मुंबई: महानायक अभिताभ बच्चन और धनुष स्टारर फिल्म 'षमिताभ' बीते शुक्रवार रिलीज हुई। डायरेक्टर आर.बाल्की की यह फिल्म गूंगे-बहरे जूनियर अर्टिस्ट की कहानी है, जो बेहद टैलेंटेड है। दूसरी ओर फिल्म में
अमिताभ बच्चन है, जिनकी आवाज दमदार है। फिल्म में अक्षरा हासन इन दोनों स्टार्स को जोड़ती है, तब सुपरस्टार का जन्म होता है।
फिल्म की स्टोरी लाइन कुछ ऐसी है जो हमें बॉलीवुड के ऑरिजिनल 'षमिताभ' यानि सुदेश भोंसले की याद दिलाता है, जिन्होंने पिछले दो दशक से महानायक के लिए वॉइस-ओवर किए है।
दिलचस्प बात ये है कि फिल्म के टाइटल में सिर्फ धनुष के नाम से हेर-फेर की गई है- धनु'षमिताभ'(पोस्टर के मुताबिक) वैसा ही कनेक्शन सुदेश के नाम से भी हो सकता है- सुड'शमिताभ'!
प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बॉलीवुड में अपनी कला का जादू दिखाने वाले सुदेश भोंसले से Dainikbhaskar.com ने खास बातचीत की, इस दौरान उन्होंने फिल्म 'षमिताभ' के कॉन्सेप्ट और अमिताभ बच्चन के साथ उनके एसोसिएशन के बारे में बताया। इंटरव्यू के अंश पढ़े-
क्या आपने 'षमिताभ' के प्रोमो देखे हैं? फिल्म के बारे में आपके क्या विचार है?
हां, मैंने टीवी पर प्रोमो देखें। प्रोमो देखकर मैंने अनुमान लगाया कि फिल्म अमिताभ बच्चन और उनकी आवाज के बारे में है। फिल्म का ट्रेलर बेहद दिलचस्प है।
पिछले 25 साल से आपने अमिताभ को आवाज दी है, फिल्म की कहानी इसके ईद-गिर्द है, क्या प्रोड्क्शन टीम ने रिसर्च के दौरान आपसे इस संबंध में सहयोग लिया?
वैल, नहीं, किसी ने मुझसे रिसर्च के दौरान सलाह नहीं ली। हालांकि, फिल्म की टीम ने मुझे म्यूजिक लॉन्च पर इंवाइट किया था। लेकिन शहर से बाहर होने की वजह से मैं उस इवेंट में नहीं पहुंच पाया।
आपकी आवाज महानायक के करियर को बढ़ने में कैसे मददगार साबित हुई?
सब जानते है कि 80 के दशक के अंत का समय अमिताभ बच्चन के लिए बुरा था। लेकिन लोग कहते हैं की मेरे द्वारा गाया हुआ गाना जुम्मा-चुम्मा से उनके करियर को उछाल मिली। यह गाना बेहद पॉपुलर हुआ और
बिग बी वापस सुर्खियों में आ गए। उस गाने के बाद उन्होंने मुझे बताया कि अब वह सिंगिंग नहीं करेंगे। यहां तक की 1997 की फिल्म 'मृत्युदाता' का गाना ना ना ना ना ना रे, उन्हें गाना था। लेकिन उन्हें अपना वर्जन पंसद नहीं आया, तक फिल्म की टीम ने मुझसे प्लेबैक सिंगिंग के लिए संपर्क किया।
क्या आप कुछ यादगार लम्हें शेयर करना चाहेंगे?
जुम्मा-चुम्मा की सक्सेस के बाद, जब भी मैं गाने रिकॉर्ड करता था, उस दौरान वे मौजूद रहते थे। यहां तक की सावा सावा(कभी खुशी कभी गम) के गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान, वे रात 12 बजे स्टूडियो पहुंचे थे और म्यूजिक डायरेक्टर का चार्ज लेते हुए मेरी सहायता की थी।
मुझे याद है फिल्म 'बागवान' के गाने मेरी मक्खणा की रिकॉर्डिंग के दौरान अमिताभ, जया जी और अभिषेक सभी स्टूडियो आए थे। अमिताभ के लिए प्लेबैक करते हुए मुझे सुनने के बाद, जया जी इतनी खुश हो गई थी की उन्होंने मुझे 100 रुपये का आर्शीवाद के तौर पर दिए थे। इसके अलावा अभिषेक ने मुझे यह कहा था कि उनके पिता की आवाज में गाया ये सबसे बेहतरीन गाना है।
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