('इट्स नॉट अ गेम' का स्टिल)
मुंबई. इसे अजब संयोग ही कहेंगे कि एक ओर इन दिनों भारत में दुष्कर्म के खिलाफ लोग सड़कों पर हैं और ऐन इसी दौरान भारतीय मूल के एक फिल्मकार की शॉर्ट फिल्म चर्चा में है। सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर भारतीय मूल के कैलिफोर्निया बेस्ड जोश सेवन की रेप पर बनी 7 मिनट की शॉर्ट फिल्म 'इट्स नॉट ए गेम' खासी पसंद की जा रही है।
राजधानी दिल्ली में पिछले दिनों यूबर कैब ड्राइवर द्वारा युवती से किए गए रेप की घटना के बाद सड़क से संसद तक भूचाल आया हुआ है। रेप की घटनाओं को रोकने के लिए लगातार कई एनजीओ और सरकार जहां मुहिम चला रही है। वहीं दुनियाभर के छोटे-बड़े फिल्मकार भी इस मुद्दे पर अपना पक्ष रख रहे हैं। जोश ने भी अपनी शॉर्ट फिल्म 'इट्स नॉट ए गेम' में इसी विषय को उठाया है। यह शॉर्ट फिल्म आइडिया, कॉन्सेप्ट और मेकिंग के लिहाज से यूनिक है। जोश ने इस फिल्म में संवाद के बजाय वीडियो गेम के फॉर्मेट को आधार बनाकर अपराध के मनोविज्ञान को समझाने की कोशिश की है।
फिल्म में दिखाया गया है कि अपराध से पहले एक अपराधी की मनोस्थिति क्या होती है। फिर वह कैसे एक दफा अपराध करने के बाद लगातार बिना झिझक अपराध करता जाता है। इस फिल्म में एक लड़के बेन के किरदार के माध्यम से दिखाया गया है कि वह कैसे पहली दफा एक अनजान युवती से ड्रिंक का आग्रह करता है। इसके बाद बेन का कॉन्फिडेंस बढ़ता जाता है और वह कई युवतियों को अपने इस खेल का शिकार बनाता है। अंत में विक्षिप्त हालत में एक युवती को दिखाया गया है। फिल्म हालांकि प्रतीकों में संवाद कायम करती है, बावजूद इसके अपनी बात कहने में कामयाब होती है। जोश ने ही इस फिल्म की पटकथा भी लिखी है।
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