फिल्मकार करण जौहर पहले ‘केे’ अक्षर को अपने लिए बहुत लकी मानते थे। वे अपनी हर फिल्म का नाम इसी अक्षर से शुरू करते थे।
चाहे वह ‘कभी-खुशी कभी गम हो’ या फिर ‘कभी अलविदा कहना’। जब उन्होंने फिल्म "लगे रहो मुन्नाभाई' (2006) में न्यूमेराेलॉजी का मजाक उड़ते देखा तो उनकी भी सोच बदल गई। अब वे ‘के’ अक्षर से अपने प्रोजेक्ट शुरू नहीं करते।
2006 में करण जौहर को पोलैंड में मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता की ज्यूरी में शामिल किया गया था। यह सम्मान पाने वाले वे पहले भारतीय हैं।