नई दिल्ली. अमेरिका दौरे से पहले अंतरराष्ट्रीय मीडिया को दिए अपने पहले इंटरव्यू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के मुसलमानों की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी देशभक्ति पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। मोदी के इस बयान का देश ने स्वागत किया है। दूसरी तरफ सियासी तौर पर तारीफ और आलोचना-दोनों ही हो रही हैं। सवाल भी उठ रहे हैं कि मोदी तब क्यों चुप रहते हैं जब सर संघचालक मोहन भागवत से लेकर प्रवीण तोगड़िया, योगी आदित्यनाथ, साक्षी महाराज, संगीत सोम जैसे लोग विवादित बयान देकर मुस्लिमों को निशाने पर लेते हैं। सवाल यह भी खड़ा हो रहा है कि क्या मोदी का एजेंडा भाजपा के हिंदुत्व के एजेंडे से अलग है? या फिर मोदी उदारवादी छवि बनाकर सर्व स्वीकार्य होने की अटल बिहारी वाजपेयी का चोला ओढ़ने की कोशिश में हैं। मोदी इस कोशिश में हिंदुत्व के एजेंडे को दरकिनार कर सबका साथ सबका विकास चाहते हैं।
मोदी का बयान
'मैं हमेशा सबका साथ सबका विकास की बात करता हूं। मैं चाहता हूं कि मुसलमान के बच्चे के एक हाथ में कुरान हो तो दूसरे हाथ में कम्प्यूटर भी होना चाहिए'
-अप्रैल 2014, चुनाव प्रचार के दौरान सीएनएन को दिए गए इंटरव्यू में।
'हमें अगले 10 वर्षों के लिए सांप्रदायिकता, क्षेत्रवाद और माओवाद जैसे मुद्दों पर विराम लगा देना चाहिए और विकास की बात करनी चाहिए'।
-15 अगस्त 2014 लाल किले से मोदी का भाषण।
'भारत के मुसलमानों की राष्ट्रभक्ति पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। भारतीय मुसलमान भारत के लिए जीते हैं और वे भारत के लिए ही मरेंगे।'
19 सितंबर 2014 प्रधानमंत्री बनने के बाद सीएनएन को दिया पहला इंटरव्यू।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इन तीनों ही बयानों का देश में स्वागत किया गया। मुस्लिम संगठनों ने जहां इसकी तारीफ की, वहीं मोदी को अच्छी सोच का नेता भी बताया गया। सियासी तौर पर कहीं आलोचना भी हुई, लेकिन जनमत बयान के पक्ष में ज्यादा नजर आया। आइऐ देखते हैं अहम मौकों पर दिए गए पीएम मोदी के बयानों पर किस तरह की प्रतिक्रिया हुईं:
मोदी के ताजा बयान पर आईं प्रतिक्रियाएं
दिल से कहा तो स्वागत -शाही इमाम बुखारी, जामा मस्जिद
'अगर मोदी ने दिल से यह बात कही है तो उनका स्वागत है, लेकिन उनकी ही पार्टी के योगी आदित्यनाथ जैसे नेताओं के बयान इस ऐतबार को कम करते हैं'।
बिल्कुल सही बात -मुफ्ती मुकर्रम अहमद, शाही इमाम फतेहपुरी मस्जिद
'प्रधानमंत्री मोदी के बयान का हम स्वागत करते हैं। उन्होंने बिल्कुल सही बात की है। हम इस बयान का इंतजार कर रहे थे। पिछले कुछ दिनों में योगी आदित्यनाथ, प्रवीण तोगड़िया, साक्षी महाराज और मेनका गांधी की ओर से जो बयान आए हैं उससे देश का माहौल खराब होने का खतरा पैदा हो गया था। हम यही चाहेंगे कि प्रधानमंत्री अपनी पार्टी के लोगों को इस बारे में निर्देश जारी करें'।
विश्वास की पुष्टि -एमजे, अकबर, भाजपा प्रवक्ता
'मोदी लोकसभा चुनाव के प्रचार अभियान के समय से ही यह बात कह रहे हैं। यह दीगर बात है कि किसी ने उस पर ध्यान नहीं दिया। यह बयान प्रधानमंत्री के विश्वास और विचारों की पुष्टि है। वह पाखंड की राजनीति के बजाय दिलोदिमाग से बात करते हैं। मोदी पहले की कह चुके हैं कि वे मुसलमान के एक हाथ में कंप्यूटर और दूसरे में कुरान देखना चाहते हैं'।
पीएम की बात से सहमत -नजमा हेपतुल्ला, केन्द्रीय मंत्री
'मैं प्रधानमंत्री की बात से सहमत हूं, मोदी अपने विकास के एजेंडे पर कायम हैं। हमारी सरकार आने के बाद विदेशों से आए कई मुस्लिम लोगों ने मुझे कहा है कि भारत जैसी आजादी कहीं नहीं है। मुसलमानों की देशभक्ति पर क्या सवाल है। देश में पहला परमवीर चक्र पाने वाला अब्दुल हमीद एक मुसलमान ही था'।
मुस्लिमों का दिल जीता -शाहिद सिद्दीकी, पत्रकार
'पीएम मोदी ने ऐसा बयान देकर मुसलमानों का दिल जीत लिया है'।
इतने दिनों बाद कहा -सलमान खुर्शीद, पूर्व केन्द्रीय मंत्री
'मोदी इतने दिनों बाद यह कह रहे हैं.. आश्चर्य है। यह अच्छी बात है, लेकिन कांग्रेस यह पहले से ही कहती रही है, लेकिन मोदी अमेरिका दौरे से ठीक पहले यह बात क्यों कह रहे हैं'।
दिखावे की सोच-नरेश अग्रवाल, सपा नेता
'चलिए उनकी समझ में तो आया कि भारतीय मुसलमान देश का बुरा नहीं करेगा, उत्तर प्रदेश में तो उनके सारे नेता मुसलमानों के खिलाफ जिस तरह बयान दे रहे हैं। मैं समझता हूं कि ये विचार सिर्फ राजनैतिक है। यह भाजपा की सोच नहीं, दिखावे की सोच है'।
आगे पढ़ें- मोदी ने अपनी कार्यशैली से हिंदुत्व के एजेंडे को दरकिनार कर दिया है ?