अहमदाबाद। गुजरात में इन दिनों शाहरुख खान की आगामी फिल्म ‘रईस’ की शूटिंग चल रही है। फिल्म की कहानी एक समय (1980 से 1997 तक) गुजरात के कुख्यात डॉन रहे अब्दुल लतीफ के जीवन पर आधारित है। वर्ष 1997 में गुजरात पुलिस ने एनकाउंटर में लतीफ को ढेर कर दिया था। अंडरवर्ल्ड दाउद इब्राहिम भी डर गया था लतीफ से...
लतीफ का शराब बेचने से लेकर डॉन बनने तक का सफर...
अहमदाबाद के दरियापुर इलाके में रहने वाले अब्दुल लतीफ का आपराधिक सफर कालूपुर ओवरब्रिज के पास देशी शराब बेचने से शुरू हुआ था। धीरे-धीरे उसने अंग्रेजी शराब बेचनी भी शुरू कर दी थी। शराब की अवैध बिक्री से अच्छी खासी कमाई कर लेने के बाद लतीफ ने शहर के कोट इलाके में रहने वाले कुख्यात बदमाशों को अपनी गैंग में शामिल कर लिया। इससे लतीफ का कद धीरे-धीरे बढ़ने लगा। इसके बाद लतीफ ने हथियार सप्लाई करने वाले शरीफ खान से हाथ मिला लिया और अब शराब के साथ-साथ हथियारों की भी तस्करी करने लगा।
कई गैंग को तोड़कर अपना साम्राज्य खड़ा किया:
कुछ ही सालों में लतीफ एक कुख्यात अपराधी बन चुका था, लेकिन किसी भी गैंगवार में वह खुद सामने नहीं रहा। लतीफ ने चालाकी से कई छोटी-मोटी गैंग में फूट करवा दी और उनके साथियों को अपनी गैंग में मिला लिया। इस तरह अहमदाबाद के बाद उसका साम्राज्य पूरे गुजरात में फैल गया। लतीफ ने गुजरात में अवैध शराब बेचने का नेटवर्क तो इस कदर खड़ा कर लिया था कि कोई भी बुटलेगर (अवैध शराब बेचने वाला) बिना उसकी मर्जी से शराब नहीं बेच सकता था। उसे शराब लतीफ से ही खरीदनी पड़ती थी।
लतीफ के डर से दाऊद भी भाग निकला था:
शहर के मुस्लिम इलाकों में लतीफ बेरोजगार युवकों के लिए मसीहा माना जाने लगा था। क्योंकि, वह बेरोजगार युवकों को अपनी गैंग में शामिल कर लेता था। इसलिए लतीफ की गैंग के सदस्यों की संख्या हजारों में थी। इसकी वजह से उसे राजनीतिक सपोर्ट भी मिलने लगा था। बताया जाता है कि उस समय अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहिम भी वडोदरा में ड्रग्स का नेटवर्क खड़ा कर चुका था। एक बार दाउद और लतीफ के बीच गैंगवार छिड़ गया। लतीफ के गुर्गों ने दाउद को घेर लिया था और दाउद को वडोदरा से भागना पड़ गया था।
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