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Ram Rahim speaks on controversy: 'सेंसर ने कहा उन्हें फिल्म समझ नहीं आई’

6 वर्ष पहले
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गुरमीत राम रहीम की मुख्य भूमिका और सह-निर्देशन वाली 'एमएसजी- द मैसेंजर' इस शुक्रवार को रिलीज हो रही है। इस सीरीज की दूसरी फिल्म "एमएसजी-2' 70 फीसदी बनकर तैयार है। अंग्रेजी संस्करण भी बन रहा है। प्रस्तुत हैं उनसे बातचीत के अंश:
फिल्मों में आने का फैसला क्यों लिया?
हमारे सत्संग के कुछ युवा एक रोज नहीं आए। अभिभावकों से छिपकर फिल्म देखने गए थे। उन्होंने बताया कि अभिभावक पसंद नहीं करते फिल्में देखना, ये गलत चीजें होती हैं। तब हमने सोचा यूथ को सही मैसेज देने और ज्यादा लोगों तक पहुंचने के लिए हम भी फिल्म बनाते हैं।
ये किस जमाने की बात कर रहे हैं आप?
बड़े शहरों में सब चलता है, गांवों व छोटे शहरों में आज भी ऐसी फिल्मों पर पाबंदी है जिनमें नग्नता हो। गावों में तो टीवी बंद करा देते हैं। आप करते क्या हैं? सत्संग करते हैं। एग्रीकल्चर साइंटिस्ट हूं। गाड़ी मॉडिफाई करना, कपड़े डिजाइन करना, घुड़सवारी, स्पोर्ट्स भी करता हूं। इस फिल्म की कहानी, गाने सभी लिखे और कंपोज किए हैं।
आप पर मर्डर, दुष्कर्म जैसे केस हैं?
1992 से हमें ड्रग माफिया डराने, बदनाम करने की धमकी दे रहा है। हम लोगों का नशा छुड़वा रहे हैं तो माफिया का बिजनेस खराब हो रहा है। हम पर आरडीएक्स से हमला हुआ, फिर भी हम जीवित हैं। यही लोग विवाद बनाते और प्रचारित करते हैं। हम सिर्फ समाज सुधार कर रहे हैं।
सरकार ने कुछ मदद दी हमले के बाद?
हमें जेड प्लस सिक्योरिटी मिली है, लेकिन हम लोगों को नशे से दूर करने और बच्चियों को वेश्यावृति से निकाल कर बसाने की कोशिश कर रहे हैं। सेंसर को आपत्ति किस शब्द पर थी? सेंसर ने कहा उन्हें फिल्म समझ नहीं आई। एक दृश्य में भगवान कहे जाने पर आपत्ति थी। हमने एक लाइन और कुछ शब्द साइलेंट किए।
अपनी गद्दी अपने बेटे को देंगे?
हमारा एक बेटा है, नाती-पोते हैं लेकिन हमारा बेटा डेरे से परे अपना बिजनेस करता है। हमें 90 में हमारे गुरु ने गद्दी थी और कहा कि 50- 60 साल काम करना है, इसलिए फिलहाल हम किसी को इस जगह पर नहीं देख रहे।
राजनीति में उतरेंगे?
हम फकीर हैं, राजनीति में नहीं चलते। राजनीति में जाने का शौक नहीं लेकिन इंसानियत व समाज की रक्षा के लिए जो भी कर सकेंगे करेंगे।