(हर्षिल का पोस्टऑफिस, रंवाई घाटी की पारंपरिक वेशभूषा में मंदाकिनी और फिल्म 'राम तेरी गंगा मैली' का पोस्टर)
मुंबई. यूं तो उत्तराखंड की वादियां फिल्मकारों को हमेशा से ही लुभाती आई हैं, लेकिन दुर्गम लोकेशन और संसाधनों के अभाव में कम ही फिल्मकारों ने यहां का रुख किया है। फिल्मकार आए भी तो नैनीताल, हरिद्वार, ऋषिकेश और मसूरी के आसपास ही शूटिंग निपटाकर उत्तराखंड से रुखसत हो गए। ऋषिकेश से आगे जहां असल मायनों में पहाड़ शुरू होते हैं, दो-एक फिल्मकारों ने ही जाने का जोखिम उठाया, जबकि ये इलाके सड़कमार्ग से पूरी तरह से जुड़े हुए हैं। International Mountain Day के मौके पर Dainikbhaskar.com उत्तराखंड की रंवाई घाटी में शूट हुई बॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'राम तेरी गंगा मैली' के शूटिंग स्पॉट के बारे में बता रहा है।
उत्तराखंड में फिल्म की शूटिंग की जब भी बात होगी शो मैन राजकपूर का नाम प्रमुखता से लिया जाएगा। 1985 में राजकपूर ने बॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर फिल्मों में शुमार 'राम तेरी गंगा मैली' की शूटिंग दुर्गम रवांई घाटी के कई इलाकों में की थी। उत्तरकाशी, हर्षिल और गंगोत्री में फिल्म के एक बड़े हिस्से की शूटिंग की गई थी। इतना ही नहीं फिल्म की मुख्य नायिका मंदाकिनी को भी मूल रवांई घाटी का बताया गया था।
फिल्म की कहानी के मुताबिक गंगा (मंदाकिनी) अपने भाई करम के साथ गंगोत्री में रहती है, जो कि उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद में है। हालांकि, तकनीकी रूप से देखें तो ऐसा संभव नहीं है, क्योंकि हर्षिल से आगे का इलाका 6 महीने भारी बर्फवारी के चलते बाकी दुनिया से कटा रहता है। गंगोत्री में गंगा जी का मंदिर है और यह महज 6 माह ही लोगों के आवागमन के लिए खुला रहता है। बाकी के 6 महीने यह इलाका भारतीय सेना की निगरानी में रहता है।
ग्रामीण पहाड़ी महिलाओं के लिबास से प्रेरित थे मंदाकिनी के आउटफिट्स
फिल्म की कहानी के मुताबिक चूंकि मंदाकिनी का किरदार रवांई घाटी का होता है, इसलिए उनके आउटफिट्स को भी रवांई की ग्रामीण महिलाओं के पारंपरिक लिबास के आसपास ही डिजाइन किया गया था। इतना ही नहीं मंदाकिनी की ज्वैलरी भी ट्रेडशिनल रवांई ज्वेल आर्ट से प्रेरित थी।
आज भी हर्षिल की पहचान है फिल्म
उत्तराखंड के सुदूरवर्ती हिस्सों में यू तो कोई सिनेमाहॉल नहीं है, बावजूद इसके अन्य माध्यमों से लोग फिल्मों से रूबरू होते रहते हैं। हर्षिल की ही बात करें तो यह एक छोटा सा पहाड़ी कस्बा है। हिमालय की तलहटी में बसा
खूबसूरत हर्षिल प्राकृतिक सौन्दर्य के साथ ही सेब की पैदावार के लिए पहचाना जाता है। यह गंगोत्री का एक अहम पड़ाव है, लिहाजा यहां पर पर्यटकों का आना-जाना बना रहता है। हर्षिल के स्थानीय निवासी आज भी उस पोस्टऑफिस को देख यह बताना नहीं भूलते कि फिल्म में मंदाकिनी की चिठ्ठी इसी पोस्टऑफिस में आई थी। पोस्टऑफिस आज भी वैसा ही है जैसा 1985 में बनी इस फिल्म में नजर आया था।
आगे की स्लाइड में देखें रवांई वैली की कुछ तस्वीरें और फिल्म से लिए गए स्टिल्स...