जिस इनोवशन की दुनिया में सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है वह है
गूगल की ड्राइवरलैस कार। यह कार अभी लोगों तक नहीं पहुंची है, लेकिन ड्राइवरलैस कार चलाने की अनुमति अमेरिका के चार राज्यों ने अभी से दे दी है। इस साल के आखिर तक करीब 200 प्रोटोटाइप कारें सड़क पर जाएंगी, जहां इसकी वास्तविक परिस्थितियों में टेस्टिंग होगी।
600 फीट का दायरा थ्रीडी में बनाकर ढूंढती है रास्ता
- सेंसर, जो 360 डिग्री घूमकर 600 फीट तक की थ्रीडी इमेज तैयार करता है।
- रडार और वीडियो कैमरा। वाहनों की स्पीड और सिग्नल बताते हैं।
- पावरफुल प्रोसेसर, जो कार की गतिविधि को माॅनिटर करता है।
- व्हील सेंसर, कार के घुमाव और लोकेशन बताता है।
- वाइडस्क्रीन, जो ग्लास की होकर प्लास्टिक की बनी है।
- सॉफ्ट फोम से बनी फ्रंट बॉडी, कोई टकराए तो उसे चोट लगे।
नो स्टीयरिंग, नो ब्रेक; सिर्फ दो बटन स्टॉप और गो
- दो पैसेंजर के बैठने की जगह।
- कार में दो ही बटन-स्टॉप और गो।
- न कोई स्टीयरिंग, ब्रेक, एक्सेलरेटर और न ही गियर
- कार की अधिकतम स्पीड 40 किमी प्रति घंटा। (सिर्फ शहर में ही चलाने के अनुकूल)
बिना टकराए सात लाख किमी चल चुकी है
- गूगल को भरोसा है कि ड्राइवरलैस कार से टक्कर की गुंजाइश 90% कम हो जाएगी।
- अप्रैल 2014 तक, यह कार बिना दुर्घटना के 7 लाख किमी चल चुकी है।
- कार से दो हादसे तब हुए, जब इसे मैन्यूअली ड्राइव किया जा रहा था।
कितनी कीमत और कब मिलेगी?
- कार की टेक्नोलॉजी डेवलप करने में डेढ़ करोड़ रु. खर्च हुए।
- गूगल बजाय ड्राइवरलैस कार बनाकर बेचने के, इसकी टेक्नोलॉजी कार कंपनियों को बेचने में दिलचस्पी रखता है। अपने
मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम एंड्रॉयड की तरह। ताकि कार कम से कम कीमत में लोगों तक पहुंचे।