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अब भी स्वर्ग है कश्मीर: शाहिद कपूर

7 वर्ष पहले
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`बॉक्स ऑफिस पर `फटा पोस्टर निकला हीरो' और `आर. राजकुमार' ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया। अब शाहिद कपूर की उम्मीदें `हैदर' पर टिकी हैं। हालांकि वे निराश नहीं हैं। वर्षों से बॉलीवुड के उतार-चढ़ाव देखते हुए शाहिद ने सीख लिया है कि अपना काम करते हुए कामयाबी का इंतज़ार जारी रखना चाहिए।
कुछ ही दिन पहले कश्मीर में `हैदर' की शूटिंग पूरी करके मुंबई लौटा हूं, लेकिन वहां के मौैसम का, कुदरती नज़ारों का सुरूर बरकरार है। जब भी कश्मीर के बारे में सोचता हूं तो कुछ दृश्य आंखों के सामने उभर आते हैं। इनमें से ज्यादातर शम्मी कपूर साहब की फ़िल्मों के हैं, जिनमें वे बर्फीली वादियों में थिरकते-झूमते नज़र आते हैं। एक और धुंधला-सा दृश्य है। बहुत छोटा था, जब मां के साथ कश्मीर गया था। डल लेक में हाउस बोट पर कुछ वक्त बिताया था। `हैदर' की शूटिंग के दौरान कश्मीर को ज्यादा अच्छी तरह से समझने का मौका मिला। भाषा-बोली, उच्चारण, बातचीत का सलीका, खानपान — सबको करीब से जाना। चूंकि, हैदर की कहानी एक कश्मीरी नौजवान की ज़िंदगी से जुड़ी है, इसलिए भी कश्मीर को समझना बेहद ज़रूरी था।
फ़िल्म में ज़ुबान की झलक
`हैदर' में कश्मीरी ज़ुबान के रंग देखने को मिलेंगे। भाषा को पूरी तरह शामिल नहीं किया गया है, क्योंकि ऐसा किया जाता तो बहुत-से दर्शक फ़िल्म की लैंग्वेज समझ ही नहीं पाते। मेरा किरदार अलीगढ़ से कॉलेज की पढ़ाई पूरी करके लौटे कश्मीरी युवक का है, इसलिए वह शुद्ध ज़ुबान नहीं बोलता। हां, थोड़ा-बहुत फ्लेवर रखा गया है। स्क्रिप्ट इतनी अच्छी तरह से लिखी गई है कि कैरेक्टर समझने में बिल्कुल दिक्कत नहीं हुई। थोड़ी-बहुत मुश्किल आई भी तो लेखक बशारत पीर ने सलाह देकर दूर कर दी।
धरती की जन्नत है कश्मीर
कश्मीर में काफी तादाद में सेना मौजूद है। इतने ज्यादा फौजियों को एक साथ देखने की हमें आदत नहीं है, लेकिन उनकी तैनाती के पीछे जरूरी कारण हैं। खैर, शूटिंग करते हुए कोई परेशानी नहीं हुई। लोगों ने काफी मदद की। वहां के बाशिंदे सीधे-सच्चे और दिल के साफ हैं। एक बार रिश्ता बन जाए तो हर कीमत पर निभाते हैं। कुदरत ने उस जगह पर खास मेहरबानी की है। सच कहूं तो कश्मीर को यूं ही स्वर्ग नहीं कहा जाता। आज भी वह पूरा इलाका स्वर्ग जैसा खूबसूरत है। मुझे उम्मीद है कि जल्द ही कुछ और फिल्मों की शूटिंग कश्मीर में होगी और एक बार फिर पहले जैसा वक्त वापस आएगा। `हैदर' के साथ दो-तीन और फ़िल्मों की शूटिंग वहां हो रही थी। यह अच्छी बात है, इंडस्ट्री के लिए और यकीनन, कश्मीर के लिए भी!
दमदार हैं नए कलाकार
हम लोग जब एक्टिंग की फील्ड में आए थे, तब कुछ खास नहीं जानते थे। फैंस से कैसे मिलें, बातचीत करें। मीडिया का सामना किस तरह करें। स्टाइल, लुक, ड्रेसेज़ को लेकर किस तरह की सावधानी बरतें — ये सब धीरे-धीरे सीखा। एक्टिंग को लेकर भी काम करते-करते परफेक्शन आया। हालांकि आजकल जो लड़के-लड़कियां एक्टर बन रहे हैं, वे पूरी तरह तैयार होकर इंडस्ट्री में आ रहे हैं। डांस, अभिनय, पीआर, लुक — उनमें परफेक्शन देखने को मिलता है। मैं युवा कलाकारों के भविष्य को लेकर बहुत आशान्वित हूं। श्रद्धा कपूर के साथ `हैदर' में काम करने के दौरान मैंने एहसास किया कि नए लड़के-लड़कियों में ग़ज़ब की एनर्जी है और श्रद्धा उनमें से ही एक हैं। श्रद्धा टैलेंटेड हैं और बहुत आगे जाएंगी।
हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी...
कई ऐसे निर्देशक हैं, जिनके साथ मैं काम करना चाहता हूं, लेकिन मेरे चाहने से क्या होता है। बात तो तब बने, जब उन्हें लगे कि शाहिद कपूर उनकी फिल्म के लिए ज़रूरी हैं। इसलिए हैं तो `हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले...'। देखते हैं, कितनी पूरी होती हैं।