़ाया, बल्कि इसने टीम मोदी को सोचने पर मजबूर भी कर दिया।
दूसरा उप-चुनाव (बिहार और कर्नाटक समेत चार राज्यों की 18 विधानसभा सीट)-
अगस्त महीने में चार राज्यों की 18 विधानसभा सीटों पर हुए चुनावी नतीजों ने मोदी लहर की हवा निकाल दी। लालू और नीतीश के महागठबंधन ने मोदी मैजिक का तोड़ निकालते हुए बिहार की 10 सीटों में से 6 सीटों पर कब्जा जमा लिया। कांग्रेस पंजाब में एक और मध्यप्रदेश में दो सीट जीती तो कर्नाटक में उसे दो सीटें हासिल हुईं। वहीं भाजपा को मध्यप्रदेश में दो, बिहार में चार, कर्नाटक में एक सीटों पर जीत मिली।
तीसरा उपचुनाव (10 राज्यों की तीन लोकसभा और 33 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव)-
यूपी, गुजरात और राजस्थान समेत 10 राज्यों में हुए चुनाव नतीजों ने मोदी लहर के असर को फीका कर दिया है। यूपी के नतीजे यह बताने के लिए काफी हैं किस हद तक सूबे में भाजपा की लोकप्रियता गिरी है। अपने गढ़ गुजरात की 9 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में भाजपा सिर्फ 6 सीटों पर ही जीत हासिल कर पाई। देश के सबसे बड़े सूबे यूपी में 71 लोकसभा सीट जीतने वाली भाजपा सिर्फ तीन सीटों पर ही कब्जा जमा पाई। वहीं राजस्थान में क्लीन स्वीप करने वाली भाजपा बमुश्किल से एक सीट बचा पाई।
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