(फाइल फोटोः देव आनंद और राज कपूर के साथ दिलीप कुमार)
मुंबई: बॉलीवुड के वेटरन अभिनेता दिलीप कुमार 92वां साल के हो चुके हैं। 11 दिसंबर, 2014 को जब उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली तो परिवार के साथ उनके फैन्स भी काफी खुश नजर आए। अस्पताल के बाहर लोगों ने इस अभिनेता को बर्थडे की शुभकामनाएं दीं। दिलीप साहब का बॉलीवुड करियर फिल्म 'ज्वार भाटा' (1944) से शुरू हुआ था।
साल 1947 में उन्होंने 'जुगनू' में काम किया। इस फिल्म की कामयाबी ने दिलीप साहब को चर्चित कर दिया। इसके बाद उन्होंने 'शहीद', 'अंदाज', 'दाग', 'दीदार', 'मधुमति', 'देवदास', 'मुसाफिर', 'नया दौर', 'आन', 'आजाद' जैसी कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया। अपने अभिनय से वो स्वतंत्र भारत के पहले दो दशकों में लाखों युवा दर्शकों के दिलों की धड़कन बन गए थे। उन्होंने अभिनय के माध्यम से कई मुद्दों को श्याम-श्वेत सिनेमा के पर्दे पर प्रस्तुत किया।
देविका रानी ने काम और नाम दिया
वो ट्रेजेडी किंग के साथ ऑलराउंडर अभिनेता भी कहे जाते हैं। 25 साल की उम्र में
दिलीप कुमार देश के नंबर वन अभिनेता के रूप में स्थापित हो गए थे। राजकपूर और देव आनंद के आने से 'दिलीप-राज-देव' की प्रसिद्ध त्रिमूर्ति का निर्माण हुआ। ये नए चेहरे सिनेमा देखने वाले दर्शकों के दिल पर राज करने लगे। दिलीप कुमार प्रतिष्ठित फिल्म निर्माण संस्था बॉम्बे टॉकिज की देन हैं, जहां देविका रानी ने उन्हें काम और नाम दिया। यहीं वे यूसुफ सरवर खान से दिलीप कुमार बने और यहीं उन्होंने अभिनय की बारीकियां सीखीं।
कभी पैसे के पीछे नहीं भागे
अशोक कुमार और शशधर मुखर्जी ने फिल्मिस्तान की फिल्मों में लेकर दिलीप कुमार के करियर को सही दिशा में आगे बढ़ाया। फिर नौशाद, मेहबूब, बिमल राय, के. आसिफ और दक्षिण के एस.एस. वासन ने दिलीप के साथ काम कर कई चर्चित फिल्में बनाईं। 44 साल की उम्र में
अभिनेत्री सायरा बानो से विवाह करने तक दिलीप कुमार ऐसी कई कर फिल्में चुके थे, जिनके लिए आज उन्हें याद किया जाता है। बाद में, दिलीप कुमार ने काम और आराम का फंडा अपना लिया। दिलीप साहब पर एक बड़े परिवार के संचालन की जिम्मेदारी थी, लेकिन अपनी प्रतिष्ठा और लोकप्रियता को उन्होंने पैसा कमाने के लिए कभी नहीं भुनाया।
पद्मभूषण से दादा साहब फाल्के तक
इस महानायक ने अपने करियर के दौरान
महज 55-60 फिल्में की हैं। उन्होंने हमेशा इस बात का ध्यान रखा कि अभिनय के चलते उनकी इमेज खराब ना हो। दिलीप कुमार को उनके अभिनय के लिए भारत सरकार ने 1991 में पद्मभूषण से नवाजा था। वहीं, 1995 में फिल्म का सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान दादा साहब फाल्के अवॉर्ड भी उन्हें मिल चुका है। इतना ही नहीं, पाकिस्तान सरकार ने भी उन्हें 1997 में 'निशान-ए-इम्तियाज' से नवाजा, जो पाकिस्तान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।
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