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अनुष्का बोलीं, 'न मैंने बड़े होते हुए फिल्में देखी, न मुझे एक्टर बनना था'

7 वर्ष पहले
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मुंबई. नवदीप सिंह द्वारा निर्देशित "एनएच 10’ के अलावा अनुष्का शर्मा ने अनुराग कश्यप की "बॉम्बे वेलवेट’ में भी सह-निर्माण किया है। 2008 में "रब ने बना दी जोड़ी’ से फिल्मों में आईं ये अभिनेत्री आज हिंदी फिल्म उद्योग में मजबूत स्थान बना रही हैं। बतौर अदाकारा भी उनकी आने वाली चार महत्वपूर्ण फिल्में हैं "पीके’, "बॉम्बे वेलवेट’, "दिल धड़कने दो’ और "एनएच 10’। इस हफ्ते लग रही "पीके’ के सिलसिले में उनसे बात हुई:
शाहरुख के साथ डेब्यू (रब ने बना दी जोड़ी) किया और अब शीर्ष सितारे आमिर के साथ फिल्म आ रही है। ये यात्रा कैसी रही?
न मैंने बड़े होते हुए फिल्में देखी थीं, न मुझे एक्टर बनना था। फिल्मंे करती गई और सीखती गई। अपनी सोच और शर्तों पर फिल्में चुनीं। अच्छे लोगों के साथ काम किया। उत्साहित हूं। "पीके’ के बाद मेरी तीन फिल्में रिलीज होंगी। 2015 मेरे लिए गंभीर साल होगा।
यशराज जैसे बड़े बैनर ने लॉन्च किया तो संघर्ष नहीं करना पड़ा?
भरोसा था कि मेरी पहचान बनेगी लेकिन रातों-रात सफलता नहीं मिली। शुरू में लोगों ने गंभीरता से नहीं लिया। "बैंड बाजा बारात' हिट हुई। लोग मुझसे कनेक्ट कर रहे थे। उससे मुझे विश्वास मिला।यशराज के साथ चार फिल्में कर ली हैं, आगे भी आदि (आदित्यचोपड़ा) को मेरे लिए कोई रोल ठीक लगा तो करूंगी। चूंकि वे मेरे मेंटर हैं तो इस बैनर से मेरा रिश्ता अच्छा है।
आदित्य चोपड़ा आज भी सलाह देते हैं?
वे बहुत पेशेवर और फोकस्ड हैं। सुझाव देते हैं लेकिन शुरू से ही उन्होंने कहा कि जिसमें आपको विश्वास हो वो फैसला लो। जब भी कहीं अटकूं या दुविधा हो तो उनसे और अपने भाई से चर्चा करती हूं।
राजू-आमिर-विधु की सफल तिकड़ी संग अनुभव कैसा रहा?
राजू आपको खास महसूस कराते हैं और किरदार दर्शकों को छू जाता है इसलिए उनकी फिल्म करनी थी। मेरे काम करने का तरीका भी उन जैसा ही है। अपने किरदार में घुस जाती हूं। उनके कट बोलने के तुरंत बाद शॉट के बारे में पूछती हूं कि क्या आप संतुष्ट हैं? अगर जरूरी हो तो रीटेक देने में मुझे कोई परेशानी नहीं होती। मेरा स्वभाव ही ऐसा है कि "जो भी करो बेस्ट करो।’
आमिर की मौजूदगी में अपने रोल को लेकर कितनी असुरक्षा है?
राजू हीरानी की कहानी सर्वोपरि होती है। किरदारों से भी। इसमें हर किरदार यादगार होता है। राजू की वाइफ उनसे कहती हैं कि आपकी फिल्मों में फीमेल रोल महत्वपूर्ण होते हैं लेकिन दिखते कम हैं। तो उन्होंने कहा है कि इस फिल्म में फीमेल किरदार को माइलेज देकर पत्नी को खुश करने की कोशिश की है। ये बदलाव हो रहा था तो मैं खुश थी।
दीपिका अपनी फिल्मों में हीरो लोगों के बराबर महत्व पाने लगी हैं, आपकी भी ऐसी कोई ख्वाहिश या योजना है?
मेरा हमेशा इस बात पर ध्यान रहा है कि मेरे रोल अच्छे हों, मेरा योगदान हर लिहाज से बड़ा हो, लोगों को फिल्में पसंद आएं और पैसे भी कमाए।
एनएच 10 में राजकुमार राव के होने, न होने पर क्यों विवाद रहा?
इस फिल्म के लिए राजकुमार से कोई बात ही नहीं हुई थी। वैसे भी कास्टिंग का काम मैं निर्देशक पर छोड़ती हूं। बतौर निर्माता मेरा ऐसा कोई दखल नहीं होता। मुझे बेवजह इसमें घसीटा गया।
मुंबई आपके लिए क्या है?
मेरी कर्मभूमि है। मैं मुंबई की बहुत इज्जत करती हूं। यहां लोग मेहनती हैं इसलिए कल्चर ही ऐसा है। लोग थकते नहीं, ट्रैवल करते जाते हैं।
अब तक के अपने सह-कलाकारों की खासियत बताएं।
शाहरुख खान: उनका मजाकिया अंदाज उनका सबसे बड़ा चार्म है।
इमरान खान: एनसाइक्लोपीडिया हैं। उन्हें सब पता होता है। हमेशा उनकी बात ही ऐसे शुरू होती है - क्या तुम्हे ये पता है? सूचना बहुत देते हैं। पढ़ते बहुत हैं इसलिए उन्हें कई रोचक तथ्य पता होते हैं।
आमिर खान: तेज दिमाग वाले और बुद्धिमान हैं।
रणवीर सिंह: बहुत उन्मुक्त और बेबाक हैं, जो किसी भी एक्टर के लिए बहुत अच्छी बात होती है।
रणबीर कपूर: वे स्टारडम को सीरियसली नहीं लेते। बहुत चिल्ड आउट हैं। कहीं भी जाने से पहले सोचते नहीं। मैं भी ऐसी ही हूं इसलिए वे मेरे दोस्त भी हैं।