राजू हीरानी बताते हैं, "मेरी फिल्मों के गाने फिल्म रिलीज होने के बाद भी ज्यादातर चलते हैं। इस बार तो
पीके के गाने हमने पहले ही सार्वजनिक कर दिए हैं। रिएक्शन अच्छा मिल रहा है।' फिल्म बनाने की लंबी प्रक्रिया रखने वाले हीरानी गाने भी इसी प्रक्रिया से बनाते हैं। स्क्रिप्ट के साथ गानों पर काम शुरू होता है।
राजू कहते हैं, "देखिए, गाने बनाने के दो तरीके होते हैं। पहला, आप संगीतकार को सिचुएशन बताओ, वो 8-10 बनी-बनाई धुनें सुनाएगा। पसंद आए तो ले लो। लेकिन ये गाने ऐसे होते हैं कि फिल्म चल रही है अचानक कट हुआ और आप पहुंच गए स्विट्ज़रलैंड। गाना खत्म हुआ तो वापस लौट आए।’
लेकिन ऑल इज वेल और बंदे में था दम जैसे गानों को बनाने के लिए वे दूसरा तरीका अपनाते हैं। गीतकार स्वानंद किरकिरे, कंपोजर शांतनु मोइत्रा और राजू घंटों बैठते हैं, स्क्रिप्ट पर बात करते हैं और गाना लिखना शुरू करते हैं। लेखन ही महीनों चलता है। राजू ने बताया कि पीके के गीत/संगीत पर दो साल तक काम किया।