हिंदी, तेलुगु, कन्नड़ और पंजाबी फिल्मों में तरह-तरह के किरदार निभाने के बाद ट्यूलिप जोशी अब टीवी स्क्रीन पर नज़र आ रही हैं। क्या कर रही हैं वे?
11 सितंबर
, 1979 को मुंबई में जन्मीं ट्यूलिप जोशी के पिता भारतीय हैं और मां अमेरिकी। साल 2000 में ट्यूलिप ने मिस इंडिया प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लिया। हालांकि खिताब तो वे नहीं जीत पाईं, लेकिन कई फिल्मकारों की निगाह में जरूर आ गईं। इसके बाद ट्यूलिप ने कई चर्चित ब्रांड्स के लिए `एड' किए और आखिरकार, एक इत्तेफाक ऐसा हुआ कि वे हीरोइन बन गईं। जानकार बताते हैं कि एक शादी में ट्यूलिप को यशराज फिल्म्स के आदित्य चोपड़ा ने देखा और उन्हें `मेरे यार की शादी है' की हीरोइन के तौर पर चुन लिया। फिल्म सफल रही। फिल्म `मातृभूमि' के लिए क्रिटिक्स ने भी खूब सराहा। कुछ अरसे बाद
शाहिद कपूर के साथ `दिल मांगे मोर' आई, लेकिन इसे संयोग ही कहेंगे कि बतौर हीरोइन ट्यूलिप की पारी ज्यादा कामयाब नहीं रही। उन्होंने तेलुगु, पंजाबी, कन्नड़ भाषाओं में भी फिल्में की और अब आखिरकार, टेलीविजन के परदे पर नज़र आ रही हैं।
ट्यूलिप इस बात से इनकार करती हैं कि मनचाही सफलता न मिलने के कारण उन्होंने टीवी को चुना है। वे कहती हैं — `टेलीविजन सिनेमा से छोटा माध्यम बिल्कुल नहीं है।
अमिताभ बच्चन जैसे दिग्गज टीवी पर काम कर रहे हैं। मैंने स्माल स्क्रीन कोे कई कारणों से चुना है। एक तो इसकी `रीच' बहुत ज्यादा है, दूसरे जिस कैरेक्टर के लिए ऑफर मिला है, वह मुझे बहुत पसंद आया।'
ट्यूलिप स्टार प्लस पर प्रसारित हो रहे धारावाहिक `एयरलाइंस — हर उड़ान, एक तूफान' में फ्लाइट ऑफिसर अनन्या रावत का किरदार निभा रही हैं। वे बताती हैं कि एविएशन इंडस्ट्री में पुरुषों का बोलबाला है। महिलाओं के हाथ जहाज उड़ाने का मौका अक्सर नहीं आता। मैं बचपन से ही पायलट बनना चाहती थी।
निजी ज़िंदगी में ये ख्वाब पूरा नहीं हो सका। जब अनन्या की भूमिका निभाने का मौका मिला तो खयाल आया कि कम से कम स्क्रीन पर ही सपना जी लूं। इसके अलावा, मेरा कैरेक्टर बहुत-सी महिलाओं के मन में उनके ख्वाबों की ओर बढ़ने का हौसला जगाएगा। वीजे टर्न्ड एक्टर युधिष्ठिर कैप्टन आकाश का कैरेक्टर प्ले कर रहे हैं। मेरा किरदार सामान्य महिला पायलट का ही नहीं है। वह एक ऐसी स्त्री को भी दर्शकों के सामने पेश करता है, जो हजारों फीट की ऊंचाई पर आने वाली मुश्किलों का सामना करना जानती है।
ट्यूलिप मानती हैं कि एक महिला को घर और बाहर की दोहरी ज़िम्मेदारी संभालनी पड़ती है और किसी औरत को अपने सपने जीने में दोगुनी मेहनत करनी होती है। वे कहती हैं, `परिवार मेरे लिए सबसे पहले है। यह हर भारतीय स्त्री की स्थिति है। वह रिश्तों की खातिर कई बार अपने ख्वाबों को पीछे छोड़ देती है, लेकिन कोशिश करनी चाहिए कि घर और दफ्तर, दोनों को साथ-साथ साधा जा सके।'