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'सत्यमेव जयते': आमिर ने उठाया 'ओल्ड एज होम' का मुद्दा

9 वर्ष पहले
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आज 'सत्यमेव जयते' प्रोग्राम में आमिर खान ने उन उम्रदराज लोगों की बदहाली का मुद्दा उठाया जिन्हें उनके अपने बच्चे ही ठुकरा देते हैं और वे 'ओल्ड एज होम' में एकाकी जीवन बिताने को मजबूर हो जाते हैं। मथुरा भगवान श्रीकृष्ण के अलावा उन माताओं की भी नगरी है, जो अपने ही बच्चों के जुल्म की शिकार हो यहां जीवन काटने को मजबूर हें।



इनमें से कई ऐसी हैं जो समपन्न परिवार से होने के बावजूद दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। एक जमाने में समाज में साख रखने वाली ये मांए अनजान लोगों के सहारे अपनी जिंदगी के आखिरी पल गिन रही हैं। विशेषज्ञों ने बताया कि अनेक लोग ऐसे हैं जो अपने मां-बाप को अस्पताल में छोड़ कर जाते हैं और कभी नहीं लौटते।



आमिर ने एक रिसर्चर प्रमिला से बातचीत की। अर्चना ने बताया दक्षिण भारत में बुजुर्गों को मार डाला जा रहा है। प्रमिला ने बताया कि कई लोगों ने साफ कहा कि उन्होंने अबने मां-बाप को मार डाला। वहां एक शब्द 'कलईकुत्तल' का इस्तेमाल होता है जिसका मतलब होता है नहलाना। लेकिन इसका वास्तविक मतलब है मार डालना।



बुजुर्गों की हत्या के लिए उनके अपने ही बच्चे नीम-हकीमों से उन्हें जहर का इन्जेक्शन लगवा देते हैं। यह नीम-हकीमों की कमाई का अच्छा जरिया बन चुका है। रिसर्च के दौरान प्रमिला एक क्वैक से मिलीं और कहा कि वह दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करना चाहती हैं, पर इसमें उनके दादा जी बड़ी बाधा बने हुए हैं। वे दिन-रात बिस्तर पर पड़े रहते हैं और उन्हें उनकी देखभाल करनी पड़ती है। वे उनसे छुटकारा पाना चाहती हैं। प्रमिला ने बताया कि कुछ पैसों के बदले वह क्वैक दादा जी को जहर का इन्जेक्शन लगाने को तैयार हो गया। वैसे यह चलन कम ही है, लेकिन कितना भयावह है, इसे आसानी से समझा जा सकता है।



आमिर खान ने हिमांशु रथ से बातचीत की जो 'एजवेल' संस्था चलाते हैं। उन्होंने बताया कि बुजुर्गों का सम्मान हमारे देश की परम्परा है, पर अब स्थिति पूरी तरह से बदल चुकी है। जिंदगी काफी तेज रफ्तार हो गई है। इसका असर परिवारों पर पड़ रहा है और युवा पीढ़ी अपने उम्रदराज मां-बाप को बोझ समझने लगे हैं। आर्थिक दबाव भी काफी बढ़ गया है। आजादी के समय जहां एवरेज एज 30-32 साल थी, आज 70 हो चुकी है।



60 साल में रिटायर होने वाले व्यक्ति के लिए अगले 20-25 साल काटना बड़ी मुसीबत हो जाती है। उन्होंने कहा कि हर आदमी को तब तक काम कर कुछ कमाई का जुगा़ड़ करना चाहिए, जब तक शरीर साथ दे। उन्हें अपने बच्चों पर बोझ बनने से बचना चाहिए। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि बुजुर्गों को कभी भी अपनी सम्पत्ति बच्चों के नाम नहीं करनी चाहिए, क्योंकि दौलत हाथ में आते ही उनकी उपेक्षा शुरू हो जाती है। जब तक उनके नाम सम्पत्ति रहती है, परिवार के लोग लालचवश उनका पूरा ख्याल रखते हैं।



आमिर खान ने दिल्ली यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर डॉ. अचला कौशिक से भी बातचीत की जो लम्बे समय से ओल्ड एज लोगों की समस्याओं पर काम कर रही हैं। प्रोफेसर कौशिक ने बताया कि बुजुर्गों की सबसे बड़ी समस्या आर्थिक संकट और सुरक्षा की है। दो-तिहाई बुजुर्ग इस समस्या से जूझ रहे हैं।



गोवा, तमिलनाडु आदि राज्यों में सरकार बुजुर्गों को कुछ आर्थिक सहायता दे रही है, पर अन्य राज्यों में इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं है। किसी राज्य में बुढ़ापा पेंशन दिया भी जा रहा है तो इतना कम कि उसका कोई मतलब ही नहीं। उन्होंने कहा 92 प्रतिशत बुजुर्गों को आज कोई आर्थिक सुरक्षा नहीं मिल रही है। राज्य सरकारों को चाहिए कि वे पेंशन स्कीम लागू करें।



आमिर खान ने दिल्ली में 'आयुधाम' नाम की संस्था चलाने वाली नीलम शर्मा से बातचीत की। इस संस्था में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यहां रहने वाले कई बुजुर्गों ने बताया कि वे यहां अपनी इच्छा से रह रहे हैं। घर में बच्चों द्वारा उपेक्षित किए जाने से यहां रहना कहीं बढ़िया है।




आमिर ने एक ऐसे जोड़े से भी बातचीत की जिन्होंने अपना अकेलापन दूर करने के लिए 70 से भी अधिक उम्र में शादी की और अब खुशहाल जीवन बिता रहे हैं। इसके अलावा आमिर ने और भी कई लोगों से इस समस्या पर बातचीत की। आखिरकार, इस प्रोग्राम से यही संदेश उभर कर सामने आया कि हमें उनकी उपेक्षा कभी भी नहीं करनी चाहिए जिन्होंने हमें जन्म दिया और न जाने कितनी मुसीबतें झेल कर पाला-पोसा और बड़ा किया।



आज अगर कोई भी सफलता के किसी भी मुकाम पर है तो इसमें उनके मां-बाप की अहम भूमिका है, लेकिन स्वार्थ और लालच में आदमी आज इस कदर अंधा हो चुका है कि उसे भगवान का दर्जा रखने वाले मां-बाप की ही कोई परवाह नहीं रह गई है।



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