भारत का मंगल यान मंगल ग्रह की कक्षा में सफलतापूर्वक पहुंच गया है। इससे 48 घंटे पहले नासा का उपग्रह "मैवेन' भी यहां पहुंचा। मंगल ग्रह इतनी जिज्ञासाएं पैदा करता है कि वैज्ञानिक इसे समझने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।
बता दें कि मंगल को हिंदू पौराणिक कथाओं में पृथ्वी का पुत्र बताया गया है। आश्चर्य की बात है कि इन ग्रहों में काफी समानताएं भी हैं। मंगल पर जीवन भले ही न हो, लेकिन धरती के बाद कहीं जीवन की सबसे अनुकूल परिस्थितियां हैं तो वह इसी ग्रह पर हैं। इसलिए वैज्ञानिक इसे समझने में लगातार जुटे हैं। मंगल और पृथ्वी 2003 में सबसे करीब 5.6 करोड़ किलोमीटर पर थे। इतना नजदीक दोनों ग्रह 50 हजार साल बाद आए थे। अब 2018 में 5.7 करोड़ किलोमीटर पर होंगे।
इनके बीच की अधिकतम दूरी करीब 39 करोड़ किलोमीटर हो सकती है। इतनी अधिक दूरी पर होने की वजह से इसकी पर्याप्त जानकारी नहीं जुटाई जा सकी है, लेकिन जितनी जानकारी उपलब्ध है वह सकारात्मक दिशा में जा रही है। क्या मंगल पर कभी जीवन था? क्या वहां धरती की तरह महासागर है? क्या वहां मनुष्य के रहने के लिए वातावरण तैयार किया जा सकता है? इन सभी सवालों के जवाब तलाशने में वैज्ञानिक जुटे हुए हैं।
दो चंद्रमा हैं वहां
मंगल ग्रह पर दो चंद्रमा दिखाई देते हैं। इनके नाम फोबोस और डिमोस हैं। फोबोस डिमोस से थोड़ा बड़ा है। फोबोस मंगल की तरफ झुकता जा रहा है। अनुमान है कि पांच करोड़ साल में यह मंगल से टकराकर नष्ट हो जाएगा।
लोहे ने बनाया ब्राउन
मंगल ग्रह की सतह की मिट्टी और वातावरण में मौजूद धूल में बहुत अिधक मात्रा में आयरन ऑक्साइड (लोहे पर लगा जंग) है। इसके कारण यह गहरा भूरे रंग का नजर आता है। इसी लालिमा की वजह से इसे लाल ग्रह भी कहते हैं।
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