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रियल लाइफ में 'जेठालाल' से छोटे हैं उनके ऑनस्क्रीन पिता, जानें ऐसे ही फैक्ट्स

7 वर्ष पहले
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(फाइल फोटो : दिलीप जोशी और अमित भट्ट।)

मुंबई.सब टीवी पर प्रसारित होने वाले शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’की शुरुआत 28 जुलाई 2008 से हुई थी। अब यह सफलतापूर्वक अपने 1500 एपिसोड्स पूरे कर चुका है। अब भी जिस तरह इसकी लोकप्रियता बनी हुई है, उससे साफ होता है यह अभी और लंबी पारी खेलेगा। आपको जानकर हैरानी होगी कि यह एक ऐसा सीरियल है, जो सिर्फ भारत ही नहीं, अमेरिका, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी लोकप्रिय है। यह तो आप जानते ही हैं कि यह सीरियल हास्य से भरपूर है, लेकिन इसके वास्तविक फैक्ट्स के बारे में कम ही लोग जाते हैं। जैसे, कम ही लोगों को पता होगा कि शो में जेठालाल(दिलीप जोशी) के पिता चंपकलाल का किरदार निभाने वाले अमित भट्ट रियल लाइफ में दिलीप जोशी से उम्र में 5 साल छोटे हैं। आइए जानते हैं सीरियल से जुड़ी ऐसी ही कुछ बातें...
रियल तारक मेहता के घर असित मोदी का फोन :
साल सन् 2001 दिसंबर की शाम दुनिया भर में फैले गुजरातियों के प्रिय हास्य कलाकार तारक महेता के घर पर फोन की घंटी बजती है। फोन श्रीमती इंदुबेन रिसीव करती हैं।
हैलो?
यह फोन मुंबई से था.. सामने वाला व्यक्ति कहता है, ‘मुझे तारक महेता से काम है।’
‘महेता तो अभी सो रहे हैं.. बताइए आपको उनसे क्या काम है?’,
‘मैं टीवी प्रोड्यूसर हूं। सीरियल्स बनाता हूं। मुझे ‘दुनियाने ऊंधा चश्मा’ में गहरी दिलचस्पी है। इसी बारे में बात करनी थी।’
‘लेकिन महेताजी अभी आपसे बात नहीं कर सकते। आप एक काम कीजिए, एक फोन नंबर नोट कर लीजिए। इस नंबर पर आप सीरियल के बारे में पूरी बात कर सकते हैं।’
‘जी, लेकिन जिनका नंबर आप दे रही हैं, उनका नाम क्या है?’
‘महेश वकील.. ये हमारे घर के सदस्य ही हैं, आप नंबर नोट कर लीजिए।’
इंदुबेन महेश वकील का नंबर दे देती हैं। दरअसल सूरत के बिल्डर महेश वकील, तारक महेता के सबसे बड़े फैन से अब उनके पारिवारिक मित्र बन चुके थे। महेश वकील ने भी ‘दुनियाने ऊंधा चश्मा’ उपन्यास पर टीवी सीरियल बनाने का सपना देखा था। इतना ही नहीं, उन्होंने तो इसके लिए कोशिश भी की थी।
महेश वकील का नंबर नोट कराते ही अचानक इंदुबेन फिर पूछती हैं, सॉरी मैं आपका नाम भूल गई, प्लीज फिर से बता दीजिए। सामने वाला व्यक्ति अपना नाम बताता है। और इसके बाद इंदुबेन टेलीफोन के पास रखी डायरी में उसका नाम नोट कर डायरी बंद कर देती हैं और अपने काम में व्यस्त हो जाती हैं।
दरअसल डायरी पर लिखा नाम था.. ‘असित मोदी, नीला टेलीफिल्म्स (मुंबई)।’
इंदुबेन को इस समय पता ही नहीं था कि यह फोन उनके पूरे परिवार को विश्व भर में पहचान दिलवा देने और असित मोदी के सपने को साकार करने के लिए ही आया था।

आगे की स्लाइड्स में पढ़े, पैदा होते वक्त भी नहीं रोए थे प्रोड्यूसर असित मोदी और 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' के बाक़ी फैक्ट्स...