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Movie Review: पोस्टर फाडक़र निकल ही आया हीरो

Dainik Bhaskar

Sep 20, 2013, 10:24 AM IST

'फटा पोस्टर निकला हीरो' का हीरो आखिर पोस्टर फाड़कर निकल ही आया

Phata poster nikla hero film movie reviews
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मोस्ट अवेटिंग फिल्म 'फटा पोस्टर निकला हीरो' का हीरो आखिर पोस्टर फाड़कर निकल ही आया, मतलब फिल्म रिलीज हो ही गई। कुल मिलाकर साधारण-सी कहानी के बेस पर इस फिल्म का प्लॉट तैयार किया गया है, लेकिन फिर भी फिल्म का मसालेदार और मजेदार स्क्रीनप्ले फिल्म को देखने के लिए मजबूर करता है। यह विश्वास रॉव (शाहिद कपूर) नामक किरदार की यात्रा की कहानी का तानाबाना है और उसकी मां की चाहत है कि उसका बेटा एक पुलिस ऑफिसर बने। वह अपनी मां का इकलौता बेटा है और फिल्म में शाहिद की मां का किरदार निभाया है अपने जमाने की वरिष्ठ अभिनेत्री पद्मिनी कोल्हापुरी ने।ये लंबे अर्से बाद इस किरदार के साथ सिल्वर स्क्रीन पर नजर आई हैं।

फिल्म का नायक विश्वास इस फिल्म में अभिनेता सलमान खान का बड़ा मुरीद होता है और अपनी मां की चाहत के विपरीत उसका ध्यान फिल्मों की तरफ ज्यादा होता है। इधर उसकी किस्मत को कुछ और ही मंजूर होता है। शाहिद कपूर एक एस्पाइरिंग एक्टर का किरदार निभा रहे हैं और फिल्म में गलती से उन्हें पुलिस समझ लिया जाता है।

खास बात यह है कि फिल्म के पहले 20 मिनट में लेखक-निर्देशक राजकुमार संतोषी का एफर्ट नजर आता है कि उन्होंने बगैर वक्त गंवाए सीधे-सीधे अपनी बात रखी है। हालांकि, फिल्म की शुरुआत 90 के दशक के मध्यम सुरों से होती है, जो हमें उस वक्त की याद ताजा करवाते हैं, लेकिन संजय मिश्रा की स्क्रीन पर एंट्री होते ही फिल्म के प्लॉट की परतें धीरे-धीरे खुलती जाती हैं और फिल्म दर्शकों को खंड-खंड में बंटी हुई दिखाई देती है।

इसमें कोई दो राय नहीं है कि शाहिद कपूर ने बेहतर टाइमिंग के साथ संजय मिश्रा और दर्शन जरीवाला के साथ बेहतरीन कॉमिक सेंस को शेयर किया है और दर्शकों को मजा दिलाने में कामयाब रहे। इनके अलावा, मंजे हुए कलाकार सौरभ शुक्ला को कैसे भुलाया जा सकता है। इन्होंने अपनी हास्य प्रतिभा का पूरा प्रदर्शन फिल्म में किया है और हास्य की फुलझड़ियां छोड़ने में उनका भी कोई सानी नहीं है।

फिल्म के दूसरे खंड में आगे चलकर सलमान खान के केमियो अदाकारी ने फिल्म को और इंटरेस्टिंग बनाया है। इस स्लाइड में दिखाया गया कि किस तरह उन्होंने अपनी मजेदार फिल्म 'अंदाज अपना अपना' के वक्त आमिर खान के साथ तालमेल बैठाया था और फिर वे क्यों उनके साथ काम करने में भयभीत रहते हैं। इस पर भी उन्होंने अपने हास्य अंदाज में सटायर मारा है।

फिल्म के तीसरे खंड पर अब निगाह डालें तो कुछ झटके जरूर लगेंगे। मतलब, जब भी जहां भी हम 'डॉन', 'मुन्ना भाई एमबीबीएस' जैसी फिल्मों से यदि इस फिल्म की तुलना करें, तो कुछ दृश्य वाकई ऐसे लगते हैं, जैसे इन फिल्मों से सेंध मारकर लिए गए हों। फिर भी संतोषी अपने बेहतरीन काम से आलोचना के लिए कोई जगह नहीं छोड़ते।

फिल्म के चौथे खंड पर गौर करें तो गाने फिल्म के प्रवाह में बाधा डालते हैं। नरगिस फकरी पर फिल्माए आइटम नंबर के अलावा बाकी सारे गीत फिल्म में इस तरह नजर आते हैं कि जैसे उन्हें जबरदस्ती फिल्म की ड्यूरेशन बढ़ाने के लिए थोपा गया हो या और साफ कहें तो घुसेड़ा गया हो। नायिका इलियाना डीक्रूज की बात की जाए तो शाहिद के साथ उन्होंने बतौर नायिका अपना बेहतर तालमेल बैठाया है और वे फ्रेम्स में काफी खूबसूरत नजर आ रही हैं।

फिल्म के पांचवें खंड पर गौर किया जाए, तो यहां यह कहना होगा कि शाहिद ने यह सिद्ध कर दिया है कि वे अकेले दम पर भी आसानी से फिल्म को कामयाब बनाने की ताकत रखते हैं। उन्होंने परदे पर नायिका इलियाना के साथ अपने लव मेकिंग और कॉमिक सीन्स में अपने अभिनय की ताकत को फिर से प्रूव कर दिया है।

अंत में यह कहा जा सकता है कि फटा पोस्टर निकला हीरो साफ-सुथरी पारिवारिक फिल्म है और इसे एक बार तो कम से कम देखा ही जा सकता है।

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