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पहले अंग्रेजों के लिए बनाते थे हथियार, अब तालिबानियों को करते हैं सप्लाई

7 वर्ष पहले
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(फोटो दर्रा अदम खेल गांव में अवैध हथियार की एक दुकान)
दुनियाभर के खतरनाक हथियारों की नकल कर हूबहू बना देने की कला के लिए पाकिस्तान का एक गांव कुख्यात है। बता दें कि पाकिस्तान के पेशावर और कोहट शहर के बीच एक छोटा सा गांव है 'दर्रा अदम खेल'। इस गांव की खासियत यह है कि यहां की करीब 75 फीसदी आबादी अवैध हथियारों को बनाने के कारोबार में लगी है। ये लोग खुलेआम अवैध हथियार को बनाकर बेचने का काम करते हैं।
अफगानिस्तान और तालिबान में यहीं से बने हथियार सप्लाई किए जाते हैं। यह काम कब से हो रहा है, इसकी साफ़-साफ़ जानकारी किसी को नहीं है, अलबत्ता कुछ लोगों का मानना है कि यह काम 1875 से किया जा रहा है। कहते हैं कि उस दौरान यहां के लोग अंग्रेजों के लिए हथियार बनाते थे। आप को आश्चर्य होगा लेकिन यहां के लोग अवैध हथियार बनाने में इतने हुनरमंद हैं कि मशीन गन्स, राइफल, क्लाश्निकोव से लेकर रॉकेट लॉन्चर तक बना लेते हैं। इस कारोबार में करीब 2500 लोग लगे हुए हैं।
इस इलाके में टहलते हुए आप गांव की दुकानों अति आधुनिक रिवॉल्वर, ऑटोमेटिक पिस्टल, शॉटगन के निर्माण और कारोबार को देखकर एकबारगी चौक सकते हैं लेकिन यह यहां के लोगों के लिए यह बहुत ही आम बात है। इसका अंदाजा इस बात से भी लगा सकते हैं कि हथियारों को बनाने के इस खतरनाक धंधे में इलाके के बहुत सारे बच्चे भी शामिल रहते हैं। यहां के लोग हथियारों का निर्माण जहाज बनाने वाली धातु से करते हैं। खास बात यह है कि इस गांव के लोग कई पीढ़ियों से हथियार बनाने का काम करते आ रहे हैं। यहां के बने हथियार काफी सस्ते होते हैं।
आगे की स्लाइड्स में देखें हथियार के कारोबारी गांव की कुछ तस्वीरें...