(जॉनसन आईलैंड की एक तस्वीर)
अमेरिका से सटे मध्य प्रशांत महासागर के बीच में स्थित जॉनसन एटॉल आईलैंड पर आज चिड़ियों और मछलियों का कब्जा है। लेकिन, इस पर कभी अमेरिकन नेवी और आर्मी का कब्जा था, जहां पर न्यूक्लियर बम व इससे जुड़े हथियारों की टेस्टिंग किया जाता था। 50 मील के दायरे में फैले इस आईलैंड पर एक विशाल रनवे भी है, जिसका उपयोग अमेरिकन आर्मी करती थी।
बताया जाता है कि सन् 1926 में इस आईलैंड को पक्षियों के लिए सुरक्षित छोड़ने का आदेश जारी किया गया था, लेकिन 1934 में इस आदेश को बदलकर इसे अमेरिकन नेवी को सौंप दिया गया। धीरे-धीरे वन्य जीवों के लिए आरक्षित यह क्षेत्र परमाणु हथियारों की टेस्टिंग का अड्डा बन गया।
हवाई आईलैंड से 750 मील दूर पश्चिम दिशा में स्थित यह द्वीप छोटा था, लेकिन इसे कोरल ड्रैगिंग (प्रवाल तलकर्षण) के जरिए बढ़ाया गया। इसके परिणामस्वरूप इस द्वीप पर विशाल सेना के साथ 1000 लोगों के रहने के लिए आवास बना दिए गए।
सन् 1958 से 1975 के बीच इस द्वीप पर खूब परमाणु हथियारों के परीक्षण किए गए, जिससे यहां काफी मात्रा में रेडिएशन फैल गया। ऐसे में 1993 के बाद वहां से सैनिकों को हटा दिया गया। इसके बाद 2003 में वहां के सारे स्ट्रक्चर्स को तोड़कर आईलैंड को फीश एंड वाइल्डलाइफ सर्विस के रूप में डेवलप कर दिया गया।
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