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डाउनलोड करेंपाटण. 18 अप्रैल को वर्ल्ड हेरिटेज डे है। इस मौके पर हम आपको पाटण (गुजरात की प्राचीन राजधानी) स्थित ‘रानी की वाव’ से जुड़े कुछ रोचक तथ्यों से रू-ब-रू करवाने ले जा रहे हैं। दरअसल, यह बावड़ी (सीढ़ीदार कुआं) 11वीं सदी की वास्तुकला का ऐसा बेजोड़ नमूना है, जिसकी तारीफ शब्दों में करना मुमकिन नहीं। यही वजह है कि इसे 23 जून, 2014 को यूनेस्को के वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल किया गया।
- बता दें कि \'रानी की वाव\' ऐसी इकलौती बावड़ी है, जो वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल हुई है। यह इस बात का सबूत है कि प्राचीन भारत में वाटर मैनेजमेंट का सिस्टम कितना शानदार था।
- इसका निर्माण 10-11वीं सदी में सोलंकी राजवंश की रानी उदयमती ने पति भीमदेव सोलंकी की याद में करवाया था। यह प्रेम का प्रतीक कहलाती है।
- राजा भीमदेव ही सोलंकी राजवंश के संस्थापक थे। भीमदेव गुजरात के सोलंकी वंश के शासक थे। उन्होंने वडनगर (गुजरात) पर 1021-1063 ई. तक शासन किया था।
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