राजकुमार हीरानी जब 2003 में रिलीज हुई फिल्म 'मुन्नाभाई एमबीबीएस’ की सीक्वल बना रहे थे तो इसमें अगले साल आई लुई फिशर की किताब ने उनकी बड़ी मदद की। 2006 में आई 'लगे रहो मुन्नाभाई’ गांधीगिरी के बारे में थी और वे इसे और '
पीके' को अपनी सबसे यूनीक आइडिया वाली फिल्में
मानते हैं।
एक गैंगस्टर और अहिंसक बापू के मिलने की ये कहानी राजू के जेहन में बहुत पहले से थी लेकिन आइडिया को सही रूप देने के लिए उन्होंने गांधी पर काफी रिसर्च मटीरियल और बुक्स पढ़ीं। इनमें गांधी की लिखी सत्य के साथ मेरे प्रयोग से लेकर अन्य बायोग्राफी शामिल थीं। सबमें उन्हें लुई फिशर की किताब सबसे ज्यादा छू गई। लुई (1896-1970) अमेरिकी पत्रकार थे। राजू कहते हैं, 'लुई फिशर ने गांधी जी पर जो किताब लिखी वो उनकी बायोग्राफी से भी अच्छी है। द लाइफ ऑफ महात्मा गांधी मेरी पसंदीदा किताब है। इसी कि ताब पर सर रिचर्ड एटरबरो ने ऑस्कर जीतने वाली यादगार फिल्म 'गांधी’ (1982) लिखी थी।
गांधी पर लुई ने गांधी एंड स्टॉलिन (1947) लिखी और 'द असेंशियल गांधी’ एडिट की। इस ऑलटाइम फेवरेट बुक के अलावा राजू ने पसंद की अन्य पुस्तकें भी बताईं। उन्होंने बताया, 'आजकल एक किताब पढ़ रहा हूं जो गुड फूड पर है। आश्चर्य जनक है। इसके अलावा द नेकेड ऐप (The Naked Ape: A Zoologist's Study of the Human Animal, 1967) है। कुछ पुरानी किताबें पढ़ रहा हूं लेकिन नए नजरिए के साथ।’ उनका फेवरेट जॉनर नॉन-फिक्शन है। उसमें भी फिलॉसफी पर किताबें। राजू बताते हैं, 'मैं 20 साल पहले फिक्शन पढ़ता था। अब फिलॉसफी ज्यादा पढ़ता हूं। फिक्शन पढ़ने का सब्र मुझमें नहीं बचा है।’
रोज रात सोने से पहले वे किताबें जरूर पढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि वे एक साथ चार किताबें पढ़ते हैं। जब पूछा कि चार किताबें एक साथ पढ़ना चार लड़कियों को एक साथ डेट करने की तरह नहीं होगा? तो हंसते हुए बोले, 'ये बहुत
खूबसूरत बात लगी मुझे। लेकिन इसमें तब तक कुछ गलत नहीं, जब तक आप किसी को नुकसान नहीं पहुंचा रहे हो। दूसरे मामले में तो आप सभी को हर्ट करोगे। मैं मूड के हिसाब से पढ़ता हूं।’