अहमदाबाद। अमेरिका से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गवाही दे रहे आतंकी डेविड कोलमैन हेडली ने खुलासा किया है कि अहमदाबाद में एनकाउंटर में मारी गई इशरत जहां लश्कर-ए-तैयबा की ही आतंकी थी। हालांकि, यह बात जून 2013 में इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) द्वारा आतंकियों के बयानों और इंटेलिजेंस इनपुट के हवाले से जारी एक नोट में भी कही गई थी।
हथियार खरीदने के लिए यूपी के इब्राहिमपुरा गांव गई थी इशरत...
नोट के अनुसार, इशरत जहां लश्कर-ए-तयैबा से जुड़ी आतंकवादी थी। उसे यूसुफ मुजम्मिल नाम के एक लश्कर कमांडर ने आतंकी कार्रवाइयों के लिए ‘मॉड्यूल’ और ‘महिला सुसाइड बॉम्बर’ के रूप में भर्ती और तैयार किया था। वह जावेद और सलीम नामक आतंकियों के साथ हथियार खरीदने के लिए उत्तर प्रदेश के इब्राहिमपुरा गांव तक आई थी।
अहमदाबाद में हुआ था एनकाउंटर:
- अहमदाबाद के नरोडा कोतरपुर वोटर वर्कस के पास 15 जून 2004 को एनकाउंटर को अंजाम दिया गया था।
- इशरत जहां के साथ उसके तीन साथी जावेद शेख उर्फ प्रणेश पिल्लई, अमजद अली और जीशान जौहर अब्दुल गनी मारे गए थे।
- सितम्बर, 2004 में इशरत की मां शमीमा बेगम ने कोर्ट में नकली एनकाउंटर की शिकायत दर्ज करवाई थी।
- सितम्बर, 2009 : गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य के आला पुलिस अधिकारियों की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) का गठन किया था।
- दिसम्बर, 2011 : हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई को जांच सौंपी गई थी।
इशरत जहां और उसके तीन साथियों का एनकाउंटर काफी चर्चित मामला है। उस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। मामले की जांच पहले गुजरात हाईकोर्ट द्वारा गठित एसआईटी और उसके बाद सीबीआई को सौंपी गई थी। लगभग डेढ़ साल की जांच के बाद सीबीआई ने एनकाउंटर को फर्जी करार दिया था। आइए सिलसिलेवार इस घटनाक्रम पर नजर डालते हैं...
आगे की स्लाइड्स में पढ़ें, नोट का अगला अंश...