आजकल कृष्णा राज कपूर मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं। कपूर परिवार की हमेशा केंद्रीय ऊर्जा व प्रेरणा रहीं कृष्णाजी की सेहत के लिए प्रार्थना करने वालों की संख्या विराट है। इनमें अनेक लोग ऐसे हैं, जिनसे वे कभी मिलीं नहीं परंतु उनके व्यक्तित्व की आभा से वे परिचित हैं, क्योंकि भारतीय सिनेमा उद्योग के इस प्रथम परिवार के तमाम लोगों में कहीं न कहीं कृष्णाजी के सद्भाव का प्रभाव मौजूद रहा है और चेहरों के पीछे छिपे चेहरे अपने जादुई ढंग से उजागर होते हैं।
कृष्णा राज कपूर ने कभी कोई साक्षात्कार नहीं दिया, न कभी कोई लेख लिखा। वे महान राज कपूर की पत्नी होने के साथ शम्मी कपूर व शशि कपूर की भाभी भी रही हैं। उनके अपने तीन पुत्र सितारे रहे हैं। दोनों पुत्रियां रितु और रीमा भी बहुत नेक और मददगार स्वभाव की महिला हैं। आज उनका पोता रणवीर कपूर लोकप्रिय सितारा है। उनके भाई प्रेमनाथ, भाभी बीना राय, राजेंद्र नाथ इत्यादि सभी फिल्म संसार में प्रसिद्ध रहे हैं परंतु इस सबके बावजूद उन्होंने कभी साक्षात्कार नहीं दिया, कभी कोई बयान नहीं दिया। उनका कोई फेसबुक या ट्विटर अकाउंट भी नहीं है। यह उनकी सादगी और सरलता है कि वे लाइम लाइट का केंद्र रहते हुए भी कभी उजागर नहीं हुईं। उन्हें अपनी निजता की रक्षा करनी आती है।
राज कपूर अपनी दावतों के लिए बड़े लोकप्रिय रहे हैं परंतु उनकी दावतों की सारी व्यवस्था कृष्णा कपूर करती रही हैं। दावत की घोषणा के दिन से लेकर उसके सफल संचालन के बाद भी बहुत काम रहता है, जो कृष्णाजी ने अत्यंत सहजता से किया। दावतों के बाद इधर-उधर बिखरा खाना, कुछ टूटे ग्लास और झुठन से भरी प्लेटों को अपने सेवकों की सहायता से ठिकाने लगाने तक का सारा काम और योजना वे ही बनाती रहीं अौर रात में शुरू होकर अलसभोर में खत्म होने वाली दावतों में हर मेहमान की सुविधा का खयाल रखना तथा यह भी देखना और इंतजाम करना कि मेहमानों के ड्राइवर, मेमों की आयाओं तक ने भोजन किया या नहीं, आसान काम नहीं था। हर दावत के बाद कई काम करना पड़ते हैं और कृष्णाजी ने इन सब कार्यों को ‘मिसेज इंडिया’ की तरह अदृश्य-सी रहकर किया है।
उनके पुत्र ऋषि कपूर के विवाह के समय सुनील दत्त व नरगिस दत्त भी समारोह में शामिल हुए। राज कपूर तो ठगे-से खड़े रहे परंतु कृष्णा ने मेहमानों का आत्मीयता के साथ स्वागत किया और जब वे नरगिस के साथ खड़ी थीं, तब नरगिस ने उनसे कहा कि आज पत्नी अौर मां बनने के बाद वे कृष्णा कपूर को बेहतर ढंग से समझ सकती हैं और विगत में उनके दुख का कारण बनने के लिए खेद प्रकट करना चाहती हैं। कृष्णाजी ने नरगिस को आश्वस्त किया कि उन्हें कोई अनावश्यक अपराध बोध नहीं पालना चाहिए, क्योंकि उनके पति इस कदर प्रेमल स्वभाव के हैं कि नरगिस नहीं होतीं तो कोई और होता। उनकी यह उदारता और अन्य लोगों की परिस्थितियों को समझने के माद्दे ने नरगिस को मिथ्या अपराध बोध से मुक्त किया और उनके हृदय पर रखा पत्थर हट गया। राज कपूर ने अपनी फिल्मों की नायिकाअों की जो छवियां गढ़ीं, वे सब कृष्णाजी के विराट व्यक्तित्व की ही झलकियां मात्र रही हैं। राज कपूर तो उस मृग की तरह वन-वन भटके, जिसे अहसास ही नहीं था कि वह सुगंध उसकी अपनी है, जिसे वह अन्य जगह खोज रहा था। अनेक सृजनशील कलाकार, जो अपनी कल्पना से एक संसार रचते रहे, वे उस संसार के बारे में यह जान ही नहीं पाए कि वह कैसे घूम रहा है और उसकी नाभि कहां है?
कृष्णाजी 1 जनवरी 1930 को रीवा में जन्मी जहां 1946 में उनका विवाह हुआ और मध्यप्रदेश सरकार ने उस मकान को अधिग्रहीत किया है अौर वहां हजार सीट का ऑडिटोरियम बन रहा है। यह कार्य प्रशंसनीय है परंतु 500 सीट के ऑडिटोरियम के साथ कृष्णाजी को समर्पित 200 सीटों वाला ऑडिटोरियम भी बनाना चाहिए। वे राज कपूर के यश की रीढ़ रही हैं। उनके जैसी विलक्षण महिलाएं इस लोकप्रिय धारणा को भी ध्वस्त करती हैं कि पुरुष की पसली से महिला की रचना हुई। वह तो स्वयं ही एक ब्रह्मांड है।