[फाइल फोटो- प्राण, पत्नी शुक्ला, दिलीप कुमार, सायरा बानो]
मुंबई: "मैं भी पुराना चिड़ीमार हूं और पर कतरना अच्छी तरह से जानता हूं"। ऐसा कहना था उस महान शख्सियत का जिसका सिर्फ नाम ही लोगों को डरा जाता था। यहां बात हो रही है बॉलीवुड के सबसे बड़े विलेन कहे जाने वाले प्राण कृष्ण सिकंद की, जिनकी आज 95वीं बर्थ एनिवर्सरी है।
अभिनेता नहीं फोटोग्राफर बनने चाहते थे प्राण
'सदी के खलनायक' प्राण को एक ऐसे अभिनेता के रूप में याद किया जाता है जिसने पचास से सत्तर के दशक के बीच फिल्म इंडस्ट्री पर एकछत्र राज किया। 12 फरवरी, 1920 को पुरानी दिल्ली के बल्लीमारान इलाके में बसे एक रईस परिवार में प्राण साहब का जन्म हुआ। दिल्ली में उनका परिवार बेहद समृद्ध था। प्राण बचपन से ही पढ़ाई में अच्छे थे। एक सशक्त और सफल अभिनेता के बचपन का स्वप्न बड़े होकर एक फोटोग्राफर बनाना था। लेकिन प्राण का इंतजार तो भारतीय सिनेमा कर रहा था।
पान की दुकान पर मिली पहली फिल्म
1940 में जब मोहम्मद वली ने पहली बार पान की दुकान पर प्राण को देखा, तो उन्हें फिल्मों में अभिनय के लिये तैयार किया और एक पंजाबी फिल्म 'यमला जट' बनाई जो बेहद सफल रही। एक ऐसा समय था जब सभी फिल्मों के नकारात्मक किरदार में प्राण नजर आते थे। उन्होंने मनोज कुमार, दिलीप कुमार, राज कपूर, शशि कपूर,
अमिताभ बच्चन जैसे कई महान अभिनेताओं के साथ काम किया।
कई अवॉर्ड्स से सम्मानित हुए प्राण
प्राण को उनके दमदार अभिनय के लिए तीन बार फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 1967 में 'उपकार' के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता, 1970 में 'आंसू बन गए फूल' और 1973 में 'बेईमान' के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 1977 में उन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड और 'सदी के खलनायक' सम्मान से नवाजा गया। 2001 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
93 साल में हुआ निधन
प्राण साहब ने 1945 में शुक्ला अहलूवालिया से शादी की। उनके तीन (दो बेटे,एक बेटी) बच्चे है। 93 साल की उम्र में लंबी बीमारी के चलते 12 जुलाई, 2013 को उनका निधन हो गया था।
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