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  • Narendra Modi’s ‘Mausam’ Manoeuvre To Check China’s Maritime Might

रिश्तों को सुधारना चाहेगा भारत इस बार, पर ड्रैगन को दबाने को "मौसम" भी तैयार

7 वर्ष पहले
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फोटो- साबरमती आश्रम में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक ओर तो चीन के साथ अपने संबंधों को मधुर बनाने के लिए गुणा-भाग लगा रहे हैं, लेकिन वहीं दूसरी ओर ड्रैगन के खिलाफ 'मौसम' की रणनीति को अंतिम रूप दिया जा रहा है। 'प्रोजेक्ट मौसम' नाम कि ताजा रणनीति हिंद महासागर में चीन का प्रभाव कम करने की के लिए तैयार हो रही है। विदेश नीति के लिहाज से को मोदी सरकार की इस रणनीति को अब तक की सबसे प्रभावी कूटनीतिक चाल माना जा रहा है। मोदी सरकार ने अपने आर्थिक हितों के विस्तार और हिंद महासागर के देशों के साथ अपने संबंधों में नई जान फूंकने के इरादे से 'प्रोजेक्ट मौसम' नाम की इस परियोजना पर काम करने के फैसला लिया है।
क्या है 'प्राजेक्ट मौसम'
- मोदी सरकार ने हिंद महासागर में चीन के प्रभाव को कम करने, अपने आर्थिक हितों के विस्तार और हिंद महासागर के देशों के साथ अपने सांस्कृतिक संबंधों को पुनर्जीवित करने के लिए 'मौसम' परियोजना पर काम करने के निर्णय लिया है।
- इस परियोजना के तहत भारत से जुड़ने वाले पुराने समुद्री रास्तों को फिर से इस्तेमाल किया जाएगा। प्रोजेक्ट का पूरा नाम 'प्राजेक्ट मौसमः मेरिटाइम रूट्स एंड कल्चरल लैंडस्केप एक्रॉस दी ‌इंडियन ओशियन' है।
- प्राचीन भारत में समुद्री यात्राओं के लिए भारतीय नाविक हवाओं के रुख से अपना रास्ता तय करते थे। मानसूनी हवाएं इसमें सबसे मददगार होती थीं। मानसूनी हवाओं का समय और दिशा लगभग तय रहती थी, इसलिए नाविक हवाओं के मुताबिक ही रास्ते तय हो जाते थे।
- मानसूनी हवाओं के रास्तों में पड़ने वालों देशों के स‌ाथ भारत के आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध दूसरे देशों के मुकाबले कहीं बेहतर थे क्योंकि भारतीय नाविक हिंद महासागर के देशों में व्यापारिक सिलसिले में ज्यादा यात्राएं करते थे।
- भारत अब प्रोजेक्ट मौसम के जरिए पूर्वी अफ्रीका, अरब, भारतीय उपमहाद्वीप, श्रीलंका और पूर्वी एशियाई देशों के साथ व्यापार और सांस्कृतिक संबंधों के विस्तार की नई संभावनाओं की तलाश करेगा। गौरतलब है कि समुद्री रास्ते में चीन भी अपना सिल्क रूट तैयार करने की परियोजना पर काम कर रहा है। चीन ने सिल्क रूट परियोजना में शामिल होने का भारत समेत कई एशियाई देशों को प्रस्ताव भी दिया है। श्रीलंका और मालदीव ने चीन की परियोजना में रूचि भी दिखाई है। चीन राष्ट्रपति की यात्रा में सिल्क रूट पर भी चर्चा की जाएगी।
क्या है चीन का सिल्क रूट-
सिल्क रूट को प्राचीन चीनी सभ्यता के व्यापारिक मार्ग के रूप में जाना जाता है। दो सौ साल ईसा पूर्व से दूसरी शताब्दी के बीच हैन राजवंश के शासन काल में चीन में रेशम (सिल्क) का व्यापार काफी बड़ा था। समुद्री रास्ते से चीनी रेशम व्यापारी चीनी साम्राज्य के उत्तरी छोर से पश्चिम की ओर जाते थे। इसी यात्रा के दौरान चीनी सिल्क व्यापारियों का मध्य एशिया के क़बीलों से संपर्क हुआ और धीरे-धीरे यह मार्ग चीन, मध्य एशिया, उत्तर भारत, आज के ईरान, इराक और सीरिया से होता हुआ रोम तक पहुंच गया। धीरे धीरे इस रास्ते से केवल रेशम ही नहीं दूसरी चीजों का व्यापार भी होने लगा। सड़क के जरिए व्यापार काफी मुश्किल हो गया था। चोर, लुटेरों और प्राकृतिक आपदाओं से बचने के लिए ज्यादा से ज्यादा व्यापार समुद्री सिल्क रूट के जरिए होने लगा था। चीन एक बार फिर अपने इस सिल्क रूट को रोड़, रेल लाइन और समुद्री रास्ते के जरिए विकसित करना चाहता है, लेकिन भारत ने ड्रैगन के इस प्रस्ताव को ज्यादा अहमियत नहीं दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद कह चुके हैं कि दोनों देशों के रिश्तों में भरोसा पैदा होने के बाद ही सिल्क रूट जैसे प्राचीन रास्ते कामयाबी के द्वार खोल सकते हैं।
सिल्‍क रोड परियोजना में भारत को शामिल करना चाहता है चीन
- वैश्विक कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिए चीन ने अपनी अति महत्‍वाकांक्षी जमीन और समुद्र में बनने वाले नए सिल्‍क रोड प्रोजेक्‍ट को अंतिम रूप देने के लिए भारत को भी आमंत्रित किया है। राष्‍ट्रपति शी जिंगपिंग का यह प्रोजेक्‍ट प्राचीन ट्रेड रूट को फि‍र से पुर्नजीवित करने को लेकर है जिससे इस क्षेत्र को लाभ मिलेगा।
- ऐतिहासिक दृष्टि से भारत समुद्री और सड़क सिल्‍क रोड का कंवर्जिंग प्‍वाइंट है। 2000 साल से भी ज्‍यादा समय से भारत का चीन के साथ दक्षिण सिल्‍क रोड के जरिए बहुत अच्‍छा व्‍यापार रहा है। चीनी सरकार का यह मानना है कि वन बेल्‍ट और वन रोड में भारत एक प्रमुख पार्टनर है। चीन की योजना है कि प्राचीन सिल्‍क रोड को पुर्नजीवित किया जाए।
- यह सिल्‍क रोड चीन के जिआन प्रांत से शुरू होकर पाकिस्‍तान, सेंटर एशिया से होते हुए टर्की तक जाएगा। दूसरा सिल्‍क रोड बांग्‍लादेश, चीन, भारत और म्‍यामांर को जोड़ेगा और तीसरा रोड चीन के फुजिआन तट को एशिया और अन्‍य दुनिया से जोड़ेगा। इसके साथ ही चीन अपने प्रस्‍तावित इकोनॉमिक कॉरीडोर को पाकिस्‍तान के कब्‍जे वाले कश्‍मीर को भी सिल्‍क रोड प्रोजेक्‍ट के जरिये जोड़ना चाहता है। इस विवादित क्षेत्र में चीन की दखलअंदाजी का भारत ने विरोध किया है।
आगे पढ़ें- भारत ने क्यों नहीं दी ड्रेगन के प्रस्ताव को अहमितयत