(फिल्म 'विश्वनाथ' के एक सीन में शत्रुघ्न सिन्हा)
मुंबई. बॉलीवुड में शॉटगन के नाम से मशहूर अभिनेता और पॉलिटिशियन शत्रुघ्न सिन्हा 68 साल के हो गए हैं। 9 दिसंबर 1946 को उनका जन्म पटना बिहार में हुआ था। शत्रुघ्न ने साल 1970 में देव आनंद की फिल्म 'प्रेम पुजारी' से बतौर अभिनेता बॉलीवुड में कदम रखा था। हालांकि, यह फिल्म डिले हो गई, जिसके कारण 1969 में आई 'साजन' शत्रुघ्न की डेब्यू फिल्म मानी जाती है।
इसके बाद उन्होंने 'मेरे अपने' (1971), 'सबक' (1973), 'दोस्त' (1974), 'कालीचरण' (1975), 'विश्वनाथ' (1978), 'दोस्ताना' (1980), 'क्रान्ति' (1981), 'नरम गरम' (1981), 'कैदी' (1984), 'ज्वाला' (19869), 'खून भरी मांग' (1988), 'आन' (2004) और 'रक्त चरित्र' (2010) जैसी कई फिल्मों में काम किया है। एक ओर जहां शत्रुघ्न को उनकी अदाकारी के लिए जाना जाता है, वहीं बुलंद आवाज के कारण उनके कई डायलॉग्स भी खूब पॉपुलर हुए। आज भी 'खामोश' जैसे कई डायलॉग्स आपको लोगों की जुबान पर चढ़े मिल जाएंगे।
dainikbhaskar.com अपने पाठकों को लाया है शत्रुघ्न सिन्हा के ऐसे ही कुछ चुनिंदा डायलॉग्स, जिन्हें आप नीचे पढ़ सकते हैं :
डायलॉग नं. 1 : 'जली को आग कहते हैं, बुझी को राख कहते हैं...जिस राख से बारूद बने, उसे विश्वनाथ कहते हैं।'
फिल्म : विश्वनाथ (1978)
डायलॉग नं. 2 : 'विश्वनाथ उस चीज का नाम है जो गरीबी और इंसानियत से प्यार करता है और आप जैसे राक्षसों पे वार करता है'
फिल्म : विश्वनाथ (1978)
आगे की स्लाइड्स में पढ़ सकते हैं शत्रुघ्न सिन्हा के कुछ और डायलॉग्स...