मुंबई. यहां के महालक्ष्मी रेसकोर्स मैदान पर सोमवार को एक लाख लोगों का जमावड़ा। सब जुटे थे लता मंगेशकर से 'ऐ मेरे वतन के लोगो...' को सुनने के लिए। लताजी आईं। मंच से उन्होंने अपना अनुभव सुनाया- '1963 में मैंने यह गीत गाया था। यह गीत गाने के बाद नेहरूजी ने अपने घर मुझे चाय पर बुलाया।
मैं वहां पहुंची और अंधेरे कोने में खड़ी हो गई। वहां मुझे खोजते हुए इंदिराजी आईं। उन्होंने कहा- मैं आपसे आपके दो बड़े प्रशंसकों को मिलवाना चाहती हूं। थोड़ी देर बाद वे आईं तो उनके साथ दो बच्चे थे- राजीव व संजय। उन्होंने मेरे साथ फोटो खिंचवाया।'
अनुभव सुनाते हुए लताजी ने कहा- तब 1962 की लड़ाई से नेहरूजी दुखी थे। सबके ऊपर दुख की छाया थी। उस हालत में मैंने यह गाना गाया था। आज तक मैंने जितने भी शो किए हैं, हर जगह मुझे यह गीत गाना पड़ता था। विदेशों में 110 बार। आज भी मैंने गीत की तैयारी नहीं की है। लेकिन लोग इतना कह रहे हैं तो कुछ पंक्तियां गाना चाहूंगी।' इसके बाद उन्होंने गाना गाया।
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