(अभिनेत्री सिल्क स्मिता)
मुंबईः साल 2011 में विद्या बालन की फिल्म 'द डर्टी पिक्चर' ने बॉलीवुड में जबरदस्त नाम कमाया। इस फिल्म ने
बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया। साथ ही, विद्या के करियर को भी नई दिशा दे दी, लेकिन इस कामयाबी के पीछे एक ऐसा नाम छुपा था जो कभी साउथ फिल्म इंडस्ट्री की जरूरत बन चुका था। जी हां, ये नाम था अभिनेत्री सिल्क स्मिता का। दरअसल, 'द डर्टी पिक्चर' की कहानी सिल्क स्मिता की कहानी थी। साउथ इंडस्ट्री की इस कामयाब अभिनेत्री की 23 सितंबर को 18वीं पुण्यतिथि थी।
80 के दशक में साउथ फिल्मों में सिल्क स्मिता का जादू ऐसा चला जिसे लोग आज भी भूला नहीं सके हैं। सिल्क का जन्म 2 दिसंबर, 1960 को आंध्रप्रदेश में राजमुंदरी के एल्लुरू में हुआ था। उनके बचपन का नाम विजयालक्ष्मी था। सिल्क का परिवार इतनेा गरीब था कि घर वाले उन्हें पढ़ने के लिए सरकारी स्कूल तक भेजने में नाकाम थे। ऐसे में चौथी क्लास में ही उनकी पढ़ाई छूट गई। इसके बाद वो फिल्मों में मेकअप असिस्टेंट का काम करने लगीं। स्मिता शूटिंग के दौरान हीरोइन के चेहरे पर टच अप का काम किया करती थीं। फिल्मी चकाचौंध को देखकर ही उनकी आखों में भी हीरोइन बनने का सपना सजने लगा।
एक ब्रेक ने चमका दी किस्मत
स्मिता को 1978 में कन्नड़ फिल्म 'बेदी' में पहली बार काम करने का मौका मिला। हालांकि, उन्हें बड़ा ब्रेक 'वांडीचक्रम' (1979) से मिला। इस फिल्म में उन्होंने स्मिता का किरदार निभाया, जो लोगों को काफी पसंद आया। साथ ही, उन्होंने मद्रासी चोली का फैशन भी शुरू कर दिया। इस किरदार की शोहरत के चलते उन्होंने अपना नाम सिल्क स्मिता कर लिया। 1983 में उन्होंने 'सिल्क सिल्क सिल्क' नाम की भी फिल्म की। करियर के तीन सालों के दौरान ही उन्होंने करीब 200 फिल्मों में काम कर लिया।
पैसे के लिए शिफ्टों में किया काम
सिल्क का जादू अब इंडस्ट्री में चलने लगा था। उनके फैन्स इतने ज्यादा बढ़ चुके थे कि हर डायरेक्टर फिल्म में उनका एक गाना जरूर डालना चाहता था। ऐसे में सिल्क एक दिन में 3-3 शिफ्ट किया करती थी। वो एक गाने के लिए 50 हजार रुपए तक लेती थीं। साउथ के सुपरस्टार शिवाजी गणेशन, रजनीकांत, कमल हासन, चिरंजीवी तक अपनी फिल्मों में उनका एक गाना जरूर डालना चाहते थे। लगातार फिल्मों के चलते उन्होंने 10 सालों में करीब 500 फिल्मों में काम कर लिया।
बॉलीवुड में एंट्री
सिल्क की कामयाबी का जादू बॉलीवुड में भी चल चुका था। उन्होंने उस वक्त मायानगरी में एंट्री की जब जितेंद्र-श्रीदेवी और जितेंद्र-जयाप्रदा की जोड़ी हिंदी फिल्मों में सुर्खियां बटोर रही थी। उन्होंने 'जीत हमारी' नाम की फिल्म के जरिए बॉलीवुड में दस्तक दी। इसके बाद 'ताकतवाला', 'पाताल भैरवी', 'तूफान रानी', 'कनवरलाल', 'इज्जत आबरू', 'द्रोही' और 'विजय पथ' जैसी कई फिल्मों में वो नजर आईं।
निर्माता बनकर हुआ करोड़ों का घाटा
फिल्मों में अभिनय और गाने से सिल्क ने अच्छी आमदनी की। ऐसे में उनके एक करीबी मित्र ने उन्हें प्रोड्यूसर बनकर और पैसे कमाने का लालच दिया, जिसके बाद उन्हें पहली दो फिल्मों में ही 2 करोड़ रुपए का घाटा हो गया। उनकी तीसरी फिल्म तो बतौर प्रोड्यूसर पूरी ही नहीं हो सकी। फिल्मों में हुए घाटे का असर उनके निजी जीवन पर भी हुआ और मानसिक तौर पर वो काफी कमजोर हो गईं।
पंखे से झूलती मिली स्मिता का लाश
23 सितंबर, 1996 को सिल्क स्मिता की लाश उनके ही घर में पंखे से झूलती पाई गई। उनकी मौत की खबर ने साउथ फिल्म इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया। पुलिस ने इसे आत्महत्या बताकर केस बंद कर दिया। हालांकि, कई लोगों का मानना था कि उनकी मौत के पीछे की वजह कुछ और ही है। इस तरह 18 सालों तक साउथ इंडस्ट्री पर राज करने वाली ये एक्ट्रेस एक पहेली बनकर दुनिया से चली गई।
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