मुंबई। अपनी लाजवाब गजल गायकी से 'गजल सम्राट' का ख़िताब पाने वाले जगजीत सिंह का जन्म 8 फरवरी 1941 को राजस्थान के श्रीगंगानगर में अमर सिंह धीमन (एक सरकारी कर्मचारी) और बचन कौर के यहां हुआ था। ये जगजीत का जादू ही था कि उन्होंने ग़ज़लों को जब फ़िल्मी गानों की तरह गाना शुरू किया तो आम आदमी ने भी ग़ज़ल में दिलचस्पी लेनी शुरू कर दी। जगजीत सिंह को साल 2003 में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। फरवरी 2014 में जगजीत सिंह के सम्मान व स्मृति में दो डाक टिकट भी जारी किए जा चुके हैं।
ज्योतिषी के कहने पर बदला था नाम
चार बहन और दो भाइयों में जगजीत सिंह को सभी 'जीत' के नाम से बुलाया करते थे। पहले उनका नाम जगमोहन धीमन था, बाद में ज्योतिषी की सलाह पर उन्होंने अपना नाम जगजीत सिंह रख लिया। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई श्रीगंगानगर के खालसा हाई स्कूल से की थी। उन्होंने ग्रैजुएशन जालंधर के डीएवी कॉलेज से आर्ट में किया और पोस्ट ग्रैजुएशन की डिग्री हरियाणा के कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ली थी।
बचपन से ही था संगीत का शौक
जगजीत को संगीत का शौक बचपन से ही था। उन्होंने दो साल तक पंडित छगनलाल शर्मा के सानिध्य में संगीत की शिक्षा ली और उसके छः साल बाद सैनिया घराना स्कूल के उस्ताद जमाल खान से भारतीय शास्त्रीय संगीत के ध्रुपद, खयाल और ठुमरी सीखे। 1967 में जगजीत की मुलाक़ात चित्रा से उस दौरान हुई जब जगजीत जिंगल गाया करते थे। 1970 में कलकत्ता के प्रसिद्ध संगीत घराने की बेटी चित्रा दत्ता से उनका विवाह हुआ।
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