(फाइल फोटो : पत्नी सोनाली के साथ रूप कुमार राठौड़)
कॉपीराइट के उलझते मामलों से परे रूप कुमार राठौड़ और पत्नी सोनाली राठौड़ अपनी म्यूजिक कंपनी शुरू कर रहे हैं। इरादा गजल गायकी को प्रमोट करने और नए टैलेंट को मंच देने का है। रूप इस कंपनी को मिशन कहते हैं जिससे बाजारवाद के बीच गजल की मासूमियत और सुनने वालों के बीच मरासिम रखा जा सके। शुरुआत वे और सोनाली "जिक्र तेरा’ से कर रहे हैं। इस एलबम में आठ गजलें हैं। चार के वीडियो भी बनेंगे जिन्हें टीवी चैनल्स के बजाय इंटरनेट से प्रमोट किया जाएगा। पांच साल बाद आ रहा यह एलबम जगजीत सिंह को समर्पित है। हमारे सवालों के जवाब उन्होंने और सोनाली ने साथ दिए:
>>म्यूजिक कंपनी क्यों बना रहे हैं?
अन्य कंपनियां अब गजलों को प्रमोट नहीं करती। 80 का दौर गजलों का गोल्डन पीरियड था। तब कंपनियों को मुनाफा होता था तो हमें भी पूरा क्रेडिट मिलता था। अब कंपनियों को प्रॉफिट नहीं तो वे गजलों का प्रमोशन भी नहीं कर रहे। लेकिन हमने सुनने वालों के लिए यह मिशन शुरू किया और अपनी कंपनी की नींव रखी है। वीडियो भी बनाए हैं क्योंकि आजकल संगीत सुनने के साथ देखने की चीज है। उदयपुर शहर व अन्य गावों में शूटिंग की है। वैसे पिछले सूफी एलबम "कलमा' के वीडियो भी बनाए लेकिन उनका प्रमोशन नहीं हो सका था।
>>लेकिन क्या आपकी कंपनी को संघर्ष नहीं करना पड़ेगा?
पहले हम सारे अधिकार म्यूजिक कंपनी को दे देते थे, वही प्रमोशन वगैरह करते थे। आज हम पुराने एलबम री-रिलीज़ या यूज़ नहीं कर सकते। लेकिन अब हमारे क्रिएशन का कॉपीराइट हमारे पास रहेगा। हम इंटरनेट के माध्यम से गजल प्रेमियों से जुड़ रहे हैं। बाजार को समझ रहे हैं। अप्रैल से लगातार फ्री लाइव शो करेंगे। "जिक्र तेरा’ का दूसरा भाग भी तैयार है जिसे साल की दूसरी छमाही में लाएंगे। अपनी कंपनी में नवोदितों को भी प्रमोट करेंगे, शो भी करेंगे। संघर्ष भाषा का है। उर्दू के बाद हिंदी भी तो ख़त्म हो चुकी है। एसएमएस की भाषा ने बची-खुची हिंदी का बेड़ा गर्क किया है। अश्लीलता इतनी कि इश्क कुत्ता है गाने चल रहे हैं। बच्चे आंख बंद करके गा रहे हैं और संस्कृति भी डूब रही है।
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